स्वयं भक्त

Posted by Awantika Yadav
April 16, 2017

Self-Published

जबसे हमारा अस्तित्व हुआ हर क्षेत्र में दो तरह तरह के लोग हुए। अच्छे अर्थात देश भक्त एवम्  दूसरे बुरे अर्थात स्वयं भक्त। मेरे विचारो में स्वयं भक्त व्यक्ति सिर्फ अपनी भलाई के लिए देश को किसी भी स्तर पर हानि पहुचा सकता हैं अर्थात वो सिर्फ स्वयं का भला चाहता हैं। मैं इतिहास की ज्ञाता तो नही पर जितना पढ़ा है यही पाया है कि कुछ स्वयं भक्तों ने हमारे विशाल भारत वर्ष को गुलाम बनाया। हमारा देश हजारों वर्षो तक गुलामी की जंजीरो में जकड़ा रहा। स्वयं भक्तो की वजह से ही हमारी संस्कृति  तहस नहस हो गई, सोने की चिड़िया कोयले की राख बन गई। स्वयं भक्तो ने ही देश भक्तो को फाँसी पे चढ़ा दिया, सत्ता पाने के लिये देश का टुकड़ा कर दिया। तब के स्वयं भक्त आज के स्वयं भक्त से कम बुद्धि मान थे इसलिये वो दो ही टुकड़े कर पाये  परन्तु आज के स्वयं भक्त देश का टुकड़ा- टुकड़ा कर देना चाहते है। तब के स्वयं भक्त सत्ता के थोड़े नीचे होते थे, आज के स्वयं भक्त सत्ता आसीन है। वो हमे सीधे तौर पर हानि पंहुचा रहे है और हम ताली बजा रहे है। स्वयं भक्त आज हर  घर में हैं हर गली में है। अर्थात सम्पूर्ण जगत में व्याप्त हैं।

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