कवि सम्मेलन से ज्यादा मज़ा क्योंकि ये है अपने नेता जी की सभा 

Posted by Mohsin Khan
May 6, 2017

Self-Published

एक समय था जब हम ये बात सुनते थे की “जहां ना पहुंचे रवि, वहां पहुंचे कवि” लेकिन बदलते वक्त के साथ मुशायरे और कवि सम्मेलनों का दौर भी चला गया। उसकी जगह whatsapp के गप्पियों ने ले ली, जिनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य एक ही संदेश को कम से कम 100 इनबॉक्स में ढेलना है। ऐसा ना करने पर उनको अपच की समस्या हो सकती और कई मामलो में ऐसा भी देखने को मिला है के मोबाइल की बैटरी कम होने के साथ उनका बीपी भी हाई होना शुरू हो गया। भगवान बचाए ऐसे लोगो से और उनकी बुद्धि को भी थोड़ा सा विकसित करे जिससे बाकी लोगो की बुद्धि को भी थोड़ा आराम मिले।

अब चलिये आते हे मुख्य मुद्दे पर, अब जैसा कि आप सभी लोग जानते है कि whatsapp वाले शेरों में वो मज़ा नहीं है इसलिए कुछ लोग उस मज़े को लेने के लिए अपने घरों से बाहर निकल जाते है। इस बात को आजकल नेताओं की मार्केटिंग करने वाली कंपनियां भली भांति समझती हैं, इसलिए उन्होने मनोरंजन की पूरी थाली को एक नेता की सभा में परोसने की व्यवस्था कर ली होती है।

अरे भूल जाइए उन दिनों को जब हम देश के विकास की बात करते थे, धंधे-रोजगार की बात करते थे और शिक्षा की बात करते थे। अब आप ही बताएं आज की दुनिया में इन फालतू विषयों पर बात करने के लिए किसी के पास समय है क्या? अगर स्वच्छ भारत में मैला उठाने वाले कुछ लोग मर जाएं तो मरते रहें ,लेकिन जनता को क्या? क्योंकि जब बड़े-बड़े सेलेब्रिटी अपने हाथ में झाड़ू लेकर इतने कातिलाना अंदाज़ में फोटो खींचाते हैं तो फिर भाई इस बात की क्या टेंशन लेना कि असल में स्वच्छ भारत कौन बना रहा है।

देश के बेरोजगार युवाओं को अगर नौकरी नहीं दे सकते तो क्या हुआ कम से कम शाम को 2-4 घंटे का मनोरंजन तो दे ही सकते हैं, जहां पर धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिया बिना कोई वेतन लिए इतने सारे कर्मचारियों की भर्ती भी हो जाती है।

अब तो बातें होती है बड़ी-बड़ी…कल्पना के घोड़े पर सवार होकर नेताजी आते है और अपने सुनने वालों को ना जाने कहां-कहां की सैर करा ले आते हैं। उस 2-3 घंटे के शो का जनता भी भरपूर आनंद लेती है, हालांकि वो जानती है कि ये सब सच नहीं लेकिन भाई सपने में बुलेट ट्रेन की सैर असल में खच्चर पेसेंजर ट्रेन से कई गुना बेहतर होती है।

हां तो, अगर आपको भी कवि सम्मेलन पसंद है तो निराश होने की बिलकुल भी आवशयकता नहीं है, इस देश में 365 दिन चुनाव का माहौल रहता है इसलिए जल्दी है ऐसा कोई मनोरंजक कार्यक्रम आपके घर के आस-पास भी होने वाला है बस आप तैयार रहिए।

इस देश की यही सच्चाई है और इस बात को जितनी जल्दी समझ लिया जाए उतना बेहतर है। क्योंकि सभी को यह पता है कि विकास का तोता उड़कर कहीं दूर निकल लिया है और अब वो हाथ आने वाला है नहीं। इसलिए सपनों की चिड़िया के पंखो पर बैठकर अगर 2-4 गप्प हमने भी मार ली तो कौन सा गुनाह कर दिया बड़े भाई….

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