दुनिया को राह दिखाते मीडिया जगत का घिनौना सच

Posted by suhana sharma
May 25, 2017

Self-Published

मैं 22 साल की आज के आधुनिक समाज में पली बढ़ी युवती हूं।। जिसके हर लड़की की तरह ही सफल होेने के ख्वाब है । इस समय में अपनी पढ़ाई के साथ -साथ शहर के एक प्रतिष्ठ समाचार पत्र में पत्रकार के पद पर काम कर रही हूं। जब मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई शुरु की तो मुझे भी बाकी सब लोगों की तरह मीडिया बड़ा अच्छा,स्वच्छ नजर आता था। जब मैंने मीडिया में काम करना औऱ उसके तौर तरीकों को जानना शुरु किया तो अपने आप से घृणा सी होे गई । बाहर से समाज के चौथे स्तम्भ का काम करने वाले लोग अंदर से इतनी भष्ट्राचार में लिप्त और दकियानूसी सोच से अभी तक बाहर नहीं आ पाए है।

अखबारों में नारी शक्तिकरण पर बड़े बड़े लेख लेखने वाले समाजपत्र और वहां काम करने वाले लोग लड़कियों को बस एक वस्तु के तौर पर देखते है। समाज का एक एेसा रुप जहां औरत ही औरत की सबसे बड़ी दुश्मन है । मीडिया में अगर किसी लड़की को कमजोर करना है या उसका आत्मविश्वास गिराना है तो उसका चरित्र खराब कर दो। मैं जिस अखबार में पहले स्ट्रिंगर के पद पर काम कर रही है थी उसे मैं कभी छोड़ना नहीं चाहती थी, लेकिन मेरी एक साथी कलीग ने सम्पादक के साथ मिलकर वहां मेरा साथ काम करने वाले पुरुष साथी कलीग से रिश्ते बनाने के बातें बनाई । मैं अपना करियर अभी शुरु नहीं कर पाई थी और एेसे किसी मामले में नहीं पड़ना चाहती थी इसलिए ना चाहते हुए भी मैनें वहां से छोड़़ कहीं ओऱ जॉब कर ली।

मुझे समझ नहीं आता कि मीडिया का यह दोगला चेहरा क्यों, क्यों हर साल महिला दिवस पर बड़े बड़े आर्टिकल लिखे जाते है नारी उत्थान की बातें की जाती है और वहीं दूसरी ओऱ साथ काम करने वाली लड़की को एेसे देखा जाता है कि वह पाने की चीज है । अलग वह किसी को मना कर दे तो नारी के आगे बढ़ने आधुनिक होने पर बहस करने वाले लोग उसके बारे में कहते है कि उसका किसी ओर के साथ अफेयर होगा। अगर वह लड़कों के साथ घूम रही है, शराब पीती है, या सेक्स जैसे मुद्दे पर खुलकर अपनी राय देती है तो उसका चरित्र खराब है ।

समाज के चौथे स्तभ के रुप में काम करने वाले इल मीडिया जगत को समाज में सुधार लाने की बजाए अपने में सुधार लाना चाहिए, दनिया की सोच के ठेका उठाने वाला मीडिया आज तक अपनी सोच में बदलाव नहीं ला पाया है । किसी को आईना दिखाने से पहले मीडिया को अपने अंदर झांकने की जरुरत है । लड़कियां मीडिया में खुद की पहचान बनाने आती है उसे अपनी घटिया सोच के पैमाने पर ना मापे ।

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