जय जवान नंगा किसान

Posted by Mukund Verma in Hindi, Society
April 11, 2017
ये हमारे किसान हैं, भूखे-नंगे तो काफी दिनों से हैं, बस आज इन्होने अपनी धोती भी उतार दी। क्या करते, दिल्ली-बम्बई के लोगों को इनकी बात शायद सुनाई नहीं दे रही थी इतने दिनों से, तो सोचा होगा कहीं अपनी बची हुई इज्जत ही उतार दें तो शायद सरकार सुन ले।

ये उसी दिल्ली में हो रहा है जहां प्रधानमंत्री का प्लेन टेक ऑफ़ और लैंड करता है, उसी दिल्ली में जहां के मुख्यमंत्री 12000 रूपए पर प्लेट की दावत जनता के पैसों से उड़ा लेते हैं। जहां क्रांतिकारी कन्हैया कुमार भी रहते हैं और जहां हर संसद और विधायक को रहने को मुफ्त क्वार्टर और खाने को सरकारी कैंटीन का खाना मिलता है।

इन किसानों के आटे से बने नूडल्स को बेचकर बाबा रामदेव 1000 करोड़ के मालिक बन गए। इनकी चीनी, चावल बेच कर D-Mart ने 50,000 करोड़ का एम्पायर खड़ा कर लिया, लेकिन इन जाहिलों को कुछ नही मिला। किसानों को मेरे जाहिल कहने पर नाराज़ हो रहे हैं, होइए, थोड़ा नाराज़ इनकी हालत देख कर भी हो लेते। जाहिल ही तो हैं, जो ऐसे विरोध करते हैं। कुछ बस जला देते, कुछ हॉस्पिटल्स में आग लगा देते, कुछ नही होता तो कम से कम बन्दूक ही उठा लेते, फिर अपने सगे-सम्बन्धियों की लाशों की खोपड़ी की माला गले में लटकाकर ऐसे घूमना तो नही पड़ता।

कर्ज-माफ़ी इनका हक है, कोई भीख नहीं। विजय माल्या का क़र्ज़ अगर माफ़ हो सकता है तो इनका क्यूं नहीं। डूबती कम्पनीज़ को अगर स्पेशल पैकेज दे कर बेल आउट कराया जा सकता है तो फिर इन्हें क्यूं नहीं। काफी लिखना चाहता हूं मै, किसी को सामने रख कर सवाल भी पूछना चाहता हूं मै, लेकिन कोई हाफ गर्लफ्रेंड के ट्रेलर में लगा है तो कोई IPL के छक्कों में।

दिन भर के काम के बाद सोने ही आया था जब इस तस्वीर पर नज़र पड़ी, मन विचलित हो गया, नींद मानो जंतर-मंतर पर 28 दिनों से बैठे किसानों के पास चली गई। आपका भी मन विचलित होता होगा मुझे यकीन है, आप भी चुप मत रहिये। लिखिए, बात कीजिए, कुछ हो न हो, कम से कम किसानों को एक आवाज़ तो मिलेगी। ऐसे भी उस नंगे किसान के पास अभी है ही क्या, शायद हमारी बात ही कभी कोई समाधान ले आए।

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