आज का समाज लोकप्रियता का…

Posted by Neha Kamlesh
May 12, 2017

Self-Published

“लोग वही करते है जिसे उस समय का समाज पुरष्कृत करता है।”~ अमिष त्रिपाठी

समाज में हमेशा से सब तरह की चीज़ें रही है, बस फ़र्क़ इस बात का रहा है कि किसी एक वक़्त में एक चीज़ अपने चरम पर रही है। चाहे वह भक्तिकाल, रीतिकल, देशप्रेम, साहित्यप्रेम या यूद्धकाल हो। सवाल यह है कि ऐसा क्यूँ होता है? और जवाब है – समाज जिस भावना को अधिकतम पुरष्कृत करता है वही अपने चरम पर होता है। तो अगली बार जब भी आप किसी से बात करे, तो अवश्य यह देखे कि आप प्रसन्नता के साथ किस विचार को सराह रहे है। वही भाव भविष्य में अपनी राह तराश रहा है। इसलिए सतर्कता आवश्यक है।
अति स्पष्ट है कि आज का समय लोकप्रियता का है और सोशल मीडिया ने इसे चरम में पहुँचा दिया है। हर कोई लोकप्रिय होना चाह रहा और वो भी बिना प्रतिभा के, यहाँ तक कि सिखने के लिए भी तैयार नहीं।आप इसे कुछ इस तरह से समझ सकते है कि अचानक आपको मंदिर जाने का ख़याल आता है आप मंदिर भी पहुँच जाते है वहाँ पहुँच कर आपको एक फ़ोटो खिंचने का मन करता है और आप मंदिर के बाहर से एक फ़ोटो खींचते है। फिर आप को लगता है इसे सोशल मीडिया में अपलोड कर दें। आप ऐसा करते है फिर मंदिर के भीतर जाते है, दर्शन करते है और फिर कुछ फ़ोटो। इस क्रम में फ़ोटो खिंचने का भाव दर्शन करने के भाव से अधिक प्रभावी हो जाता है। यही इस समय हो रहा है। यह सही है या ग़लत, यह सोचने का वक़्त है। पर एक बात सत्य है कि समाज चाहे तो इसे बदल सकता है। और इसकी शुरुआत होती है एक दृढ़ निश्चय संकल्प से। और एक बात हर बदलाव की एक क़ीमत होती है।

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