यहां जनता की कोई नहीं सुनता…कंपनियों की गुलाम है सरकारी मशीनरी

Posted by Anchal Ojha
May 10, 2017

Self-Published

सबका साथ सबका विकास यह एक ऐसा नारा है जो इंगित करता है कि सरकार हर व्यक्ति के विकास को प्राथमिकता देना चाहती है। किंतु अमेरा के इस परिवार की कहानी सरकार के तमाम दावों पर गहरा तमाचा है। शिवनाथ, शोबरन एवं शिवरतन के पास अब नहीं बचा है कोई रास्ता, 18 लोगों का एक परिवार जिसमें तीन भाईयों की कुल जमापूंजी संयुक्त जमीन 2 एकड़ और उसका कुल मुआवजा 97300 रुपये, एक व्यक्ति को मजदूर ग्रेड की जॉब। जमीन और घर दोनों चले गए, अब इस परिवार के पास सर छुपाने के लिए छत नहीं है। यह परिवार आज भी उसी जमीन पर बीच खदान में आश्रय लिए हुए है कि शायद सरकार कोई मदद करे, परिवार के सबसे छोटे भाई बताते हैं कि बगल के गांव में 70,000 रुपये डिसमिल जमीन मिल रही है, लेकिन कैसे लें, इतना पैसा नहीं है कि 3-4 डिसमिल जमीन लेकर घर बना सकें। सरकार से सरकारी जमीन मांगा है लेकिन वह भी नहीं मिली। मुआवजा का कुल रकम 97300 अभी नहीं मिला, लेकिन बड़े भाई को मजदूर की नोकरी दे घर तोड़ दिए गए हैं, एसईसीएल ने जमीन पर कब्जा कर लिया है। किसी तरह परिवार चल रहा है, अब कहां जाएंगे कोई पता नहीं है। सरकार के पास प्रभावितों के रिसेटलमेंट का कोई प्लान नहीं है। ऐसे कई परिवार यह आशा लिए की शायद सर छुपाने के लिए कहीं कोई आसरा दे दें, अपनी टूटी हुई घर के सामने पत्तियों और तिरपाल से छज्जा बना कर रहने विवश हैं।
माननीय डॉ. रमन सिंह जी, आप हेलीकॉप्टर में घूम कर कहीं भी उतरने का ड्रामा करते हैं और लोक सुराज की बात करते हैं, यदि समय मिले इन ड्रामों के बीच तो कभी अमेरा में बिखरे उन परिवारों से मिल लें, जिनकी जमीन पुराने दर पर कौड़ियों के दाम लूट लिए गए और जिनके पास आज सर छुपाने के लिए जगह तक नसीब नहीं हो रहा है।
यदि आपकी इस व्यवस्था को लोकतंत्र कहा जाता है तो सर मुझे आपकी इस व्यवस्था से आजादी चाहिए, ताकि लोग अपनी जमीन, अपना गांव, अपना परिवार बचा सकें। यदि आप लोक सुराज में समस्याओं का हल करते हैं तो फिर आप अपने अधिकारियों के साथ अमेरा, कटकोना और परसोढिकला में चौपाल लगाइये न, आपकी पूरी प्रशासन इन गोँवों से दूर क्यों भागती है। क्या यह सही नहीं है कि आप लोगों को बेघर करने का कार्य कर रहे हैं। कई लोगों को अब तक मुआवजा और नोकरी नहीं मिली फिर भी आपकी सरकार और प्रशासन जनता का भला करना छोड़ ऐसे लोगों के साथ खड़ा होती है, जो लोगों को तोड़ने का कार्य कर रहे हैं।
यदि ऐसी परिस्थिति में कोई हथियार उठाता है तो गलत क्या है? यदि कोई आज़ादी की मांग करता है तो गलत क्या है? ऐसे परिवारों के लिए रिसेटलमेंट के प्लान सरकार के पास क्यों नहीं है।
ऊर्जा की आवश्यकता के लिए कोयला चाहिए, किन्तु किसी की जान मार कर नहीं, सरकार के पास ऐसे परिवारों के रिसेटलमेंट का प्लान क्यों नहीं है?

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