संशोधन किसमें जरूरी कानून मे या हममे?

Posted by Er Sharat Rai
April 6, 2017

Self-Published

जय हिंद
जय महादेव

दोस्तों फर्ज कीजिये आप कही जा रहे हो या दैनिक दिनचर्या के दौरान बाजार में घूम रहे हो तभी आप देखते है कि चौराहे पर पुलिस चेकिंग शुरू हो गयी या पुलिस किसी से कुछ पूछ ताछ कर रही है । यह दृश्य देखकर आप सहम जाते है क्योंकि आपके पास आपका परिचय पत्र , आधार कार्ड , ड्राइविंग लाइसेंस , गाडी के रजिस्ट्रेशन के कागजात नही है ।
इस स्थिति में आप पुलिस से नजर चुरा कर चुपके से निकलने की कोशिश करते है जैसा की साधारण तौर पर सभी लोग करते है लेकिन …….😢😢😢
आहो दुर्भाग्य की आपकी इन हरकतों पर एक पुलिसकर्मी अपनी नजरे गड़ाये हुए है और उसने आपको पकड़ लिया ।
आप घबराए रुके , उसने आपसे पहचान पत्र , ड्राइविंग लाइसेंस , गाड़ी के कागजात आदि मांगे जो की आप उसे देने में असफल हुए ।
फिर उस पुलिस कर्मी ने उसे पुलिस ट्रेनिंग के दौरान मिले अभद्र भाषा और अपशब्दों के संस्कारों से आपको सम्मानित कर दिया अब आपको भी जरा गुस्सा आया और आप दोनों में नोक झोक हो गयी ………..
इतने में उस वर्दीधारी ने आपको कंटाप दे दिया आपने भी ताव में उसका कॉलर पकड़ लिया जो की अब ……
” कानून की तौहीन ” हो गयी और आप पर पुलिस वाले पर हाथ उठाने के जुर्म में मुकदमा हो गया……..

इस पुरे लाइव टेलीकास्ट के दौरान जनता जनार्दन सदियों से आरहे ” मूक दर्शक ” की परम्परा को पूर्णतया और पूरी ईमानदारी से निभायी ………….

उपरोक्त अपठित गद्यांश में ——-
प्र० :- क्या पुलिस को संवैधानिक अधिकार है जनता को पूछ ताछ के दौरान अपशब्द बोलने और हाथा पाई करने का?
प्र० :- उपरोक्त घटना में अभियुक्त पर हुए मुकदमे से आप कितने सहमत है ?
प्र० :- इस स्थिति में जनता का दायित्व क्या हो सकता है ?

#इंजी०_शरत_राय
#जय_हिंद
#जय_भारत💐

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