हिंदुस्तान में (अ)वामपंथ/अवामपंथ आंदोलन का शवयात्रा।

Posted by Imran Ahmad
May 18, 2017

Self-Published

जिसको कोंग्रेसीओ को टोह देना है ,भाजपाइओ से मोह लेना है ;वह व्यक्ति (अ)वामपंथ से दूर रहे,उनके लिए नहीं है। सीपीआई और सी.पी.एम. ने कांग्रेस को टोह दे कर (अ )वामपंथ आंदोलन निगल गई है। बची-खुची तहरीक को ML ने भाजपा के मोह में धो दिया। और बाकी कसर तथाकथित पीपुल्स फ्रंट /गुरिल्ला फ्रंट ने मिट्टी में डुबो दिया। सचाई ये है की हिंदुस्तान में (अ)वामपंथ को गैर संगठनिक कामरेडो ने नामो-निशान बचा के रखा है।
शिक्षण संस्थानों में AISA(All India Sangh/Sex Association) और SFI(Students’ Fascists of India) ने (अ)वामपंथ का कबाड़ा कर रखा है। AISF को सीपीआई ने मौक़ा ही न दिए वर्ना खुदा जाने ये क्या गुल खिलाते। अल्लाह का शुक्र है की सीपीआई ने AISF को पंगु कर दिया है।
रोहित वेमुला प्रकरण के समय HCU के छात्रसंघ में SFI शामिल थी। नजीब अहमद गायब हुए जे.न.यु के छात्रसंघ में AISA-SFI सत्ता में थे। मजेदार बात ये है कि दोनों प्रकरणो में छात्रसंघ किसी न किसी रूप में शामिल है।
लेकिन इन सब चालक जनाब कन्हैया निकले ,और बन गए हीरो। लेकिन नजीब प्रकरण पर कोई नया नायक जन्म न ले सका। मगर एक दुर्घटना जरूर घटा कि जनाब योगी बन गए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और साथ साथ मियां भाई (अ)वामपंथ के तुलना में संघ के प्रेम में ग्रिफ्तार हो गए।
एक से पहले ही से तथाकथित कामरेडो के कारण (खास कर शिक्षण संस्थानों में ) मेरे जैसे मुस्लमान भी (अ)वामपंथ का मतलब नास्तिकता समझ बैठे थे। अल्लाह का शुक्र है कि कामरेड हसरत मोहनी का एक शेर
“درویشی و انقلاب مسلک ہے میرا صوفی مومن ہوں ،اشتراکی مسلم”
ने मेरे आँखों को खोल दिया।
इन संघी/कांग्रेसी रूपी तथाकथित वामपंथीयो को ज़रा भी शर्म तो है नहीं,जो जय भीम का नारा फ़िज़ा में उड़ा रहे है।ये वही सी.पी.आई. और संघ जो कांग्रेस कोप टोह दे कर अम्बेडकर साहब को मुंबई से कोंस्टीटूएंट असेम्ब्ली के चुनाव में शिकस्त करवाया।
अम्बेडकरवादियों को चाहिए कि वो अम्बेडकर के साथ साथ जिन्ना साहब की भी इबादत करे ,क्योंकि मुस्लिम लीग ने ही तुम्हारे आक़ा को दस्तूर बनाने का मौक़ा दिया।
अब सच्चा कामरेड ये नारा बुलंद करेगा ” MARX LENIN MOHANI . WE SHALL FIGHT, WE SHALL WIN . ” वर्ना मौक़ापरस्त व्यक्ति “जय जयललिता ,लाल सलाम कह कर राज्यसभा पहुँच जाते हैं।

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