आधी बोतल

Posted by Sunil Jain Rahi
May 7, 2017

Self-Published

आधी बोतल

शहर में पांच दिन से चला आ रहा समारोह आज दो हत्‍याओं, सौ से ज्‍यादा घायल और पी ए सी की 35 बटालियन की उपस्थिति में शांतिपूर्वक समाप्‍त हो गया। अभी-अभी जारी स्‍वच्‍छ भारत सूची के तहत मेरे शहर को कोई स्‍थान नहीं मिला। रेडियो, टी वी और अन्‍य चैनलों ने मेरे शहर का उल्‍लेख नहीं किया।  वह किस नम्‍बर पर आया है। गन्‍दगी तो इतनी है, नम्‍बर तो आना नहीं था, लेकिन कम से कम यह तो बता दिया जाता है कि हम सर्वश्रेष्‍ठ सौ गंदगीपूर्ण शहरों की सूची में आते हैं या नहीं या फिर 100 सर्वश्रेष्‍ठ साफ-सुथरे शहरों की श्रेणी में भी आते हैं कि नहीं। लेकिन बड़े ही बेदर्द हैं चैनल वाले। हमारा जिक्र किसी ने नहीं किया।
लेकिन यह हमारे लिए गर्व की बात है कि एक बोतल ने हमारे शहर को पांच दिनों तक सुर्खियों में बनाये रखा। अरे हम गंदे ही सही तो क्‍या हमारा वजूद नहीं है। हम गंदे हैं तो क्‍या हम दारू नहीं पी सकते। हम दारू पियें या ना पियें लेकिन हमारा सर्वश्रेष्‍ठ सौ में तो नाम होना चाहिए। इस बात का गम था कि हमारा नाम न तो गंदे लोगों में आया और न ही साफ सुथरे लोगों में। बची बीच की स्थिति तो वह बहुत भयानक होती है।
ये पांच दिन का समारोह एक बोतल के उपलक्ष्‍य में मनाया गया था। चौपाल पर कोई पियक्‍कड़ आधी बोतल पीकर छोड़ गया। बाद में उसके दो दावेदार पैदा हो गए। वे अपनी दावेदारी निभाते-निभाते कुछ दूर चले गए। इतने में बोतल खाली हो गई। बोतल की दारू कहां गई। कैसे गई। विवाद का विषय बना फिर समारोह का। हमारे यहां दंगें को समारोह कहा जाता है। दंगा तो वे लोग कहते हैं जहां आये दिन दंगे होते हैं। बोतल पर चूहे के दांतों के निशान पाए गए। अब समस्‍या पैदा हो गई कि कल तक जो चूहे बिहार में दारू पी रहे थे, वे हमारे यहां भी पीने आ गए। हमारे यहां तो दारू बंदी नहीं, लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं कि कोई भी पीने के लिए यहां चला आए। खैर पीना बुरा नहीं है, आप आकर हमसे कहो, हम बड़े हैं, हम इंतजाम करेंगे। लेकिन ये क्‍या चौराहे पर बोतल आधी खाली पड़ी है और आप आए चुपचाप पिए और खिसक लिए। आपके पीने से एतराज नहीं है, लेकिन पीने के तरीके पर एतराज अवश्‍य है। हो सकता है, हमारे यहां के चूहे पी गए हों।  बिहार के चूहे का नाम यूं ही बदनाम किया जा रहा हो। जो बदनाम है उसकी बदनामी और चार चांद लगाने से क्‍या फर्क पड़ जाएगा।
खैर दारू किसने पी, लेकिन समारोह में एक महिला की जान चली गई थी, उस महिला की लाश चौराहे पर पड़ी है। समारोह समाप्‍त हो चुका था। पुलिस आ चुकी थी। दोनों तरफ के लोग समारोह की उपलब्धियों को समेटते हुए घर की ओर ले जा रहे थे। कुछ के हाथों में अभी भी समारोह का लाल रंग नजर आ रहा था। खैर पुलिस के आने के बाद केवल उखड़े हुए तम्‍बू नजर आते हैं, वैसे ही उस महिला की लाश चौराहे पर नजर आ रही थी। दोनों तरफ के शांति दल समारोह की सफलता पर अपने-अपने बयान देने के लिए इकटठे हो गए। उनका एक मत से मानना था, समारोह सकुशल निपट गया है, लेकिन अब इस महिला की लाश के परिजनों को कितना मुआवजा दिया जाए।
मुआवजे की बात आते ही दोनों पक्ष फिर से समारोह की मुद्रा में आ गए, लेकिन पुलिस की उपस्थिति ने उन्‍हें शांत कर दिया। महिला का धर्म क्‍या है, मजहब कौन सा है, पंथ कौनसा है, वोट डालकर आई है, किसी पार्टी को वोट डाला है, किसके समर्थन में यह मारी गई है, सब बातों पर विचार होने लगा।
समारोह में दोनों पक्षों ने सदभाव दिखाते हुए कहा-अगर यह महिला मुस्लिम है, हिन्‍दू है, ईसाई है, सिख है, खैर ये दीगर बात है कि यह महिला एस सी-एस टी की भी हो सकती है। मुआवजा उसकी जात के अनुसार तय किया जाएगा।
लाश मोचुर्री (शवगृह) में रख दी गई। जब लाश का धर्म मालूम हो जाएगा, उसके बाद मुआवजा तय किया जाएगा। बाद में उसके धर्म के अनुसार उसका अंतिम संस्‍कार कर दिया जाए।
बोतल की दारू किसने पी, इस पर एक जांच समिति का गठन किया जा चुका है।
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