मेरे पढ़े लिखे परिवार में भी पीरियड्स एक एलियन सब्जेक्ट है

Posted by Rachna Shrivastava in Hindi, Menstruation, My Story
May 22, 2017
ये लेख, Youth Ki Awaaz द्वार शुरु किए गए अभियान #IAmNotDown का हिस्सा है। इस अभियान का मकसद माहवारी से जुड़े स्वच्छता मिथकों पर बात करना है। अगर आपके पास पीरियड्स में स्वच्छता के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले प्रॉडक्ट्स को सुलभ बनाने का तरीका हो या पीरियड्स के मिथकों से लड़ने वाली कोई निजी कहानी हो तो हमें यहां भेजें

पीरियड्स, माहवारी, डेट्स- ये कुछ ऐसे शब्द हैं, जिन्हें सुनकर हमारे समाज के पढ़े लिखे और तथाकथित उच्च वर्ग के लोग भी नाक- भौ सिकोड़ने लगते हैं। एक लड़की को मासिक धर्म शुरू होने के साथ ही ये सिखाया जाता है कि उसे यह बात औरतों के सिवाय सबसे छुपानी है और उस दौरान कुछ ऐसे हैं जो नहीं करने हैं।

अब यहां मैं अपना ही अनुभव बताऊं तो जब मैं सातवी कक्षा में पढ़ती थी तब मेरे पीरियड्स शुरू हुए। हालांकि मेरी मम्मी मुझे पीरियड्स के बारे में पहले ही बता चुकी थीं। पहली बार खून देखते ही मेरे मन में न जाने क्या क्या खयाल आने लगे कि कहीं मुझे कैंसर तो नहीं हो गया या चोट तो नहीं लग गई। फिर मैंने अपनी मम्मी को बताया तो वह मुझे बाथरूम में लेकर गईं और मुझे बताया कि पैड कैसे यूज़ करते हैं।

ये सब होने के बाद जब मैं नहा कर निकली और जैसे ही पूजा का लोटा उठाया तो मेरी मम्मी मुझे रोकते हुए मेरे पास आईं और धीरे से बोलीं कि पीरियड्स में पूजा नहीं करते। मेरे सवाल करने पर उन्होंने कहा कि अभी पूजा नहीं करते क्योंकि तुम अपवित्र हो। भगवान नाराज़ हो जायेंगे। उस समय मैं 11 वर्ष की थी और उतनी समझदार नहीं थी तो मम्मी की बात मानते हुए मैंने लोटा वापस रख दिया।

वो मेरे पहले पीरियड थे तो मैं दिन भर असहज महसूस करती थी और जब भी बाथरूम जाती तो पैड पर लगे खून को देखकर रोती थी। एक दिन बाथरूम से रोते हुए निकली तो पापा के कारण पूछने पर एकदम से मम्मी आकर बोलीं कि कुछ नहीं, पैर में दर्द हो रहा है इसलिए रो रही है। और उस दिन मैंने ये सीखा कि पुरुषों से ये बात छुपाई जाती है और मुझे भी छुपानी चाहिए।

खैर मैं धीरे धीरे बड़ी हो रही थी और जब दसवी कक्षा में आई तब बायोलॉजी की किताब में Menstruation पढ़ कर जाना कि पीरियड्स क्यों और कैसे होते हैं। और एक दिन जब मम्मी की पीरियड्स से जुड़ी जानकारी जानने के लिये उनसे इसका कारण पूछा तो बोलीं कि यह हमारे शरीर की सफाई का एक तरीका है। यह गंदा खून होता है जो शरीर से बाहर निकलता है। जब मैंने उन्हें इसका असली कारण बताया तो वह बोलीं कि अच्छा ठीक है। हो गया? इतना खुलने की जरूरत नहीं है। उस समय मुझे बहुत अजीब लगा कि एक औरत हुए भी मेरी माँ सेक्स और पीरियड्स पर अपनी बेटी से ही बात करने में कितना कतरा रहीं हैं।

अभी कुछ दिन पहले मैंने instagram पर Menstrual Myths से जुड़ी एक फोटो शेयर की थी तो मेरी बहन ने मुझसे कहा कि क्या ये गंदा गंदा शेयर करती रहती हो। शुभम (हमारा भाई) भी देखता होगा तो क्या सोचता होगा। जबकि मेरी बहन भी बायोलॉजी की स्टूडेंट है और फिलहाल डीयू से life sciences में ग्रैजुएशन कर रही है।

सबसे बड़ी समस्या है जागरूकता का अभाव। जिस खून को लोग अपवित्र समझते हैं वे यह क्यों नही समझते कि 9 महीने तक माँ के पेट में उसी खून से उनका विकास और पालन पोषण होता है। तो अगर पीरियड्स में निकलने वाला खून अपवित्र है तब तो अपवित्र आप हुए क्योंकि आप बने ही उसी खून से हैं।प्रकृति ने महिलाओं को जो प्रजनन क्षमता प्रदान की है पीरियड्स उसी का एक भाग है। तब इसमे कैसी अपवित्रता??

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