Save Boys Also

Posted by Naresh Yogi
April 10, 2017

Self-Published

कृपया एक बार जरूर पढ़िएगा –
हाल ही में प्रकाशित इस खबर ने सोचने के लिए विवश कर दिया की बेटी बचाने की मुहीम में कही हम बेटो की उपेक्षा तो नहीं कर रहे ? यहाँ बात बेटा-बेटी में भेदभाव की नहीं है , लेकिन जितनी आवश्यकता गर्भ में पल रही बेटियो को बचने की है उतनी ही आवश्यकता इन पल-बढ़ चुके बेटो को बचने की भी है । जिन पर कई परिवारों की उम्मीद टिकी रहती है। जरुरी नहीं नासमझ लोग ही मौत का रास्ता चुनते है , कई बार समझदार व्यक्ति भी उपेक्षा एवम अवसाद से ग्रसित हो ऐसा कदम उठाने पर मजबूर हो जाते है। आखिर प्रेम कोई अपराध तो नहीं है। ये सच्चे प्रेम की ही ताकत है कि महान परम्पराओ वाले इस देश में राधा एवम मीराबाई का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। प्रेम भी करुणा , दया आदि भावो के सामान ही एक भाव है और भावो को रोक पाना तो इंसान क्या देवताओ के लिए भी मुश्किल है। बस युवावर्ग को जरुरत है अपने इन भावो को सकारत्मकता और सच्चाई देने की। वयस्क लड़के एवम लडकिया दोनों ही रिश्तो की अहमियत समझे और धोखाधड़ी से बचे। अभिभावक भी इस विषय में अपने बच्चो की मदद करे।
केवल प्रेम प्रसंग ही नही कई बार कॅरियर या अन्य पारिवारिक कुंठाओ के चलते भी आत्महत्या की घटनाए होती है। राजस्थान के कोटा में पढाई के दबाव के चलते आए दिन विद्यार्थी ऐसी घटनाओ को अंजाम दे देते है। सरकारी स्तर पर भी इसे रोकने हेतु ठोस प्रबंधन किए जाने चाहिए। हाल ही की मन की बात में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा की “अवसाद से पीड़ित लोग शर्म के मारे खुलकर अपना अनुभव नही बताते। हमे यह स्तिथि बदलनी होगी। उन्हें खुलकर बोलने और अपनी तकलीफ बाटने हेतु प्रोत्साहित करना होगा। अवसाद लाइलाज बीमारी नही है। सही मनोवैज्ञानिक माहौल के जरिए पीड़ित को इस समस्या से बाहर निकाला जा सकता है। ”
क्या हम भी इन अवसाद पीड़ितों से मन की बात कर अपने इंसान होने का परिचय दे सकते है? हो सकता है मरने वाले इन सपूतो में कोई नेता, अभिनेता, खिलाडी, वैज्ञानिक, कलाकार, समाजसेवी या समाज सुधारक हो। इस प्रकार एक जान बचाने के साथ ही हम समाज को एक बेहतर व्यक्तित्व देने में भी मदद कर सकते है। बस जरूरत है थोड़ा मानसिक एवम भावनात्मक सहयोग देने की उन असहायो को जो खुद को अकेला समझ बैठे है और कुंठा से पीड़ित है। जितनी जरूरत आज बेटियो का सम्मान करने की है उतनी ही जरूरत बेटो की उपेक्षा ना करने की भी है।आदरणीय दीपिका नारायण भारद्वाज जी पुरुषो के हक़ में आवाज उठाकर उन बेसहारो को न्याय दिला रही है जिन्हें गलत तरीके से Sexual Harrashment के मामलो में फसा दिया जाता है।
अंत में एक ही निवेदन करुगा की कृपया बेटे भी बचाइए.
धन्यवाद ।
नरेश योगी
पूर्व महासचिव
महाराजा महाविद्यालय जयपुर
9610281960

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