प्रेम विवाह : आखिर विरोध क्यों?

Posted by Naresh Yogi
May 25, 2017

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हाल ही में घटित अमित नायर हत्याकांड और आए दिन हो रही आत्महत्याओं को देखकर मन बार बार सोचने को विवश हो रहा है कि आखिर प्रेम और प्रेम विवाह इतनी बड़ी समस्या कैसे हो सकता है जो आए दिन हज़ारों ज़िंदगियां लील रहा है?

बहुत से लोग प्रेम की असफलता से आत्महत्या कर रहे हैं और जो हिम्मत करके आगे बढ़ भी जाते हैं वो अमित नायर की तरह मार दिए जाते हैं. आखिर मानवीय मूल्यों में भी इतना भ्रष्टाचार? हमे जाती की फिक्र है,इज्ज्त की फिक्र है, पैसों की फिक्र है, नोकरी की फिक्र है लेकिन उस जान की फिक्र नही है जो दोबारा आ ही नही सकती. हम दिनों दिन इतने संवेदन हीन क्यों होते जा रहे हैं? जिस उम्र में एक युवा को अपने बेहतर भविष्य को बनाने में समय लगाना चाहिए उस उम्र में उन्हें अपने रिश्तों को बचाने के लिए अपने ही लोगो से लड़ना पड़ रहा है. अगर इस प्रकार ही हम मानवीय गुणों को खत्म करते रहे तो क्या हम आने वाली पीढ़ी को गौरवपूर्ण भारत का एक भी उदाहरण दे पायेंगे?

इस विषय पर आपके सुझाव आमंत्रित है.एक युवा होने के नाते, युवाओं की इस प्रमुख समस्या के समाधान के लिए मैं भी जल्द ही आदरणीय प्रधानमंत्री महोदय को पत्र लिखूँगा. लेकिन केवल सरकार ही सब कुछ नही कर सकती, समाज का अंग होने के कारण ये हम सबकी भी नैतिक ज़िम्मेदारी बनती है. मैं तो यही अनुरोध करना चाहूँगा कि आप प्रेम पर पाबंदी मत लगाइए, बल्कि बुराइयों पर पाबंदी लगाइए. अपने बच्चों की अच्छी परवरिश कीजिए,उन्हें संस्कारी बनाइए, उनका विश्वास जीतिए और खुद उन्हें विश्वास दिलाइए कि आप उनके हर अच्छे फेसलो में उनके साथ है.
किताब से निकाल ले जायेगा प्रेमपत्र
गिद्ध उसे पहाड़ पर नोच-नोच खायेगा

चोर आयेगा तो प्रेमपत्र ही चुराएगा
जुआरी प्रेमपत्र ही दांव लगाएगा
ऋषि आयेंगे तो दान में मांगेंगे प्रेमपत्र

बारिश आयेगी तो प्रेमपत्र ही गलाएगी
आग आयेगी तो जलाएगी प्रेमपत्र
बंदिशें प्रेमपत्र ही लगाई जाएंगी

सांप आएगा तो डसेगा प्रेमपत्र
झींगुर आयेंगे तो चाटेंगे प्रेमपत्र
कीड़े प्रेमपत्र ही काटेंगे

प्रलय के दिनों में सप्तर्षि मछली और मनु
सब वेद बचायेंगे
कोई नहीं बचायेगा प्रेमपत्र

कोई रोम बचायेगा कोई मदीना
कोई चांदी बचायेगा कोई सोना
मै निपट अकेला कैसे बचाऊंगा तुम्हारा प्रेमपत्र
(कवि: बद्री नारायण)

धन्यवाद
नरेश योगी
पूर्व महासचिव
महाराजा कॉलेज जयपुर
9610281960

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