“सरकारी स्कूलों के अभिभावकों को ई0 अरुण कुमार ओझा का खुला खत”

Posted by Arun Kumar Ojha
May 27, 2017

Self-Published

कहा गया है  धरती पर  साक्षात् भगवान के स्वरूप   माता पिता है तो मैं इस भगवान पर अंगुली उठाता हूँ खासकर उनलोगो पर जो अपने बच्चों को  सरकारी स्कूलों में पढ़ाते तो है लेकिन माता पिता होने का फर्ज नहीं पूरा करते |

हे कलयुगी भगवान क्या आपके बच्चों  का भविष्य 5 साल में 5 ड्रेस और छात्रवृति मिलने से अच्छा हो जायेगा या स्कूलों में अच्छी शिक्षा मिलने से भविष्य बनेगा ,  बड़ी आश्चर्य होता है उस समय  आप सभी की  तत्परता देख कर  जब ड्रेस या छात्रवृति स्कूलों में मिलने वाली होती है, आपके उस जोश और तत्परता पर देश का भविष्य रो-रो  के दुहाई दे रहा है कि कभी ऐसी ही तत्परता स्कूलों में पढाई के लिए भी दिखाएँ |

आज मैं अपनी नैतिक जिम्मेदारी  समझते हुए आपसे 5 सवाल कर रहा हूँ कृपया अपनी अंतरात्मा को टटोलें और जबाब से अपने भविष्य (पुत्र/पुत्री) को सवारें|

 

1) आपका बच्चा जब निजी विद्यालय में पढ़ता है तो समय  से पहले स्कुल आप खुद पंहुचा कर  आते है – फिर सरकारी विद्यालय में आपका बच्चा समय से क्यों नहीं जाता ? स्कुल छोड़ बिच में ही घर कैसे आ जाता है  ?

2) अपने   बच्चों  का  ड्रेस निजी विद्यालय के मुताबिक खरीदकर उसके साफ सफाई का ध्यान रखते है – जबकि सरकार ने मुफ्त में  ड्रेस दिया है  फिर भी आप उसे साफ करना  तो दूर की बात स्कुल से आने के बाद खोलते भी नहीं बच्चों के ड्रेस ?

3) 5 साल खिचड़ी खाने / ड्रेस लेने / छात्रवृति मिलने से बच्चो का भविष्य बनेगा क्या? यदि नहीं तो आप केवल इन्ही तीन चीजों की शिकायत क्यों करते है ? पढाई की  शिकायत क्यों नहीं करते ?

4)जब आपका बच्चा निजी स्कुल में पढ़ता है तो एक कॉपी,पेंसिल  मांगने पर साथ में रब्बर और अन्य चीजे  भी खरीद कर  देते है वहीँ  बच्चा सरकारी विद्यालय में है तो  कॉपी- कलम  मांगने पर डॉट तो पड़ती ही है साथ में कभी – कभी  शिक्षको को भी खरी खोटी सुनना पड़ता है |

5)आपका बच्चा जब निजी स्कुल में पढ़ रहा है तो उसे ट्यूशन भी लगाते है और घर पर भी उसके पढाई और होमवर्क का ख्याल रखते है जबकि सरकारी स्कुल के बच्चों पर तनिक भी ध्यान नहीं होता ऐसी दोहरी मानसिकता क्यों?

इन सारे सवालों के रहने के बावजूद आप सरकार को गिरती शिक्षा व्यवस्था के लिए जरूर कोसते है

आप अपना नैतिक कर्तब्य समझते हुए इन सारे सवालों का जबाब आपने बच्चे के ऊपर  जरूर लागु करें

धन्यवाद

ई० अरुण कुमार ओझा

संस्थापक

बिहार इंस्टिट्यूट ऑफ़ प्रॉफ़ेशनल ट्रेनिंग – पटना

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