सोशल मीडिया पर बढ़ रही नकली व काल्पनिक ख़बरें

Posted by Kapil Sharma
May 1, 2017

Self-Published

ख़बरें जो सच नहीं

वो ख़बरें जो कल्पना से तैयार की जाती है लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिये।

भारत में सोशल मीडिया के वर्तमान परिदृश्य में, इंटरनेट पर बहुत से नकली और भ्रामक समाचार वेबसाइट और ब्लॉग हैं। लोग खबरों के चयन के बारे में एक पहेली में हैं कि किस खबर को सही माना जाना चाहिए और झूठी खबर क्या है? जो कुछ पक्षपाती वेबसाइटों द्वारा उत्पन्न होती है। इस वजह से कुछ संवेदनशील मुद्दों पर अपमानजनक और अनुचित टिप्पणियां लोगों को कभी-कभार बहुत ही अप्रसन्न बना देती है, जो कि कुछ बिके हुऐ पत्रकारों अथवा सँकुचित सोच वाले राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा उत्पन्न की जाती है। ये वेबसाइटें राजनीतिक रूप से पक्षपातपूर्ण लोगों के स्वामित्व में हैं और वे धर्म, जाति, आरक्षण और सांस्कृतिक भावनाओं जैसे मुद्दों का उपयोग करके निर्दोष लोगों के दिमाग को बहकाने का काम करते हैं। यह ईमानदार मीडिया का अपमान भी कर रहा है और वास्तविक में समाज का भला चाहने वाले लोगों को कभी-कभी इसके कारण भुगतना पड़ता है।

इसके लिए सरकार का एक प्राधिकरण निकाय होना चाहिए, जिसे इस तरह की अवैध गतिविधियों पर नज़र रखना चाहिए, ताकि इंटरनेट एवं सोशल मीडिया आम जनता के लिए समाचारों का विश्वसनीय स्रोत बन सके, और आम नागरिक होने के नाते हमारा कर्तव्य है कि किसी भी समाचार को पढ़ कर उस पर प्रतिक्रिया देने से पहले एक बार अवश्य किसी अन्य स्त्रोत से सूचना का पुष्टिकरण कर लें। क्योंकि आजकल आग की फेसबुक, व्हटसेप और वेबसाइटस पर आग की तरह फैल रही आधे से ज्यादा ख़बरें सच नहीं होती बल्कि आम जनता की भावनाओं को

Fake news created by Social Media

भड़काने के लिये भ्रष्ट राजनीति से प्रेरित कुछ अनैतिक लोगों द्वारा तैयार किया गया षड्यंत्र होता है।

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