“समान कार्य के लिए समान वेतन” मांगने वाले शिक्षको से दो टूक

Posted by Arun Kumar Ojha
April 12, 2017

Self-Published

शिक्षक समाज के लिए आदर्श है इनके व्यवहार को देख के  लोग अनुसरण करते है पर कुछ दिनों से हाइप्रोफ़ाइल  ड्रामा को देख इन महशयों से कुछ कहने को जी चाहता है

समान कार्य = समान वेतन की मांग करने वाले शिक्षक बन्धु आप जो कह रहे है की NCTE के नियमानुसार वेतन चाहिए जो कि 9300-34800 होता है नहीं तो हम वो सब करेंगे जो एक शिक्षक को कतई शोभा नहीं देता.

शायद NCTE के नियम को पढ़ते समय ये ध्यान  नहीं दिए कि बिना ट्रेंड B.Ed ,D.Ed हुए आप शिक्षक पात्रता परीक्षा के फॉर्म भी नहीं भर सकते नौकरी लगना तो दूर की बात है परन्तु किसी सरकार ने NCTE  से स्पेशल आर्डर लेकर अनट्रेंड शिक्षको को न  सिर्फ परीक्षा में शामिल होने दिया अपितु उन्हें नौकरी भी दी गयी सही कहा है ऊँगली  पकड़कर सहारा दे – तो धीरे धीरे गला पकड़ता है चरितार्थ हुयी.

अब बात करते है आप महानुभाओं के जिम्मेदारियों  की तो जब किसी सरकारी स्कुल पर नजर पड़ती है तो दया आती है उन मासूमो पर जिन्होंने अपना भविष्य आपके उम्मीद पर छोड़ दिया  और आप अधिकतम उनके भविष्य से खिलवाड़ करते नजर आते है तब तो आपके पास अच्छे अच्छे बहाने होते है जैसे खिचड़ी, जनगणना, चुनाव, मतगणना इत्यादि कास आप लोग इनसारे कार्यो में न जाने  के लिए ऐसे  ही आंदोलन करते,

आप कहते है की पूरी शिक्षा व्यवस्था MDM  ने चौपट कर दिया है  परन्तु आजतक किसी शिक्षक को आगे आकर सरकार से इसे बंद करने या इसकी जिम्मेदारियों को  शिक्षको से लेने के लिए बोलते हुए नहीं देखा कारण तो आप समझ ही रहे है .

 

मैं  मानता हूँ की आपको अच्छे वेतन मिलने चाहिए परन्तु  आप अपने  जिम्मेदारियों  से भागते है दुःख उसपे है,  देश के 72% छात्र आज भी आपलोगो पर निर्भर है परन्तु राज्य सरकार के गलत  नीति के चलते बहुत ऐसे  समान वेतन पाने वाले  शिक्षक   भी बहाल हो गए जो APPLE  और SUNDAY के स्पेलींग भी नहीं बता पाते और कुछ को आशीर्वाद और नमस्कार भी लिखने नहीं आता सरकार के खिलाफ आन्दोलन तो इसके लिए भी होना चाहिए. यदि आप में क्षमता  है शिक्षा प्रदान करने का तो आप अपना काम ईमानदारी से करे और बच्चो में जोश और जूनून पढाई के लिए भरे उन्हें निजी स्कूलों के छात्रों से भी बेहतर बनाये फिर आपको इस आंदोलन की जरूरत नहीं पड़ेगी आम जनता आपके मांगो के लिए तख्ता पलट कर देगी लेकिन  आप तो कुर्सी पे सोने, लेट से विद्यलय जाने, फालतू के गप्पे उडाने और जाड़े में धुप में वेतन के चर्चा कर समान कार्य के लिए सामान वेतन लेना चाहते है तो कभी नजर डालें निजी विद्यालय  के शिक्षको पर उनके  कार्य और वेतन देखे शर्म आएगी शायद आप सबो को बाकि आप सब समझदार है.

धन्यवाद

 

ई० अरुण कुमार ओझा, M.Tech ,

संस्थापक – बिहार इंस्टिट्यूट ऑफ़ प्रोफेसनल ट्रेनिंग, बक्सर

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