हड़ताल की बेनामी “मौत” !!

Posted by MJ Mayank
May 25, 2017

Self-Published

डॉक्टर भगवान का रूप माने जाते है या यु कहे तो भगवान नाराज हो तो हम डॉक्टर के पास जाते हैं और डॉक्टर नाराज हो तो भगवान के पास … कुछ इसी तरह का सिलसिला आजकल पटना में देखने को मिल रहा….पटना के सरकारी मेडिकल अस्पताल PMCH में डॉक्टर हड़ताल पर हैं और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा … और यह भुगतान कुछ पैसे तक सिमित नहीं हैं बल्कि अपने जान गवाकर करना पड़ रहा …  ये हड़ताल सभी पीजी मेडिकल काउंसलिंग के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसवालों के खिलाफ ऐक्शन की मांग को लेकर पर हैं। माना की मांग जायज हैं लेकिन इसके विरोध का तरीका सरासर गलत .. एक डॉक्टर में लोगो को भगवान दीखते हैं जो हर संभव विषम परिस्थितयो में मदद करे लेकिन वही डॉक्टर अपने कर्त्तव्य भूल ऐसी ज्यादती पर उतर जाये तो यह मानवता की हार हैं… तक़रीबन 500 जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर हैं … अब सवाल यह उठता हैं की सरकार चुप क्यों बैठी हैं..मामले की जांच कर जल्द से जल्द निपटारा क्यों नहीं हो रहा ? सुशासन बाबू के नाम से प्रसिद्ध नितीश कुमार को क्या उन लोगो की जान की कीमत की तनिक भी परवाह नहीं जो इन हड़ताल का शिकार बन अपनी जान गवा बैठे ? उधर विपक्षी पार्टियां लगातार निशाना बना सियासी चाल चलने में लगी हैं..यह हमारे देश के लोकतंत्र का दुर्भाग्य  हैं की किसी भी दुखप्रद घटना को राजनितिक मोड़ दे दिया जाता हैं … हमें दूसरे देशो से सिखने की जरुरत हैं, हाल में जब मैनचेस्टर धमाका के बाद मानो सारा ब्रिटैन एक हो गया हो…सारी राजनितिक पार्टियां एक दूसरे पर हमले करने के बजाये एकजुट हो गयी .. मंदिर,मस्जिद और चर्च के दरवाजे  सभी के लिए खोल दिए गए ताकि किसी को परेशानी न हो और वो वह निःसंदेह ठहर सके…और यहाँ हमारे देश में राजनितिक गतिविधिया इतनी हावी हो गयी हैं की मुद्दा वास्तविकता से हटकर सियासत की गलियों में इसका ढिंढोरा पीटा जाता हैं … अब बात बिहार में स्वास्थ्य विभाग को लेकर करे तो यह काफी दयनीय हैं .. आकड़ो की तरफ देखो तो बिहार में 11 करोड़ की आबादी में सिर्फ 4000 डॉक्टर हैं…मतलब 28000 मरीजों पर 1 डॉक्टर…यही नहीं 8800 मरीजों पर एक बेड की सुविधा उपलब्ध हैं…यह आकड़े हैरान करने के लिए काफी हैं….यह राज्य सरकार की कमजोर कड़ी को बखूबी दर्शाता हैं … अब बात हड़ताल की वजह से मरे लोगो पर करे तो ३ दिनों में 15 जाने जा चुकी हैं .. यही नहीं 2016 में भी हड़ताल की वजह से 9 लोगो को अपने जान से हाथ धोना पड़ा … यह सिलसिला 2004 से लगातार चलता आ रहा हैं और न जाने इस विरोध के भावना में कितने घर उजड़ गए … यह हालत सिर्फ बिहार की ही नहीं बल्कि देश के कई राज्यों में फैला हुआ हैं जहा आये दिन हड़ताल की वजह से मौते होती रहती हैं और इनका जिम्मेवार कोई नहीं होता … इसी मार्च  महाराष्ट्र में हड़ताल की वजह से 5 दिंनो में 377 लोगो की जाने गयी और सरकार बस तमाशा और दिलासाः देते रही…इस देश के लिए यह गंभीर प्रश्न हैं की अगर जान बचाने वाला ही अप्रत्यक्ष रूप से जान लेने लगे तो फिर उनमे और हत्यारो में फर्क ही क्या रह जायेगा…  सरकार का ऐसा रवैया कब तक बर्दास्त किया जाये ? डॉक्टरों को यह समझना होगा की विरोध करने और अपने बात रखने की सीमा हैं … अगर शिक्षित युवा डॉक्टर ऐसा करने लगे तो देश बुरी तरह से बीमारी से ग्रस्त हो जायेगा और आम लोगो पर से इनका विश्स्वास टूट जायेगा…केंद्र सरकार को भी ऐसी योजनाए लाने की जरुरत है जिससे लोग आसानी से इलाज करवा सके … By © Mj mayank

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