सिर्फ सरकार या सिस्टम नही बल्कि हमारा समाज भी करप्ट हो चूका है |

Posted by Ashish Singh
April 3, 2017

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बिहार में मिथलांचल के एक छोटे से गाँव से दिल्ली तक के सफ़र में मैंने उन सभी जरूरतों को महसूस किया है , जो शायद मेरे जैसा हर एक युवा को अपने करियर के सफ़र में महसूस हो रहा होगा | इन जरूरतों का एहसास मुझे परिस्थितियों के हुआ | और इन जरूरतों को पूरा करते हुए मैं जैसे-जैसे सफ़र में आगे बढ़ता गया , मुझे उन सभी खामियों का पता चलता गया जो की हमारे मानसिकता , समाज और सरकार में शायद घर बना चुकी है |

बात 2006 की है जब मुझे अपने गाँव से दूर एक प्राइवेट स्कूल के हॉस्टल में पढाई के लिए रखा गया | शायद मेरे पेरेंट्स ने यह कदम इसलिए उठाया था क्योंकि मेरे गाँव या उसके आस-पास पढाई की अच्छी व्यवस्था नही थी | केन्द्रीय विद्यालय के अलावा और कोई अछि संसथान नहीं थी जिसमे इंग्लिश मीडियम की अच्छी पढाई हो | मेरे पिता जी का मानना था की सरकारी विद्यालय में पढाना मतलब अपने बच्चे का करियर ख़राब करना है | हालांकि, मेरी माँ सरकारी स्कूल की ही शिक्षिका थी और मेरे दादा जी भी रिटायर्ड सरकारी शिक्षक हैं |

पत्रकारिता की पढाई करने के लिए जब मैं दिल्ली आया तब मुझे अपने पापा के उस विचार और मुझे हॉस्टल भेजने की बात समझ आई | मुझे साफ दिखा की पापा का वह कदम सही था और उनके विचार भी | अपने बच्चे का भविष्य कोई उस स्कूल में भेज कर बर्बाद नहीं करना चाहेगा जहाँ 600-700 बच्चों पर 2 शिक्षक हों और न शौचालय की व्यवस्था हो और न ही कोई अकादमिक प्रोसेस | आश्चर्य की बात तो यह है की सरकार उन दो शिक्षकों को भी साल में कई दिन जनगणना , वोट , और कई साड़ी चीजों में उलझा देती है |

अब मुझे कई प्रश्नों का जवाब मिल रहा था | इस व्यवस्था के लिए जिम्मेदार कौन ? अगर व्यवस्था इतनी बुरी है तो लोग मुह फेरने के बदले आवाज क्यूँ नहीं उठाते ? अगर सरकार आवाज नहीं सुनती है ,तो फिर उसी सरकार को जात-पात, धर्म के नाम पर और पैसे लेकर क्यों वोट करते हैं ? इन प्रश्नों का जवाब मुझे बस यही मिला था की सिर्फ सरकार और सिस्टम नहीं बल्कि हमारे समाज के मानसिकता में भी करप्शन है | यह बात आपको थोड़ी कड़वी जरुर लगी होगी लेकिन यह सच है | और मैंने इस सच को माना है और भलाई इसी में हैं की हम सबको इसे मानना चाहिए | अगर आप कहते हैं की यह गलत है तो फिर इन सारे प्रश्नों का जवाब अपने-आप से पूछिये | क्योंकि खुद से बेहतर इन सवालों का जवाब आपको कहीं और नहीं मिलेगा |

वह नेता जो वोट मांगने वक़्त आपसे जात,धर्म और पैसे लेने की बात करता है | वह कोई और नहीं आपके बिच से निकला हुआ ही एक चेहरा है , और उसे पता है की समाज में यही मानसिकता उपज रही है | आज़ादी के इतने सालों बाद भी देश भ्रष्टाचार,भूखमरी,और गरीबी से जूझ रही है तो इसका जिम्मेदार सिर्फ सरकार ही नहीं हम और आप भी हैं | अगर आप इस बात से इंकार करते हैं तो शायद आपने धर्म से हट कर वोटिंग की होगी , शायद आपको उस पार्टी के आने से खूशी नहीं हुई होगी जो किसी एक जात या समुदाय का पक्ष लेता है , या फिर वो नेता आपकी आँखों को चुभता होगा जो किसी जात या धर्म का ब्रांड एम्बेसडर बना बैठा है |

नयी सरकार लाने से ज्यादा जरुरी अब एक नयी विचारधारा को लाने की है | क्योंकि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वह गाँव का सरकारी विद्यालय वैसा ही रहेगा जैसा था |

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