‘विश्वसनीयता’ के कटघरे में मीडिया !

Posted by Sushant Mishra
May 3, 2017

Self-Published

मीडिया को समाज को आइना कहा जाता है और समाज में किसी भी घटना पर मीडिया की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है, चाहे माध्यम कोई भी हो. दो दिन पहले जब हमारे दो जवानों  की बर्बरता से हत्या कर दी गयी तो मीडिया यह चिल्लाने लगा कि भारत को अब जवाब देना चाहिए और उसके कि अगले दिन यह खबर आ गयी कि भारतीय जवानों ने सात पाकिस्तान सैनिकों को मार गिराया है जबकि सेना ने ऐसा कुछ नही किया. आखिर ऐसा क्यों हो रहा है क्या ख़बरों के होड़ में भाग रही मीडिया को सत्यता की परख नहीं है या मीडिया सिर्फ एक मनोरंजन का माध्यम बनकर रह गया है, जो दर्शकों को पसंद आये वह परोस दो, इससे इनका धंधा भी चलेगा, साथ -साथ ऐसे खबर से  सरकार की भी कोई जवाबदेही नहीं रहेगी. आज एक राष्ट्रीय पार्टी का प्रवक्ता सरेआम पूरे देश के सामने नेशनल चैनल पर यह झूठ बोल रहा है कि हमारे जवानों ने इसका बदला ले लिया है. जहाँ मीडिया को इन प्रवक्ताओं से सवाल पूछना चाहिए वहीँ यह इन्हें बुलाकर सरकार के लोगों के खुश करने में लगा हुआ है.

वहीँ सोशल मीडिया दौर में जहाँ लोगों को बात रखने का मौका मिला तो इसका बुरी तरह से इस्तेमाल भी किया जा रहा है. उसका शिकार भी हमारी मीडिया हाउस बड़ी आसानी से बनती जा रही है. सोशल मीडिया पर आज कल जिस तरह से चीजें वायरल की जा रही हैं उससे हमारे समाज पर अच्छा और बुरा दोनों तरह कर असर पड़ रहा है पर जो भी बातें वायरल हो रही है उनकी जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है. तकनीक के इस दौर में भी आज हम सच्चाई से कोसों दूर हैं जिसका फायदा कुछ लोग उठाकर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं. आज के इस दौर में जिस तरह से किसी भी असल खबर की महत्ता नहीं समझी जा रही, वहीँ सोशल मीडिया पर खबरों को फिल्टरेशन भी जरुरी है ताकि सही खबर लोगों तक पहुँच सके.

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