आदिवासी से नक्सली तक का सफर

Posted by Sunit Mishra
May 8, 2017

Self-Published

तथाकथित माओ की विचारधारा से प्रभावित ये असंवैधानिक विचार पहली बार पश्चिम बंगाल के एक छोटे से गाँव नक्सलबाड़ी से अाया है। यह मुलत: एक वामपंथी विचारधारा है जो राजनितिक तौर पर भी प्रयासरत है। इसकी दो मुख्य घटक दल communist party of india (Marxist) अौर communist party of india ( Marxist- Leninist) है।

जमीन के झगड़े को लेकर वहाँ के कुछ दबे – कुचले किसानों ने वहाँ के जमींदार पर हमला कर दिया ,अौर फिर वहाँ के कुछ अौर किसानों ने जमींदारों पर हमला करना शुरु कर दिया ।अौर फिर यह एक मुहिम की तरह उपजने लगा अौर कुछ लोग इसका राजनैतिक तौर पर इस्तेमाल करने लगे । बंगाल से शुरु होकर फिर भारत के तमाम पिछड़े इलाकों मेें इसका प्रचार – प्रसार शुरू हुआ। ये लोग गरीबी से तंग आकर या लोगों के बहकावे मेें आकर बड़े तादाद मेें नक्सली बनने लगे ।

भारत जैसे विशालकाय विकासशील देश मेें गरीबी होना लाजमी है पर इसका यह मतलब कतई नहीं है कि हम समाज की मुख्यधारा को छोड़कर हथियार उठा लें। आये दिन रोज नक्सली वारदातों से दहलते हुए भारत को शायद इसको जड़ से खत्म करने पर विचार अवश्य करना चाहिए। क्योंकि विचार अगर देश अौर समाज पर बोझ बन जाये तो ऐसे विचारों को जड़ से उखाड़ कर फेंक देना ही उचित है ।

इस विचारधारा को जड़ से खत्म करने के लिए इसे राजनीति से, विश्वविद्यालयों से तथा मिडिया से तनिक भी देर किये बिना बेझिझक खत्म करने का प्रयास करना चाहिए। हो सकता है इन कदमों से देश मेें कुछ अस्थिरता आ जाये अौर हो सकता है कि सरकार को भी इसका कुछ नुकसान उठाना पड़े , पर समाज अौर सरकार के ये ध्यान रखना चाहिए कि जब जख्म बड़ा हो जाये तो उसके नासुर बनने से पहले ही उसे अपने शरीर से काट कर अलग कर देना चाहिए भले ही वो हमारे शरीर का अभिन्न अंग ही क्यों ना हो ।

ये नक्सली आजतक ग्रामिणों को,आदिवासीयों को शिक्षा से दूर रखने मेें सफल रहें है अौर इसी कोशिश मेें लगे हुए है । ये इन लोगों को डरा कर या बहला कर जबरन अपने समुह मेें भर्ती कर रहें है ।

जहाँ समाज अपने पिछड़ेपन को छोड़कर मुख्य धारा से जुड़ रहा है वही ये आदिवासी मुख्यधारा से दूर जाते जा रहे है । सरकार के द्वारा उठाए जा रहे बहुतायत कदम छिटपुट ही साबित हो रहा है , सरकार को अगर आदिवासीयों का विकास करना है तो सर्वप्रथम इन विचारों को जड़ से समाप्त करना आवश्यक है ।

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