कनॉट प्लेस वाला प्रेम…

Posted by Shubham
May 12, 2017

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सोनू आई मिस यू!

दिल्ली की कनॉट प्लेस वाली गोल सड़क, धूप में नहाती सफेद इमारत, बड़ी बड़ी महंगी गाड़ियों का हुजूम !! राजीव चौक मेट्रो से उतर कर अभी बाहर निकला ही था कि 8 साल की सोनू रोते हुए एक हाथ अपने सर पर रखे हुए कह रही थी, भईया रोटी खिला दो। मैंने जेब से ‘मात्र 10’रूपए निकालें ….क्यूंकि मुझे पता था कम से कम 10 रूपए तो चाहिए ही ……!! लेकिन ये क्या सोनू……..ऐसी स्थिति में भी खुद्दारी की चरम सीमा…..सोनू पैसे लेने से मना कर देती है…..कहती है पैसे नहीं चाहिए….आप बस कुछ खिला दो….कल से नहीं खाया कुछ…….!! मेरा ध्यान उसके सर पर गया……मैंने उसका हाथ हटाकर जब देखा तो उसके सर से खून बह रहा था……!! सोनू …ये कैसे हुआ…..?? कुछ नहीं भईया चलता रहता है इतना……..अरे बताओ तो कैसे हुआ……….? भईया ट्रैफिक पर खड़ी थी पास में….एक कार वाले बाबू जी आए थे ……मूझे भूख लगी तो….म,…मै…ने…..उनके सीसे पर हाथ रख कर सीसा नीचे उतारने को कहा……दो बार मना कर दिया उन्होंने……फिर..? तो मान जाना चाहिए था न… सोनू चुप हो गई…..!! मैं भी भूखे पेट से क्या क्या तर्क वितर्क किए जा रहा था…..फिर क्या हुआ…? भईया बाद में उन्होंने सीसा खोला तो मैं समझी कुछ देंगे क्यूंकि कार में बच्चे कुछ खा रहे थे………लेकिन उन्होंने बाहर निकल कर धक्का दे दिया और पीछे एक रिक्शे कि हैंडल से सर पर चोट लग गयी……..!!! वाह रे कार वाले बाबू….!!! फिर मैं किनारे खड़ी हो गई और तभी बगल वाले कूड़ेदान में बाबू जी ने एक पैकेट फेंक दिया………(बाबू जी ने कूड़ेदान में ही फेंका मतलब..बाबू जी सच में ‘समझदार’ हैं) …..मैनें तुरंत कूड़ेदान में देखा तो दो पैकेट में थोड़ा थोड़ा कुछ बच गया था….लेकिन कूड़े में से थोड़े न कोई खाता है भईया…..!!!! मैंने कहा खैर छोड़……तू चल तुझे मैं खिलाता हूं कुछ…….. मैंने एक पेटीज खरीदी…….उसे दे दिया…….सोनू कहती है….एक और छोटा वाला दिला दो…..फिर शायद उसे लगा कि मैं भी उसे ये न समझने लगूं कि ये मांगने वाले सर पर ही चढ़ जाते हैं……सोनू ने फिर मना कर दिया…..अच्छा रहने दो…..इसी में हो जाएगा…..!! इसी में हो जाएगा …मतलब…?? अरे मेरी मां है छोटा सा बाबू है……इतना कहते उसने आधे से भी कम खाया होगा और बाकी पेटीज जो उस बच्ची के दोनों हाथों में भी नहीं समा रहे थे…उसने जबरदस्ती उसे अपने हाथों में बांध लिया…….खैर मैंने फिर एक पेटीज खरीदी …..लेकिन अब सोनू ने मना ही कर दिया…..कहती है रहने दो न…….रखूंगी किसमें….? उसे यही चिंता थी…..मैंने बैग से एक पेपर निकाला और दे दिया….उस पेपर में बड़े अच्छे एडिटोरियल थे…..पर अब वो एडिटोरियल किसी काम का नहीं लग रहा था सोनू के आगे………….!! खैर सोनू को भेज कर वहां से चल दिया ये वादा करके कि अगले दिन फिर मिलेगी….!!! जिंदगी में दूसरी बार ‘इश्क’ हुआ था मुझे ….बंपर क्रश उस छोटी सी जान पर….!! पूरी मेट्रो उसी की यादों में डूबा रहा …!! मन करता था उसे लाऊँ अपने पास रख लूँ……लेकिन अपनी भी मजबूरियाँ थीं !!
अगले दिन समय से एक घंटे पहले घर से निकला….कि आज ‘उससे’ फिर मिलूंगा……..राजीव चौक पहुंचकर उपर गोल गोल घूमता रहा…सोनू नहीं दिखी…..बाद में पता चला कि यहां मांगने वालों का भी एरिया है…….ऐसे कोई अलाऊड नहीं है….!! लेकिन सोनू मांगने वाली नहीं थी….खबरदार उसे किसी ने मांगने वाली कहा…..उसका हक था मुझपर …कैसे और क्यूं था पता नहीं…था तो था !! खैर मन छोटा करके चल दिया…….ओए सोनू…! देख जहां भी रहे खुश रहे……मां को मेरा हाय कहियो….छोटे वाले बाबू को और तुझे ..उड़ने वाली चुम्मीयाँ दे रहा हूं…!!
और कार वाले बाबू जी……..गॉड ब्लेस यू !! छोटी सी सोनू तुझसे बड़ी अमीर निकली…खुद्दारी में……जाओ बाबू….मैं तो लूट गया हूँ उस बच्ची पर…!!
मेरी बहुत शुभकामनाएँ सोनू…. जीती रह….तेरी जिंदादिली पर सलाम ठोकता है अपुन !!

 

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