नंबरों की कीमत ज़िंदगी से ज़्यादा बड़ी क्यूं होती जा रही है?

Posted by Ramkumar Vidyarthi in Education, Hindi
May 13, 2017

माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश की बोर्ड परीक्षा के परिणाम अभी आये ही हैं कि कई छात्रों ने आत्महत्या कर ली। इन घटनाओं का अंदेशा तो पहले से रहा ही है। अख़बारों में इस समस्या पर कई कॉलम महीने भर से लिखे गए। अभी कुछ दिन पहले ही होसंगाबाद के मुबीन भाई जैसे साथियों ने इस मसले पर एक लघु फिल्म यू टूब पर जारी की  “the forgotten path” । सबका एक ही मकसद कि हमारे छात्र और युवा आत्महत्या की नकारात्मकता से बाहर निकल सकें। लेकिन पिछले कुछ सालों में नंबरों की कीमत ज़िंदगी से ज़्यादा बड़ी होती जा रही है।

जो युवा इन भटके हुए रास्तों पर चले जा रहे हैं, क्या इन्हें नहीं मालूम कि इस रास्ते पर एक बार चल पड़ने वाला फिर कभी लौट कर नहीं आता? मैं इनसे कहना चाहता हूं कि उनके सामने अपनी पढ़ाई में कमज़ोरी से बाहर आने के कई रास्ते थे तो आत्महत्या का रास्ता चुनकर उन्होंने खुद को ही नहीं हम सब को भी कमज़ोर किया है। क्या वे ठहरते तो कुछ और बेहतर कोशिश नहीं कर सकते थे? आखिर बड़ा परसेंटेज, बड़ी जॉब- मंजिल यही तो नहीं है। इसके आलावा भी कई छोटी-छोटी उपलब्धियों से इंसानी जीवन बनता और चलता है। एक बार इनके बारे में सोचकर देखें। मेरे दोस्तों आत्महत्या जैसे रास्ते पर जाने के बारे में सोचते वक्त तुम नए सिरे से की जाने वाली कोशिशों के बारे में क्यों नहीं सोचते।

छात्रों के बढ़ते आत्महत्या के मामले पर अपनी मध्यप्रदेश सरकार से क्या कहें? हाल ही राज्य विधानसभा में जारी रिपोर्ट में इस मामले में गहरी चिंता जताई गई, इसके बावजूद परीक्षा परिणाम आते ही 9 छात्रों ने आत्महत्या कर ली। नमन जैसे युवाओं को क्या कहें जिन्होंने मैरिट जैसे नंबर न आने की वजह से जीवन समाप्त कर लिया। दरअसल इस नंबर गेम से छात्रों को बाहर लाने और ज़िंदगी की सही राह दिखाने के लिए सभी को एक जतन और करने की ज़रूरत है। स्कूल में सभी बच्चों को इस मसले पर गहरे परामर्श की दरकार है।

मध्यप्रदेश सरकार ने ‘रुक जाना नहीं’ नाम से एक योजना शुरू की है, जिसमे राज्य ओपन स्कूल के साथ पूरक परीक्षा देने की सुविधा है। यहां राज्य ओपन स्कूल की कमजोर वैल्यू, साल भर बाद मार्कशीट देने, अध्ययन केन्द्रों पर कभी क्लास न लगने और उसकी पुस्तकें छात्रों को न मिलने जैसी लापरवाहियां आम हैं। इस लापरवाह व्यवस्था को सुधारे बिना सकारात्मक परिणाम की अपेक्षा करना मुश्किल होगा। हमें प्राइवेट परीक्षार्थियों को विशेष प्रोत्साहन देने की भी ज़रूरत है।

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