ट्रिपल तालक

Posted by Mahmood Iqbal
May 19, 2017

Self-Published

सेवा में,

माननीय न्यायधीश,
(सर्वोच्च न्यायालय)
विषय- तीन तलाक़ शादी तोड़ने का सबसे घटिया तरीक़ा है तो शादी तोड़ने के अच्छे तरीके कौनसे हैं ?
योर ऑनर,
ऑनरेबल पाँचों जज साहिब, आप अख़बार और पत्रिकाएं तो पढ़ते ही हैं, शायद आप क्राइम पेट्रोल दस्तक और सावधान इंडिया जैसे टेलीवीजन प्रोग्राम भी देखते हों, या शायद नहीं कयोंकि आप सभी बहुत व्यस्त रहते हैं यह हमें भली भांति ज्ञात है, ज्यादातर अखबारों में देश से सम्बंधित बड़ी खबरें पहले दो पन्नो पर होती है, एक पर प्रादेशिक समाचार और अन्य कई पन्नो पर लोकल खबरें।
माननीय न्यायाधीश महोदय प्रतिदिन इन लोकल खबरों वाले हर पेज पर किसी न किसी महिला की हत्या की खबर छपी होती है और इसके आरोपी पती और उसके घर वाले ही अधिकतर होते हैं। एक अनुमान के मुताबिक इस तरह की हत्याएं भारत मैं प्रतिदिन सैंकड़ो की संख्या मैं होती है, इसकी पुष्टि सोनी चैनल पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम क्राइम पेट्रोल दस्तक और लाइफ ओके चैनल पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम सावधान इंडिया से भी होती है। इन दोनों कार्यक्रमों के 80% भागों में पत्नी की हत्या पती द्वारा ही की जाती है, कभी दहेज़ के लिए तो कभी दूसरी औरत के लिए, जो सत्य घटना पर आधारित होती है।
महोदय कल ही मुम्बई की एक ह्रदय विदारक खबर आई की 4 दिन की ब्याहता पत्नी को उसके पती ने ही पहले गला घोंट के मारा और फिर उसके टुकड़े टुकड़े कर के अलग-अलग जग्हों पर फ़ेंक दिया।
महोदय कुछ हाई प्रोफाइल केस की तरफ भी इशारा करता चलूँ, पिछले वर्ष बसपा के राज्य सभा सांसद की बहू की हत्या का आरोप उसके पती और ससुराल वालों पर है सांसद और उनका परिवार इस केस में गिरफ्तार भी हुए थे।
अमरमणि तिरपाठी पूर्व मंत्री के पुत्र अमन मनी का बहुचर्चित केस जिसमे अमनमणी ने अपनी पत्नी की हत्या लॉन्ग ड्राइव के बहाने कर दी। एक आईएस ने उत्तर प्रदेश के कानपूर देहात मैं अपनी नई नवेली दुल्हन को मौत के घाट उतार दिया था।
माननीय महोदय यह उदाहरण ट्रेलर मात्र हैं ऐसी घटनाएं सैंकड़ों के रुप में प्रतिदिन होती हैं। महोदय इससे भी अधिक घ्रणित कृत्य समाज मैं पत्नी को छोड़ के भाग जाने का है। महोदय एक सर्वे के अनुसार भारत मैं 21 लाख 69 हज़ार महिलाएं ऐसी हैं जिनके पती उन्हें छोड़ कर चले गए बगैर कोई तलाक़ दिए ऐसी महिलाएं बरसों से अपने पती के बगैर रह रही हैं, और उन्हें यह भी अब याद नहीं आया वोह विवाहित हैं भी या नहीं।
इसमें महोदय एक बहुचर्चित नाम देश के यशस्वसि प्रधानमन्त्री माननीय मोदी जी की पत्नी श्रीमती जशोदा बेन का भी है जो अपने पती के जीवित होते हुए बिना तलाक़ के पती के साथ नही रहने के लिए अभिशप्त हैं।
महोदय आप से विनम्रता से पूछता हूँ की शादी तोड़ने का घटिया तरीक़ा तीन तलाक़ है या उपरोक्त में मैंने जो विषय उठाएं हैं वो ?
माननीय सर्वोच्च न्यायालय मानव अधिकारों की दुहाई देते हुए क्या आप कम्युनिटी विशेष के साथ राजनीत नहीं कर रहे हैं ?
आप सम्विधान की धारा 13, 14 की दुहाई देकर 25 करोड़ लोगों की संविधान की धारा 25, 26 का हनन करने का प्रयास नहीं कर रहे ?
माननीय न्यायालय यदि आपका उद्देश्य आधी आबादी के मानव अधिकारों की रक्षा की होती तो माननीय न्यायालय आप औरतों की उपरोक्त अन्याय को एड्रेस अवश्य करते, किन्तु देश का दुर्भाग्य है की सर्वोच्च न्यायालय भी भाजपा जैसी राजनेतिक पार्टी का एजेंडा सेट करने में व्यस्त हैं। और अगर आपको यह लगता है की तीन तलाक़ शादी तोड़ने का सबसे घटिया तरीका है तो आपसे निवेदन है कि अपने फैसले में यह जरुर स्पष्ट करें कि शादी तोड़ने के वो अच्छे तरीके कौन से हैं जिसे आप महत्व देना चाहोगे कयोंकि तीन तलाक़ न देकर अपनी पत्नियों को जिंदा जला देना, फांसी चढा देना, जहर दे देना, उसके जीवन को नरक समान कर देना या पत्नी को बिना तीन तलाक़ के छोड़ भागना तो किसी भी न्यायालय की नजरों में शादी तोड़ने के सराहनीय कदम नहीं हो सकते।
माननीय न्यायालय आप के निर्णय पर 25 करोड़ मुस्लिम कम्युनिटी की नज़र टिकी हुई है। या तो क़ानून की किताब मैं आप का निर्णय स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा या काला अध्याय बनकर रह जाएगा, निर्णय आप को करना है की क़ानून जीतेगा या घटिया राजनीती।

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