Sukma Attack… फिर से वही।

Posted by Ankur Verma
April 26, 2017

Self-Published

सुकमा में आज जो हुआ, उसमें कुछ भी नया नहीं था.. फर्क बस इतना था कि इस बार जरा ज्यादा जोर का झटका लगा है..

गरीबों और वंचितों के नाम पर इन तथाकथित स्वघोषित रहनुमाओं के पक्ष में बेसिरपैर की दलीलें लेकर खड़े रहने वाले तमाम बुद्धिजीवियों को अब चुल्लू भर पानी में कूद जाना चाहिए, क्योंकि जिस तरह ये सरकारों को गाली देकर इन उग्रवादियों(नक्सलियों) को विशेष प्रकार का नैतिक समर्थन व सहानुभूति प्रदान करते हैं, वो उनको वैचारिक रूप से पनपने और मजबूत होने के लिए आधार उपलब्ध कराता है।

विकास की कमी, गरीबी, अशिक्षा, कुपोषण जैसी समस्याएँ निस्संदेह इन क्षेत्रों में बरकरार हैं, लेकिन इसका एक बड़ा कारण खुद नक्सलवाद के पोषक ये हैवान हैं जो चाहते ही नहीं कि गरीब आदिवासियों का विकास हो और वे शिक्षित होकर आगे बढ़ें। इसीलिये कभी स्कूल नष्ट कर दिए जाते हैं, तो कभी पुल तोड़ दिए जाते हैं तो कभी सरकार विरोधी दुष्प्रचार किये जाते हैं।

गरीबों के मसीहा बनने वाले ये लोग आज तक गरीबों के लिए शायद एक स्कूल भी न खोल पाये हों, लेकिन अत्याधुनिक हथियार और लैंडमाइंस के लिए धन की कमी कभी इनके पास नहीं होगी।

लाल गलियारा जिस तरह से फैलता चला जा रहा है, उससे यह बात तो कतई नहीं कही जा सकती कि ये सब गरीबों के लिए, उनके हक़ के लिए हो रहा है।

असल में यह सब परिणाम है कुछ स्वार्थी लोगों के स्वार्थ और लालच का, जो चाहते ही नहीं कि झारखण्ड,छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल आदि इलाकों के आदिवासी और गरीबों का वास्तविक कल्याण हो सके, क्योंकि जिस दिन ये लोग शिक्षित और जागरूक हो गए उसी दिन ये खोखला आंदोलन जड़ से खत्म हो जाएगा।

इन हालातों में आवश्यकता यही है कि ऐसे मानव शत्रुओं के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जाये, साथ ही प्रभावी अभियान चलाकर विकास कार्यों को मिशन मोड में पूरा करने का प्रयास किया जाए।

जो 25 जवान आज शहीद हुए वो भी किसी सामान्य या गरीब परिवार से ही थे..गरीबी से लड़ने के नाम पर निर्दोषों को पीठ पर वार करके मारना कायरता है, वीरता नहीं। देश को अंदर-अंदर से खाने वाले इन दीमकों का सम्पूर्ण उन्मूलन अब अनिवार्य है।

सुकमा के शहीद

शहीदों को नमन…..

Ankur

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