चुनावी एजेंडे में मंदिर है, गाय है, बस मरते बच्चे नहीं हैं

Posted by naveen rai in Hindi, Society
April 2, 2017

आप हर 5 साल बाद लोकतंत्र की गंगा में डुबकी लगाते होगें अरे मतलब वोट देने जाते होगें, जाते है ना? अब ज़रा ये सोचिए आपने जिसको वोट दिया वो तो आप का पैर छू कर क्षण भर के लिए आपका बेटा बन गया, लेकिन कभी यह सोचा है कि जिसको आपने चुना उसने आपके बच्चे के भविष्य बनाने के लिए कोई वादा किया या नहीं?

विश्व बैंक के आकड़ों के मुताबिक भारत में लगभग 70% बच्चे रक्ताल्पता यानि की खून की कमी से संबंधित बीमारियों से पीड़ित हैं। हर 10 में से 3 बच्चे अल्पभार (अंडर वेट) से ग्रसित है इनका सबसे बड़ा कारण कुपोषण है। बाल शिक्षा की तरफ ध्यान तो शायद ही सरकारों का जाता है कारणश अधिकांश बच्चे स्कूल जाने के इतर भीख मांगने, मजदूरी करने की ओर रुख कर लेते है।

बाल अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग के कन्वेंशन के अनुच्छेद 24(2) के अनुसार राज्य सरकारों को कुपोषण एंव अन्य रोगों से बचाने और स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्धता का निर्देश दिया गया। लेकिन सरकार का गैरज़िम्मेदाराना रुख स्थिति को भयावह बनाता जा रहा है। महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2015 में कुल 19,223 महिलाओं और बच्चों की तस्करी की गई।

हाल ही में भारत के 5 राज्यों में चुनाव संपन्न हुए लेकिन किसी भी एक रैली में बाल शिक्षा, बाल मजदूरी संबंधी एक भी घोषणा नहीं की गई। सवाल यह है कि लोकतंत्र के इस विशाल पर्व में बच्चों पर अमूमन ध्यान इसलिए नहीं जाता क्योंकि वो वोटर नहीं है। चुनावी आपाधापी में हम अपने ही बच्चों का हाशिए पर रखते जा रहे हैं, जो कल के नवनिर्मित राष्ट्र की बुनियाद बनेगें।

नरसिम्हा राव के शासनकाल में देश ने ऐसे संलेख पर हस्ताक्षर किए जिसमें 18 वर्ष की आयु तक अनिवार्य शिक्षा और बाल श्रम से मुक्ति की बात कही गई थी पर यह अब तक संभव नहीं हो पाया। स्मार्ट सिटी बनाने में कोई हर्ज नहीं है पर पहले राष्ट्र का आधार मजबूत किया जाना चाहिए। प्राथमिक शिक्षा पर जोर देना चाहिए, गांव के स्कूल विद्यालय कम रसोईघर ज्यादा बन गये लगते हैं। राजनीतिक एजेंडे में बच्चों का रखा जाना अति आवश्यक है।

अब सोचिए कि आपको किसे चुनना है जो धर्म को सर पर उठाए है या जो विकास को बल दे रहा है? दरअसल विकास तो कोई नहीं कर रहा, सब विकास से नाराज हैं, क्योंकि आपने बच्चों के विकास के बारे में तो पूछा ही नहीं। अगली बार आए कोई वोट मांगने तो पूछिए कि राम रहीम तो चल बसे, लेकिन विकास कहां है? जवाब मिले पक्का-पक्का तो वोट दीजिए, नहीं तो उनको गुड बॉय कह दीजिए। सबके लिए वही अच्छा है, बाकि जब वो कुछ दें तो पूछिए आपके बच्चे के लिए क्या है? क्योंकि आपकी उमर तो 30-40 साल की ही बची है पर आपके बच्चे को तो 60-70 बसंत और देखने हैं।

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