India Is Becoming Another Pakistan

Posted by Adv Ajay Kumar Yadav
April 19, 2017

Self-Published

आजकल भारत के हालात कुछ ठीक नही लग रहे हैं।कुछ समयों से भारत मे ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो गई हैं जो सोचने पर मजबूर कर देती हैं।राष्ट्रवाद के नाम पर वाक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमले हो रहे हैं।अल्पसंख्यकों(मुस्लिम ,सिख,इसाई)पर दिन ब दिन हमले बढ़ते जा रहे हैं।मुसलमान ख़ास तौर पर निशाने पर हैं।अगर कोई मुसलमान सरकार के विरुद्ध कोई भी बात करता है तो उसे तुरंत देशद्रोही करार दे दिया जा रहा है।
हालात इस स्तर तक नीचे गिर गए है कि अब तो डर सतनेंलगा है कि कही हम भी पाकिस्तान बनने की राह पर तो नही चल रहे हैं।मैं इस लेख में बताने जा रहा हूँ कि आज पाकिस्तान जहां खड़ा है उसको यहां तक पहुंचाने के लिए क्या क्या कारण रहे होंगे तथा भारत कैसे दूसरा पाकिस्तान बनने की राह पर है                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                        FAKE NATIONALISM-                    राष्ट्रवाद के नाम पर पाकिस्तान में भारत के विरुद्ध जहर उगलने,गालियां देने वाले लोगों को काफी पसंद किया जाता है।राष्ट्रवाद के नाम पर पाकिस्तान में लोगों को काफी समय से पीड़ित किया जा रहा है।जो कोई शांति की बात करेगा उसे देशद्रोही या गद्दार घोषित कर दिया जाता है।   खान अब्दुल गफ्फार खान जिन्हें सीमांत गांधी कहा जाता था उनको भी पाकिस्तान में देशद्रोही करार दिया गया क्योंकि उन्होंने हमेशा भारत के साथ शांति सम्बन्ध बनाए रखने की बात की न कि युद्व की।
यही बात आजकल भारत में भी हो रहा है।इसका ताजातरीन उदाहरण कन्हैया कुमार और गुरमेहर कौर है।कन्हैया कुमार ने सरकार की नीतियों का विरोध करना शुरू किया तो सरकार को अच्छा नही लगा अतः सरकार ने कन्हैया कुमार को रोकने के लिए मीडिया द्वारा फ़र्ज़ी खबर चलवाई कि कन्हैया कुमार ने देशविरोधी नारे लगाए तथा यह देश तोड़ने की बात कर रहा है।इस प्रकरण में एक फ़र्ज़ी वीडियो चलाया गया जिसमें कन्हैया कुमार को देशविरोधी नारे लगाते हुए दिखाया गया।बाद में वीडियो की छानबीन करने पर पता चला कि कन्हैया कुमार ने कोई भी देशविरोधी नारे नही लगाए।इस फ़र्ज़ी वीडियो के बाद बहुत बड़ा हंगामा खड़ा किया गया तथा कन्हैया कुमार को कोर्ट में पेशी पर जाने के दौरान कन्हैया को देशद्रोही बताते हुए कोर्ट परिसर में ही “भारत माता की जय”,वंदे मातरम के नारे लगाते हुए कन्हैया कुमार की पिटाई कर दी गई।बाद में कोर्ट ने कन्हैया को जमानत पर रिहा कर दिया तथा अब पुलिस रिपोर्ट में भी यह बात सामने आ गई कि वीडियो फ़र्ज़ी था तथा कन्हैया ने कोई भी देशविरोधी नारे नही लगाए।
अभी हाल ही में गुरमेहर कौर का भी मामला इसी से मिलता जुलता है।गुरमेहर कौर ने रामजस कॉलेज में हुए विवाद में ABVP(जो कि आरएसएस का छात्र संगठन है)के खिलाफ आवाज उठाई।उसने अपने फेसबुक पर एक चित्र पोस्ट किया जिस पर लिखा था
‘I am a student from Delhi University.I am not afraid of ABVP.I am not alone.Every student of in India is with me.#students against ABVP.’
इस फ़ेसबुक पोस्ट के बाद ABVP के लोगो ने गुरमेहर के एक साल पुराने वीडियो को निकालकर उसमे से सुनियोजित तरीके से एक चित्र को,जिसपर गुरमेहर ने लिखा था कि उसके पिता(जो कि कारगिल युद्ध में मारे गए थे)को किसी ने नही बल्कि युद्व ने मारा।
गुरमेहर के कहने का मतलब था कि भारत पाकिस्तान के बीच शांति होनी चाहिए न कि युद्ध।
इस मामले में खूब हो हल्ला मचा।मंत्री से लेकर अभिनेता तथा खिलाड़ियों ने गुरमेहर का विरोध किया।मीडिया ने तो इसे अलग ही रंग दे दिया क्योंकि गुरमेहर ने ABVP के खिलाफ और शांति के पक्ष में पोस्ट किया था।रातोंरात गुरमेहर को देशद्रोही साबित किया जाने लगा तथा उसे बलात्कार की धमकी मिलने लगी।जिससे डरकर गुरमेहर को अपनी इस मुहिम को बीच मे ही छोड़ना पड़ा।
इससे पता चलता है कि इस समय यदि कोई सरकार की नीतियों का विरोध करेगा या कोई शांति की बात करेगा तो वह देशद्रोही या गद्दार करार दिया जाएगा जैसा कि पाकिस्तान में हो रहा है।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                    MEDIA-     ज़िया उल हक के जमाने मे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का विस्तार नही हुआ था ।पाकिस्तान का केवल एक सरकारी चैनल PTV ही कार्य कर रहा था।लेकिन उस समय प्रिंट मीडिया की भूमिका काफी अहम रहती थी लोगों को सही जानकारी पहुचाने तथा लोगों को सजग बनाने में प्रिंट मीडिया का काफी अहम योगदान होता था लेकिन जनरल ज़िया उल हक के आने के बाद जब उसे पता चला कि मीडिया उसकी नीतियों की आलोचना कर रहा है तो उसने मीडिया को दबाना शुरू कर दिया ।सभी पब्लिकेशन सेंटर्स ने अपने आप को जिया उल हक के सामने समर्पण कर दिया तथा जो आलोचना करते उनको मार्शल कोर्ट के द्वारा सजा दी गई।13 मई 1979 को 11 ऐसे जर्नलिस्ट्स को मार्शल कोर्ट के द्वारा सजा सुनाई गई थी।मीडिया पूरी तरीके से जिया उल हक के कब्जे में था,केवल वही खबरें बाहर आती थी जिन्हें ज़िया उल हक बाहर आने देता था।इससे जनता के परसेप्शन को नियंत्रित किया जाता था।
ठीक इसी प्रकार की चीजें इस समय भारत में हो रही है।एक प्रजातांत्रिक देश मे मीडिया को चौथा स्तंभ माना जाता है लेकिन वही मीडिया अपना काम छोड़कर केवल अफवाहों की फैक्ट्री के रूप में कार्य करने लगे तथा  एक खास विचारधारा के सपोर्ट में दिनभर लगे रहना बताता है कि अब मीडिया का क्या हाल है।मीडिया पूरी तरीके से सरकार के कब्जे मेंहो गया है।यहां तक कहा जाने लगा है कि मीडिया सरकार की रखैल के रूप काम कर रही है।
भारतीय पत्रकारिता इतिहास के श्रेष्ठ व्यक्ति गणेश शंकर विद्यार्थी ने कहा था कि मीडिया को सदैव एन्टी इस्टेबलिशमेंट होना चाहिए परंतु आज का मीडिया सरकार के हाथों में चला गया है।लगभग पूरी मीडिया का काम बस सरकार की नीतियों और उसकी विचारधारा को आगे बढ़ाना रह गया है अगर जो कोई भी सरकार की नीतियों का विरोध करेगा या उसकी आलोचना करेगा उस पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है(जैसा कि NDTV के साथ हुआ । NDTV सदैव सरकार की बुरी नीतियों का विरोध करती है तथा आलोचना करती है जो कि एक स्वस्थ मीडिया का उदाहरण है,को एक दिन के लिए सरकार द्वारा प्रतिबंधित किया गया लेकिन चौतरफा विरोध होने के कारण सरकार को प्रतिबंध हटाना पड़ा)।
जिस प्रकार स्व पाकिस्तान में मीडिया ने अपने आप को दबाव के चलते इस्टेबलिशमेंट के चरणों मे समर्पित कर दिया है ठीक उसी प्रकार से इस समय भारत मे भी मीडिया ने अपने आप को इस्टेबलिशमेंट के चरणों मे समर्पित कर दिया है या ये कहा जाए कि भारत मे पाकिस्तान से भी बुरे स्तर पर गिरकर पैसे और पावर के चक्कर मे खुद को गिरा दिया है।अब मीडिया का काम बस हिन्दू मुसलमान में फसाद कराना तथा सरकार के प्रोपगंडा को आगे ले जाना भर रह गया है।इस समय जो मीडिया जितने अच्छे तरीके से हिन्दू मुसलमान के बीच मे फसाद पैदा कर रहा है वह उतना ही बड़ा समझा जा रहा है।मीडिया में आजकल लोगों को देशभक्ति और देशद्रोही का प्रमाण पत्र बांटा जा रहा है जो कोई सरकार की नीतियों के खिलाफ बोल रहा है या पाकिस्तान आए शांति का समर्थक है उसे देशद्रोही करार दिया जा रहा है।तथा जो कोई सरकार की हर नीतियों का समर्थन कर रहा है या जो पाकिस्तान से युद्ध की बात कर रहा है मीडिया के अनुसार वह सच्चा देशभक्त है।
आज पाकिस्तान में टीवी चैनल्स पर हर मुद्दे पर बात करने के लिए सेवनिव्रित्त पूर्व सैनिकों की टीम लगी रहती है जिनका काम इस्टेबलिशमेंट  के एजेंडे को आगे बढ़ाना है तथा लोगों को देहभक्ति और देशद्रोही का प्रमाण पत्र बांटना है।
बिल्कुल यही हालत भारत मे भी होता जा रहा है अब भारत मे भी मीडिया चैनल्स पर सेवनिव्रित्त पूर्व सैनिकों की संख्या बढ़ने लगी है।सेना के नाम पर लोगो की भावनाओं से खेल खेला जा रहा है।पूर्व सैनिकों की आड़ में मीडिया लोगों को देशभक्ति और देशद्रोही का प्रमाण पत्र बांटा जा रहा है।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                         MIXING RELIGION INTO POLITICS  –   पाकिस्तान का सृजन ही धार्मिक आधार पर हुआ था परंतु मोहम्मद अली जिन्ना ने कहा था कि,’भले ही पाकिस्तान का सृजन धार्मिक आधार पर हुआ हो लेकिन पाकिस्तान में रहने वाले हर व्यक्ति को समान अधिकार दिया जाएगा भले ही वह अल्पसंख्यक ही क्यों न हो।’
तथा राजनीति में धर्म के मिश्रण को नकारा।
परन्तु धार्मिक आधार पर राष्ट्र का सृजन होने के कारण पाकिस्तान में सर्वप्रथम अल्पसंख्यकों पर हमले सुरु हो गए।चूंकि पाकिस्तान इस्लाम धर्म ले आधार पर सृजित हुआ था जिसके कारण ‘मुस्लिम’ शब्द का निर्वचन किया गया।1974 में Ordinance -xx के द्वारा सर्वप्रथम अहमदी मुसलमानों को स्वयं को मुस्लिम बताने  पर 3 साल के कारावास की सजा का प्रावधान किया गया ।
जिसके बाद अहमदी मुसलमानो को गैर मुस्लिम अल्पसंख्यक घोषित कर दिया गया।इसके बाद अहमदी मुसलमानो पर अत्याचार होने लगे।
पाकिस्तान में शिया सुन्नी दंगे आम हो गए है।
भारतीय संविधान की उद्देशिका में धर्म निरपेक्ष शब्द लिखा गया है जिसका मतलब है कि राज्य का कोई धर्म नही होगा।संविधान सभी धर्मों को समान अधिकार प्रदान करता है।तथा राजनीति को धर्म से अलग रहना चाहिए।
परंतु वर्तमान समय मे भारत में भी धर्म को राजनीति में मिश्रित किया जा रहा है।भारत के प्रधानमंत्री खुद चुनावी रैली में जाकर कब्रिस्तान,श्मशान,होली ,दीवालीऔर ईद की बाते करके लोगों की भावनाओं को भड़काकर वोट लेने  में सफल हो रहे है।एक पार्टी अपने चुनावी मैनिफेस्टो में मंदिर का मुद्दा लेकर चुनाव लड़ रही है तो दूसरी तरफ अन्य पार्टी मस्जिद के नाम पर चुनाव लड़ रही है।
अब धर्म ने राजनीति में प्रवेश करना सुरु कर दिया है।धर्म के आधार पर राजनीतिक पार्टियां लोगों को लाडवा रही है।
अल्पसंख्यको पर अत्याचार दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है।अभी पिछले दिनों दादरी में अख़लाक़ नामक व्यक्ति को इसलिए मार दिया गया क्योंकि वह मुस्लिम था तथा लोगों को शक था कि उसने अपने फ्रिज में गोमांस को रखा था।पूरी छानबीन के बाद पता चला कि वो गोमांस नही था।मजे की बात ये है कि जिस व्यक्ति ने अखलाक की हत्या की थी उसकी मृत्यु पर उसके शव कोतिरंगे में लपेटा गया।
अल्पसंख्यक समुदाय पर गौरक्षा के नाम पर बहुत भीषण अत्याचार हो रहा है
अब राजस्थान के अलवर स्थान पर पहलू खान की  इसलिए हत्या कर दी गई क्योंकि वह मुस्लिम था और लोगों को शक हुआ कि वह जो गाय ले जा रहा है वह गौकशी के लिए ले जा रहा है।गाय तो एक बहाना था-
गाय तस्कर नही किसान था वो,
गलती इतनी कि मुसलमान था वो।
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए वहां के मंत्री ने कहा कि ये तो क्रिया के विरूद्ध प्रतिक्रिया है।
इतना ही नही अब तो दलितों पर भी अत्याचार शुरू हो गए ठीक उसी तरह से जैसे शुरू में पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय पर अत्याचार हुआ उसके बाद खुद निचली जाति के मुसलमानों पर अत्याचार सुरु होने लगा।भारत भी पाकिस्तान का इस मामले में अनुसरण कर रहा है                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                             JIHAD-   पाकिस्तान को वर्तमान हालात में पहुचाने के लिए जिहादी विचारधारा का काफी योगदान रहा है।जिहाद का मतलब है कि’इस्लाम ले दुश्मनो के खिलाफ लड़ाई या संघर्ष’।
ज़िया उल हक ने इसी जिहाद की परिभाषा का दुरुपयोग करके पाकिस्तान में जिहाद को बढ़ावा दिया।ज़िया उल हक ने पाकिस्तान के युवाओं ,धार्मिक विचारों वाले लोगों तथा बेरोजगारों को जिहाद के द्वारा मुजाहिदीन बनाकर अफगानिस्तान युद्ध मे लड़वाया तथा जब अफगानिस्तान युद्ध खत्म हुआ उसके बाद यही बेरोजगार मुजाहिदीन ने पाकिस्तान पर कब्जा जमाना शुरू कर दिया क्योंकि इनके ऊपर सरकार का कोई नियंत्रण नही था।आज जहा और जिस हालात में पाकिस्तान है इसमे जेहादी विचारधारा का बहुत बड़ा योगदान है।
ठीक यही बातें अब भारत मे हो रही है।भारत मे जिहाद का दूसरा रूप स्वयं सेवक हो गया है।भारत मे अब तमाम तरह के स्वयं सेवी संगठन धर्म एवं संस्कृति की रक्षा के नाम पर रोजाना खुल रहे है।ऐसा लग रहा है कि इन संगठनों पर सरकार का कोई नियंत्रण नही है या इन्हें सरकार की तरफ से सहायता मिल रही है।पाकिस्तान  के जिहादी संगठनों लश्कर ए तैयबा,लश्करे झांगवी तथा अन्य संगठनों की तेज पर   आजकल भारत मे आरएसएस, हिन्दू युवा वाहिनी,हिन्दू महासभा,गौरक्षक, बजरंग दल और अन्य तमाम तरह के तालिबानी विचारधारा वाले स्वयं सेवी संगठन प्रचलन में है इनका काम धर्म एवं संस्कृति की रक्षा के नाम पर दलितों,पिछडो,अल्पसंख्यको एवं गरीबों को प्रताड़ित करना है। गौरक्षा के नाम पर लोगों की हत्या कर दी जा रही है और सरकार के मंत्री इस हत्या को उचित ठहराने के लिए बयान देते है कि ये तो क्रिया के विरुद्ध प्रतिक्रिया है।’विधि का शाशन ‘ खतरे में है क्योंकि ये तमाम हिन्दू जिहादी विचारधारा वाले संगठन कानून को अपने हाथ मे ले लेते है और हद तो तब हो जाती है जब सरकार खुद इमके कृत्य को सही ठहराने के प्रयास करती है                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                              ATTACKS ON UNIVERSITIES-   विश्वविद्यालय ज्ञान और खुले विचारों के आदान प्रदान करने का केंद्र होता है।सरकारों को पता होता है कि अगर किसी विचारधारा को आगे ले जाना है तो विश्वविद्यालयों में अपनी विचारधारा को थोपा जाय तथा दूसरी अन्य किसी विचारधारा पर आक्रमण किया जाय।
पाकिस्तान में जमात ए इस्लामी पार्टी के छात्र संगठन इस्लामी जमीयत के तलबा ने विश्वविद्यालयों में इस्लामी विचारधारा के नाम पर अल्पसंख्यक छात्रों तथा उन अन्य छात्रों को प्रताड़ित करने सुरु कर दिया जो उनकी विचारधारा से सहमत नही होते।आज पाकिस्तान के विश्वविद्यालयों के हाल सबके सामने है।
यही काम इस समय भारत मे भी आरएसएस के छात्र संगठन ABVP द्वारा किया जा रहा है।इनको वर्तमान सरकार का समर्थन प्राप्त है अतः ये चाहे जो भी करे इनको कोई रोकटोक नही है।सर्वप्रथम ABVP से परेशान होकर रोहित वेमुला को आत्महत्या करनी पड़ी।उसके बाद jnu विवाद हुआ जिसमें फ़र्ज़ी वीडियो के आधार पर कन्हैया कुमार को देशद्रोही साबित किया जाने लगा।इसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय में ऋचा सिंह को विश्वविद्यालय से निकाले जाने का प्रयास किया गया।इसके बाद JNU से नजीब को गायब कर दिया गया क्योंकि उसकी ABVP के द्वारा पिटाई हुई थी।नजीब का अब तक पता नही चल सका।इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में विवाद हुआ क्योंकि गुरमेहर कौर ने ABVP के खिलाफ आवाज उठाई और उसे रातोंरात देशद्रोही करार दिया जाने लगा।
ऐसी घटनाएं दिन ब दिन बढ़ती जा रही है और यह आग लगभग प्रत्येक विश्वविद्यालय तक पहुच रही है।अब ABVP के लोगो को विश्वविद्यालयों में मनमानी करने की खुली छुट्टी मिल गई है।अब ये लोग चाहे जो करे उनपर कोई रोकटोक नही है                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          SLOGANS-जिस प्रकार से आए दिन पाकितान में जिहादी ‘अल्लाह हो अकबर’ के नारे लगाकर मासूमो की हत्या कर रहे है ठीक इसी प्रकार से अब भारत मे भी अब यही दक्षिणपंथी स्वयं सेवी संगठन ‘भारत माता की जय’,’वंदे मातरम’, ‘जय श्री राम’ आदि नारे लगकर लोगों को प्रताड़ित कर रहे है(मुंह मे राम ,बगल में छुरी।)।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                            इन सब चीजों से यह स्पष्ट होता है कि भारत अच्छी गति से दूसरा पाकिस्तान बनने की राह पर चल रहा है ।आज जो फसल पाकिस्तान काट रहा है अब उसके बीज की भारत मे भी बुआई हो गई है।अब तो बस यही देखना बच गया है कि क्या यह फसल पककर तैयार हो जाती है या इस फसल को बीच मे ही तबाह कर दिया जाएगा

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