क्या आतंकवाद का भी कोई धर्म होता है.ये किस धर्म के लोग हैं जो सबको मार रहे.

Posted by sabiburrahman
May 5, 2017

Self-Published

क्या आतंकवाद का भी कोई धर्म होता है.ये किस धर्म के लोग हैं जो सबको मार रहे.

मेरे दिमाग़ में यह सवाल बहुत सालों उमड़ घुमड़ कर रहा था अब जाकर इसका जवाब मिला है .तो आइये जानते है आतंकवाद का कौन सा धर्म है ।

मैंने 2008 से बेतिया ज़िले से प्रकाशित हिंदी साप्ताहिक अख़बार ‘जम्हुरियत की आवाज़ ‘के लिए बतौर ट्रेनि रिपोर्टर काम शुरू किया और मेरी पहली ख़बर छपी’9 करोड़ नुक़सान के बावजूद 25 हज़ार करोड़ का मुनाफ़ा’ लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे ।अल्पसंख्यको का विचार लिखा था मैंने रेल बजट पर .दिन बीतता गया एक बार इस अख़बार के प्रथम पेज पर किसी का ख़बर छपा जिसका शीर्षक था।”आईएसआई का हिंदू एजेंट गिरफ़्तार” अख़बार पहुँचा सभी दुकानों पे पर अख़बार बेचने वालों में एक मुस्लिम पान का दुकानदार भी था .वह बोलने लगा इस अख़बार का यह हेड लाइन देख कर हिंदू भाई मेरे दुकान पर आना छोड़ देंगे.उसने अपने दुकान पर अख़बार बेचने से मना कर दिया.मैं भी सोचा भले न्यूज़ सही है पर हिंदू भाइयों के दिल को सच में ठेस पहुँचेगा इस हेड लाइन को देख कर।
दिन बीतते देर नहीं लगता मैं 2009 में 28 फ़रवरी को रोज़ी रोटी की तलाश में साउदी अरब चला गया।केरला मैनज्मेंट कम्पनी था उस कम्पनी में काम करने वाले सभी भारतीय थे .कोई पाकिस्तानी उस कम्पनी में नहीं था।दो साल पूरा हुआ मैं भारत लौट आया और सनमार्ग हिंदी दैनिक में काम करने लगा.इस अख़बार में ढाई साल काम किया.आपलोगो को तो पता ही होगा मज़दूर को काम करने के बाद शाम में 400 रुपया मिल जाता है पर अख़बार में काम करने वालों स्थानीय रिपोर्टर को कुछ भी नहीं मिलता।बाबूजी स्कूल में सरकारी टीचर हैं उन्ही के रहमो करम पर फ़्री में पत्रकारीता से जूड़ा रहा।

फिर मन किया साउदी अरब जाने का पुराने कम्पनी में नवम्बर 2013 में चला गया.यम्बु में काम ख़त्म होने के बाद जिज़ान भेज दिया कम्पनी .अरे वही जिज़ान जिसके लिये सउदी अरब और यमन लड़ रहे।हमारी कम्पनी के लोगों पर कोई आँच नहीं आया क्यूँकि हम लोग सेफ़ जोन में थे।फिर भी डर रहता था पता नहीं कब यमन वाले मिसाइल छोड़ दे हम पर।
✡पाकिस्तानियों की नज़र में भारत के मुसलमान सच्चे मुस्लिम नहीं.

मुझे और बहुत से लोगों को कम्पनी ने जिज़ान से ज़ुबैल भेज दिया और कम्पनी के पास ज़्यादा रूम नहीं था इसलिये कम्पनी ने हम 9 बिहारियो को एक ही रूम में रख दिया जिसमें सात हिंदू भाई और हम दो मुस्लिम .एक बेड ख़ाली था तो कम्पनी ने एक पाकिस्तानी को रूम में लाकर रख दिया।कुछ दिन बाद पता चला साठ हज़ार हमारे कम्पनी के पास मैन पवार है जिसमें ये अकेला पाकिस्तानी है ।एक दिन न्यूज़ देखा साउदी अरब में जुमा के नमाज़ में मस्जिदों में धमाके हो रहे ।शायद रियाद ,दम्माम शहर के मस्जिद में धमाका हो चुका था अब बारी होगा ज़ुबैल का।धमाके के डर से मैं सिटी मस्जिद में ज़ूमा के दिन नमाज़ पढ़ना छोड़ दिया .कैम्प में मस्जिद में ही जुमा का नमाज़ पढ़ लेता था।
एक दिन जुमा के रोज़ जुमा पढ़ने से पहले ओ पाकिस्तानी अपने मोबाइल में किसी मोलवी का तक़रीर सुन रहा था जिसमें मोलवी साहब बोल रहे थे हिंद पाक बँटवारे के वक़्त हिंदुस्तानियों ने लाखों मुसलमानो को काटकर सतलुज नदी में बहा दिया.सतलुज नदी में पानी नहीं ख़ून बह रहा था।

मैं उस पाकिस्तानी से बोला भाई हमने तो हिंदुस्तान के इतिहास में ऐसा कही भी नहीं पढ़ा.वह लड़का बोला यह सच है लाखों मुसलमानो को मार कर सतलुज नदी में बहा दिया गया था।हम सभी बिहारी इकट्ठा थे उस टाइम सभी लोगों ने मैं जो बोला उसका सपोर्ट किया ।
फिर ओ पाक का लड़का अपने फ़ेसबुक पर अपने भाई का पोस्ट दिखाने लगा जिसमें उसका भाई मशीन गन लिये था।पाकिस्तानी बोला हम लोग शेर हैं गीदड़ नहीं।
मैं तपाक से बोला इसलिये सारी दुनिया तुम लोगों को आतंकवादी बोल रहा .तुम सब पाकिस्तानी आतंकवादी हो ।मेरा ग़ुस्सा जाएज भी था उस वक़्त साउदी अरब के मस्जिद में धमाके हुए थे और एक पाकिस्तानी के स्कूल में भी धमाका हुआ था जिसमें बहुत सारे स्कूली बच्चे मारे गये थे।उस पाकिस्तानी यूवक से आतंकवाद के मुद्दे पर बहस शुरू हो गई ।मैं पाक पर आरोप लगाता गया और ओ जवाब देता गया .ओ कहने लगा पाक में आतंकी नहीं मुजाहेदिन् है.और दुनिया में कही भी मुस्लिम पर ज़ुल्म होता है तो मुजाहेदिन उनकी मदद के लिये जातें हैं.वह बताने लगा मयांमार में रोहिंग्या मुस्लिम को बोधिषट् लोग मार रहे वहाँ पाक मुजाहेदिन दुश्मन को मारने पहुँच गये होंगे।
फिर मैं पूछा ये वही मुजाहेदिन है ना जो पाक के स्कूल में हमला किये थे जिसमें सैकड़ों बच्चें मारे गये.
उसका जवाब था ओ पाक के मुजाहेदिन नहीं थे ओ अमेरीका के नाजायज़ औलाद थे जिनको भारत ने पैसा देकर भेजा था उसमें से कुछ मारे गये थे उनके शरीर पर टैटू बना था और मुसलमान अपने शरीर पर टैटू नहीं बनवाता यह इस्लाम में हराम है ।
फिर मेरा अगला सवाल था तुमहारे मुजाहेदिन भारत पे हमला क्यूँ करते है जबकि पाक से ज़्यादा भारत में मुसलमान है और भारत में मुसलमानो पे कोई ज़ुल्म भी नहीं करता.उसका जवाब सुनिये भारत के 25 करोड़ मुसलमान सच्चे मुस्लिम नहीं.कश्मीरियो पर वहाँ की आर्मी ज़ुल्म करती है .रेप करती है .उनको आतंकी बता कर गोली मार देती है फिर भी भारत के मुस्लिम उनका साथ नहीं देते।तब मजबूर होकर कश्मीरी पाक मुजाहिदिनो को ख़त लिखते है ” आओ हमें इस जहन्नुम से बचाओ .हमारी बेटियों का रेप कर हो रहा भारतीय आर्मी द्वारा .हम पर ज़ुल्म हो रहा .विरोध करने पर आर्मी हमारे लड़कों को आतंकी घोषित कर गोली मार रही.तब ही पाक मुजाहेदिन बदला लेने के लियेकश्मीर में आर्मी के ठिकानों पर हमला करते है .
फिर मैं उससे पूछा अगर मुसलमानो से इतनी ही हमदर्दी है तो इज़रायल फ़िलिस्तीनीयो पर ज़ुल्म करता है तब तुम्हारी पाक सेना और मुजाहेदिन किस बिल में छुप जाते है .उसका जवाब अजीब था ” इज़रायल को नक़्शे से मिटाने के लिये गई गया था पाक AIR फ़ोर्स बट इज़रायल सीमा के पास किसी मुस्लिम देश ने जगह नहीं दिया अपनी जमीन पाए उतरने के लिये .और डयरेक्ट हमला करता तो इंधन ख़त्म हो जाता पाक लौटने से पहले इसलिये हमला नहीं किया गया।कुछ दिन बाद ओ पाकिस्तानी चला गया अपने देश छुट्टी ।
फिर काम करने के जगह पर कुछ पाकिस्तानी ,जर्मन ,मलयेशियाई आदि जगहों के लोग हमारे क्लाईंट बन कर आये हमारे काम को चेक करने के लिये।सबसे नाम देश का परिचय हुआ काम शुरू हुआ.हमारी कम्पनी की तरफ़ से भी हमारी टीम में बहुत लोग थे।हर रोज़ चार घंटे ही चेक करना था।एक दिन काम में प्रॉब्लम की वजह से एक दाढ़ी वाले पाकिस्तानी से मेरा झगड़ा हुआ ।ओ मुझे सबके सामने बोला एक बिहारी 100 बीमारी दो बिहारी कम्पनी हमारी ।उस दिन मैंने उसका अच्छा से क्लास लिया उस दिन के बाद से ओ मुझसे नज़र भी नहीं मिलाता था ।मन ही मन सोच रहा था बिहारी जहाँ भी जाते है अपनी डंका बजा कर आते है एक मेरा सहयोगी था गोस्वामी मेरा पीठ थपथपा रहा और बोला अच्छा जवाब दिया पाकिस्तानी को .उसी दिन मुझे पता चल गया ये पाकिस्तानी भारत के मुसलमानो को अच्छा मुसलमान नहीं समझते .अंदर ही अंदर दुश्मनी रखते है शायद इसलिये की भारत के मुसलमान उनके साथ पाक क्यूँ नहीं गये।
मैं 2 साल बाद भारत लौट चुका था फिर से उर्दू अख़बार के साथ साथ पंजाब केसरी और पीएनए न्यूज़ एजेन्सी के लिये काम शुरू किया ।कुछ महीनो बाद फिर चान्स मिला अबू ढाबी जाने का लेकिन इस बार जवाब मिल ही गया पाकिस्तानी कटप्पा ने भारतीय बाहुबली सैनिकों को क्यूँ मारा।

कम्पनी मेस में एक तरफ पाक का मेस दूसरी तरफ़ इंडिया का मेस दोनो तरफ़ के टीवी पर भारत पाक के एंकर न्यूज़ स्टूडियो में बैठ कर भारत पाक पर हमले कर रहे थे।दरअसल बात ये थी पाक आतंकियों ने भारतीय सेना कैम्प पर हमला किया था उस में हमारे बहुत जवान शहिद हो गये थे।जवाबी करवाई में भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक किया था ।

मुझे एक 20 साल का पाक का पढ़ा लिखा लड़का मिला मैंने पुछ ही दिया तुम लोग ऐसी हरकत क्यूँ करते हो तुम्हारे आतंकियों ने हमारे सेना पर हमला किया जवाबी करवाई में अब भारत तुम्हारे आतंकियों को तुम्हारे घर में घुस कर मार रहा ।उसने भारत के पाक में घुस कर मारने से इंकार किया पर इतना स्वीकार किया भारत के सैनिक पर हमला करने वाले पाक के मज़दूर बेरोज़गार लोग हैं जो पैसों के लालच में अंधा होकर रोज़गार के लिये आतंकी के आकाओ के बहकावे में आ जाते है ।फिर आतंक के आका उनका ब्रेनवाश कर देते है .इसलिये ओ मरने के लिये भी तैयार हो जाते है ।इन आतंकी संगठनों के बहकावे में पढ़े लिखें लोग नहीं आते।जो लोग बेरोज़गार है ग़रीब है उनको पहले ये रोजगार देते है फिर धीरे धीरे उनका ब्रेन्वॉश करके करके उनको मुजाहेदिन बना देते है ।ब्रेन वास होने के बाद उन मुजाहेदिनो को अपने घर बार से कोई मतलब नहीं होता।इनको मुसलमानो पर हो रहे ज़ुल्म के नाम पर पागल कर दिया जाता है ।उनके मन में सिर्फ़ बदला होता है और ख़ुद को समझते है मरने के बाद शहीद कहलाएँगे।

लेकिन मैंने उससे पूछा इस्लाम में कहाँ लिखा है निर्दोष को बम से उड़ा दो को शहीद कहलाओगे.उसने जवाब दिया हाँ जनाब यह सच है इस्लाम में में कही नहीं लिखा पर ओ ग़रीब अनपढ़ बेरोज़गार लोग है ।उनको रोजगार देकर आतंक के आका अपने जाल में ऐसा फँसा लेते है के वह चाह कर भी उस में से नहीं निकल पाते।उनको मरना ही है चाहे उन्हें काम नहीं करनेपर आतंक के आका मारे या काम करके मरे।इसलिये ओ दुश्मनों को मारने का ही रास्ता चुनते है ।
जवाब तो मिल ही गया होगा धर्म की रक्षा के लियें नहीं पैसे के लिये आतंक की राह अपना रहे युवा।

भरोसा नहीं हुआ ना आइये दो धर्मों के आईएसआई आतंकियों की गिरफ़्तारी पर नहर डालते है ।
पैसों का लालच या धर्म की रक्षा के लिये भारत के युवा अपना रहे आतंक की राह…….
2011 से अब तक एनआईए एटीएस और बिहार पुलिस की टीम ने पूर्वी और पश्चिमी चम्पारण से 12 लोगों को देशद्रोह और आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ़्तार किया ।
बेतिया पुलिस की मदद से गुरुवार 4 मई की सुबह भी पश्चिम चम्पारण से पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन आइएसआइ के संदिग्ध आतंकी आबी मोहम्मद को गिरफ्तार किया है। संदिग्ध आतंकी आबी मोहम्मद नेपाल के सिमरौनगढ़ का रहनेवाला बताया गया है।

उसकी गिरफ्तारी बेतिया जिले के सिकटा इंडो-नेपाल बॉर्डर से हुई है। गिरफ्तारी के बाद उसे बेतिया कोर्ट में पेशी के लिए लाया गया। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अाबी अहमद भारत की सीमा में प्रवेश की फिराक में था, ठीक उसी समय उसकी गिरफ्तारी की गयी। आबी मोहम्मद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के लिए काम करता था। पुलिस सूत्रों की माने को आइएसआइ के जरिये आबी अहमद भारत में जाली नोट खपाता था।

पाकिस्तान से अन्य देशों के रास्ते जाली नोट को नेपाल और फिर वहां से भारत में भेजने का जिम्मा आबी अहमद का था। उसपर उत्तरप्रदेश व दिल्ली पुलिस ने 50-50 हजार का इनाम घोषित कर रखा है। जानकारी के अनुसार भारत की सीमा में प्रवेश के दौरान उसे सिकटा के पास गिरफ्तार किया गया। आबी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी में एनआईए टीम को बेतिया एसपी विनय कुमार ने भरपूर मदद की। हालांकि, पुलिस अधिकारी अभी उसके बारे में कुछ भी बताने से इंकार कर रहे हैं।

मगर, सूत्रों का कहना है कि आबी को किसी अज्ञात स्थान पर एनआईए की टीम व पुलिस अधीक्षक विनय कुमार पूछताछ कर रहे हैं। पूछताछ पूर्ण होने के बाद ही पुलिस उसके बारे में खुलासा करेगी।

गौरतलब हो कि हाल ही में 20 अप्रैल को उत्तरप्रदेश की एटीएस टीम ने जिले के साठी थाना क्षेत्र के बेलवा गांव में छापेमारी कर आईएसआईएस के संदिग्ध आरोपी बेलवा निवासी एहतेशाम को गिरफ्तार कर ले गई थी। उसके पास से लैपटाप मोबाइल आदि भी बरामद हुए थे, जिससे उसका तार आइएसआइएस के संदिग्ध आतंकियों से जुड़े होने की आशंका है।
ख़बरों के अनुसार यूपी एटीएस ने पांच राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर आतंक के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की थी।

यूपी एटीएस ने राज्यों की पुलिस की स्पेशल सेल के साथ मिलकर आईएस के चार संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया था।
सुबह फ़जर के नमाज़ के बाद एटीएस पश्चिम चम्पारण ज़िले साठी थाना अन्तर्गत बेलवा गाँव से अलाउद्दीन शेख़ के पुत्र एहतेशामूल हक़ को गिरफ़्तार किया था।
सूत्रों के अनुसार मुंबई, जालंधर बिजनौर और, मुजफ्फरनगर में ऑपरेशन किए गए और
4 संदिग्ध को आईएस से जुड़े होने की आशंका में गिरफ़्तार किया गया ।
हालाँकि 20 अप्रैल को गिरफ़्तारी के वक़्त मिल रही जानकारी के अनुसार इनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला था लेकिन पूछताछ के बाद एटीएस का बयान आया
वह लोग बिहार स्थित नरकटियागंज शूगर मिल में भी आग लगाना चाहते थे. संदिग्ध आतंकियों के निशाने पर गैस सिलेंडर और बैटरी की दुकानें भी थीं,
अकेले घूम रहे पुलिसवालों की हत्या
मुफ़्ती फैजान ने बताया था कि उनके प्लान के मुताबिक वह लोग मुंबई में अकेले घूम रहे पुलिसवालों की भी हत्या करने की फिराक में थे।एटीएस के पास यह सूचना थी कि आतंकवादी घटनाएं करने के लिए एक गिरोह तैयार हो रहा है ।
20 अप्रैल गुरुवार सुबह 4:30 बजे नमाज के लिए अजान ही हुई थी। प्रत्‍यक्षदर्शियों के अनुसार इसी दौरान कुछ लोग वहां पहुंचे और एटीएस के कुछ लोगों ने नमाज़ पढ़ी फिर एहतेशम की गिरफ़्तारी हुई।

यूपी एटीएस पर लग रहे गम्भीर आरोप
हालाँकि अभी ख़बर आ रही है यूपी एटीएस पर गम्भीर आरोप लग रहे हैं।आतंकवाद के नाम पर भ्रमित बता डी रेडिक्लाइजेशन के नाम पर एजेंसियां गवाह और मुखबिर तैयार करने की कोशिश में हैं। सैफुल्लाह एनकाउंटर के बाद से एनआईए व एटीएस लगातार पकड़े गए लोगों के खिलाफ बयान देने के लिए प्रताड़ित कर रही हैं। बुधवार को कानपुर के मोहम्मद आतिफ ने एजेंसियों की घर वापसी के सच को उजागर करते हुए अपना दर्द बयां किया। प्रेस क्लब में मीडिया से बातचीत में आतिफ ने कहा, 7 मार्च के बाद से एटीएस और एनआईए के लोग कभी कानपुर तो कभी लखनऊ कार्यालय बुलाते हैं।

इस वजह से कारोबार बर्बाद हो गया। आतंकी होने के शक में गिरफ्तार लोगों के खिलाफ बयान देने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। यहां तक कि सादे कागज पर साइन करवाए गए।

आतिफ का आरोप है कि कानपुर के रेल बाजार थाने में मनीष सोनकर ने सैफुल्लाह और उसके साथियों से मिले होने की बात कुबूल न करने पर बीवी और उसके पेट में पल रहे बच्चे को मारने के साथ ही परिवार को आतंकवाद के आरोप में फंसाने की धमकी दी।

एनआईए अधिकारियों ने 18 मार्च को ही फेसबुक अकाउंट का पासवर्ड ले लिया था। आतिफ के भाई मोहम्मद आकिब का आरोप है कि 24 अप्रैल को महफूज नाम के व्यक्ति ने रास्ते में रोककर सिम के साथ मोबाइल मांगा। न देने पर एटीएस की हिट लिस्ट में मेरा नाम सबसे ऊपर बताया।

रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुएब ने कहा कि जांच एजेंसियां झूठे सुबूत जुटा रही हैं। हिरासत में लिए गए व्यक्ति का अपनी पसंद के अधिवक्ता से मिलना अधिकार है लेकिन ये अधिकार भी नहीं दिया जा रहा है। वहीं रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव ने डी रेडिक्लाइजेशन को एक खास समुदाय के खिलाफ हेट कैंपेन का हिस्सा बताया।

अब निष्कर्ष यही निकलता है कुछ लोगों को फँसाया जा रहा कुछ लोग शामिल है ।
पश्चिम चम्पारण से एक पखवारे में पकड़े गये दो संदिग्ध आतंकी

जिले में एक महीने से भी कम दिनों में दो-दो संदिग्ध आतंकियों के पकड़े जाने से इलाके के लोगों में सनसनी व दहशत देखी जा रही है। आबी से पूर्व करीब 14 दिन पहले 20 अप्रैल को साठी के बेलवा गांव से देशद्रोह के मामले में संदिग्ध युवक एहतेशामुल उर्फ एहतेशाम गिरफ्तार किया गया था। गौरतलब हो कि पूर्वी एवं पश्चिम चम्पारण जिले में इन दोनों के पूर्व भी कई आईएसआई के संदिग्ध आतंकियो को पकड़ा गया था। अचानक एक पखवारे के अंदर दो संदिग्धों की गिरफ्तारी से लोगों में भय का माहौल है। एक ओर जहां देश में सत्याग्रह शताब्दी वर्ष के कारण चम्पारण की जय-जयकार हो रही है वहीं इस प्रकार के उन्मादी युवकों की करतूत से चम्पारण के इतिहास में नाहक काला अध्याय जुड़ता जा रहा है।
इसके पूर्व 2011 से अब तक इनको मिला कर पूर्वी पश्चिमी चम्पारण से 12 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है जिस कारण चम्पारण 2011 से ही एजेंसियों के निशाने पर है और स्थानीय मीडिया भी उसमें एक ख़ास तरह की भूमिका निभा रहा है. मसलन 2011 में पश्चिम चम्पारण ज़िले के बेतिया मुफ़स्सिल थाना के निवासी अमेरिका बिंद के घर पर पुलिस ने छापेमारी कर दो लाख 90 हज़ार रुपए के जाली नोट बरामद किए. इन पर आतंकी गतिविधियों में भी शामिल होने का आरोप लगाया गया था,बिंद के घर से बरामद नोट पांच-पांच सौ रुपए के थे, जो अलग-अलग पॉलीथीन में छुपा कर रखे गए थे. मौक़े पर से पुलिस ने भारी संख्या में आपत्तिजनक सामान और नोट छापने का उपकरण भी बरामद किया था. इस पर आईएसआई का एजेन्ट होने का आरोप लगा.

सन् 2011 के ही 14 अक्टूबर को नेपाल की सीमा से लगे पूर्वी चम्पारण जिले के हरसिद्धि थाना के यादवपुर गांव के दुर्गेश प्रसाद के घर से पुलिस ने आईएसआई के कथित एजेंट प्रमोद कुशवाहा को गिरफ्तार किया. कुशवाहा के पास से 13 लाख रुपए मूल्य की जाली नोट, छह मोबाइल फोन जिनके सिम कार्ड पाकिस्तान, नेपाल और भारत के विभिन्न शहरों में रहने वाले के लोगों के नाम से लिए गए थे उसे भी बरामद किया गया.

प्रमोद पूर्वी चम्पारण के रक्सौल के शीतलपुर गांव का निवासी है और वह नेपाल के वीरगंज शहर के घंटाघर स्थित अपने एक ठिकाने से जाली नोट समेत अन्य धंधो का कारोबार किया करता था. स्थानीय पुलिस के साथ-साथ मुंबई पुलिस को कई मामलों में उसकी लम्बे समय से तलाश थी.

2013 में यासीन भटकल को भी भारत नेपाल सीमा से सटे रकसोल से गिरफ़्तार किया गया था।
सितम्बर 2014 में भी एनआईए व पूर्वी चम्पारण पुलिस की टीम ने रक्सौल के पनटोका से आईएसआई एजेंट व जाली नोट के धंधेबाज शारदा शंकर कुशवाहा को दबोचा था. तब ऐसी ख़बर भी लिखी गई थी कि यासीन भटकल से उसके संबंधों की जांच चल रही है, लेकिन उसके बाद कभी भी शारदा शंकर कुशवाहा की कोई ख़बर मीडिया में नहीं आई।
अभी तीन महीने पहले ही घोड़ासहन व कानपुर रेल हादसों का आरोपित आइएसआई के कथित एजेंट गजेन्द्र शर्मा को पुलिस ने गिरफ़्तार किया।गजेन्द्र शर्मा पूर्वी चम्पारण के आदापुर के बखरी गांव का रहने वाला है. कथित तौर पर वह आइएसआइ के इशारे पर घोड़ासहन में रेल ट्रैक पर बम प्लांट कर यात्री को डिरेल कराने की साज़िश में शामिल था, लेकिन जिस अरूण राम व दीपक राम को बम विस्फोट कराने की ज़िम्मेदारी दी गई थी, उन्होंने ये काम नहीं किया. उसके बाद गजेन्द्र सिंह व उसके कुछ और लोगों ने उन्हें नेपाल ले जाकर उन दोनों की हत्या कर दी. उन्हीं दोनों की हत्या की तफ़्तीश में नेपाल व आदापुर से पुलिस ने छह संदिग्धों को पकड़ा, जिनसे घोड़ासहन व कानपुर रेल हादसे में आइएसआइ की संलिप्तता का खुलासा हुआ.

20 नवम्बर को कानपुर में हुए रेल हादसे में 156 लोगों की जान चली गयी थी. इस कांड में मोती पासवान नाम के एक शख़्स का नाम आया था और उसकी गिरफ़्तारी भी हुई. मोती पासवान भी पूर्वी चम्पारण का रहने वाला है।

देश के दूसरे जगहों से भी हाल ही में 11 आईएसआई एजेंट को गिरफ़्तार किया गया जिसमें सभी नन मुस्लिम थे।

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