जो सोचें सो पाएं…

Posted by Jayvant Prakash
May 19, 2017

Self-Published

विचार! तीन अक्षरों का एक छोटा सा शब्द, लेकिन चमत्कार इतना बड़ा कि रंक को राजा बना दे और अमीर को फुटपाथिया भिखारी। विचार ही वह Power है जो हमारे जीवन को अचानक ही चमका देती है।

विचारों की यह शक्ति जिस सिद्धांत पर काम करती है, वह है आकर्षण का सिद्धांत The Law of Attraction!

आकर्षण का सिद्धांत- सीधा सा अर्थ है आकर्षित करना। अर्थात् हम जिसे चाहे आकर्षित कर सकते है। अगर आप दुख, बीमारी, गरीबी चाहते है तो ऐसे ही विचार सोचना शुरू कर दीजिए यकीनन आपको गरीब बनने से कोई नहीं रोक पाएगा.

उसके विपरीत अगर आप अमीर, लोकप्रिय, सुस्वास्थ्य, खुशी चाहते है तो खुशी, धन, सेहत के विचार सोचना शुरू कर दीजिए, और एक बार फिर, यकीनन आपको अमीर बनने से कोई नहीं रोक पाएगा। यही आकर्षण का सिद्धांत है।

आप खुद सोचे चुंबक लोहे के सिवाय और किसी को Attract कर सकती है क्या? क्या चुंबक तांबा, पीतल, रबर, कांच आदि को आकर्षित करती है? नहीं। क्योंकि चुंबक और लोहे की Frequency एक है इसिलिए दोनों एक दूसरे को आकर्षित कर पाते है। उसी प्रकार इंसान के विचारों की Frequency और चाहे गए सपनों की फ्रीकवेंसी एक हो जाती है, तो इंसान द्वारा चाही गई सभी चीजे खुद ब खुद उसकी तरफ आकर्षित हो जाती है।

आकर्षण के सिद्धांत के छोटे मोटे उदाहरण हम अनजाने में रोज देखते है, लेकिन कभी गौर नहीं करते-

याद कीजिए आप काफी दिनों से अपने किसी नजदीकी रिश्तेदार से Phone पर बात करने की सोच रहे है लेकिन किसी कारणवश Call नहीं लगा पा रहे है और अचानक ही दूसरे दिन उसी रिश्तेदार का फोन आपके पास आ जाता है!

आप को कोई गाना याद आ गया, आप सुबह से उसी गाने को गुनगुनाए जा रहे है, शाम को जब FM शुरू करते है तो वही गाना बज रहा होता है!

आप अपने लिए कोई चीज खरीदना चाह रहे है लेकिन किसी कारणवश नहीं खरीद पा रहे है और आपकी Birth Day या अन्य Occasion पर वही चीज आपको Gift में मिल जाती है!

आप अपने किसी पुराने Friend को याद कर रहे है जिससे आपका अब Contact नहीं है और कुछ ही दिनों में वह आपको Facebook पर मिल जाता है!

आप परीक्षा में 80 % को लक्ष्य मानकर पढाई कर रहे है और रिजल्ट में आपके उतने ही प्रतिशत बन जाते है!

यह सब घटनाएं Law of Attraction के कारण ही हुई। हमने खुश होकर Excitedly उस चीज के बारे में हरपल सोचा, उसके मिलने की उम्मीद बनाए रखी, और कुछ ही दिनों में वह हमारे सामने आ गई।

सवाल यह उठता है कि हम मनचाही चीज इस सिद्धांत के द्वारा कैसे और कितने समय में पा सकते है?

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