व्यथा

Posted by Gaurav Korkoo
April 4, 2017

Self-Published

आज पूरे देश में मन की बात कहने का चलन चल रहा है और लग है की हर अपने मन की बात कह रहा हो पर देखने में ऐसा लगता​ है की हम एक-दूसरे​ से चिढ़ रहे​ हो और उस चिढ़ से जो मन में आ रहा हो उसे हम मन की बात के रूप में बोल रहे हो अगर ऐसा है तो ये बहुत बूरा है हमारे लिए ओर समाज के लिए और ऐसा ही चल रहा है हमारे समाज में कैसे हम किसी की बात को सूने बगैर ही गलत मान लेते और गलत मानने काम ये चलन बहुत तेजी से बढ रहा है चाहे सोशल मिडिया पर हो या हमारी निजी जिंदगी में हो आज इसका बड़ा रूप समाज जगह बना चुका है हमें इस के लिए समय रहते हुए समझना होगा की केवल हम अकेले सही नहीं है और लोग भी हैं और दूसरे तरीके भी हैं जो सही है

अगर मेरी बात ठीक लगे तो दूसरों को समझने की कोशिश करे

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