जानिये रैनसमवेयर क्या है, इससे कैसे बचें और प्रभावित होने पर क्या करें

Posted by Prashant Jha in GlobeScope, Hindi, Sci-Tech
May 16, 2017

हर सेकंड पहले से ज़्यादा डिजिटल होती दुनिया में अचानक एक खतरा आया और दुनियाभर के देशों में इससे खलबली मच गई। कहा जा रहा है कि 12 मई को सायबर वर्ल्ड में अबतक का सबसे बड़ा हमला हुआ। वानाक्राय (wannacry) नाम का एक रैनसमवेयर(Ransomware) तेज़ी से दुनियाभर के सायबर स्पेस में फैला। बताया जा रहा है कि इसकी शुरुआत यूरोप से हुई।

रैनसमवेयर क्या है?

रैनसमवेयर सायबर क्रिमिनल्स के द्वारा डिज़ाइन किया गया एक तरह के वायरस की कैटेगरी है। ये वायरस अगर आपके कंप्यूटर में आ जाए तो आपका अपने कंप्यूटर पर एक्सेस नहीं रह जाता, मतलब कि आपके कंप्यूटर का डेटा और सारी फाइल्स उन क्रिमिनल्स की ज़द में होगी। जैसा कि इस तरह के वायरस के नाम से ही स्पष्ट है कि अगर आपके किसी भी सिस्टम में ये वायरस आता है तो आपको आपका डेटा लौटाने के एवज़ में आपसे रैनसम यानी कि फिरौती मांगी जाती है।

रैनसमवेयर की खास बातें:

  • रैनसमवेयर से प्रभावित सिस्टम्स को अनलॉक करना लगभग नामुमकिन होता है। इसमें आपके डेटा का लैंग्वेज़ बदल दिया जाता है, जिसे खुद से डीकोड करना संभव नहीं है।
  • ये किसी भी तरह के फाइल्स वीडियो, ऑडियो, फोटो, टेक्स्ट के कोड को अपने हिसाब से बदल सकता है।
  • अगर आपका कंप्यूटर इससे प्रभावित होता है तो आपके सामने एक इमेज या मैसेज के रूप में फिरौती की रकम और फिरौती देने की अवधी डिसप्ले की जाएगी।
  • फिरौती बस बिटक्वाइन के रूप में ली जाती है, क्योंकि इसे ट्रैक करना किसी भी हाल में संभव नहीं होता।
  • रैनसमवेयर के हमले में साधारण एंटीवायरस कारगर नहीं होते।
  • ये एक सिस्टम से होते हुए लोकल नेटवर्क में जुड़े दूसरे कंप्यूटर्स में भी फैल सकता है।

कैसे होता रैनसमवेयर का हमला:

  • सबसे पहले पीड़ित को एक इमेल आता है जिसमें एक  इंफेक्टेड लिंक या अटैचमेंट होता है।
  • जैसे ही उस लिंक को क्लिक किया जाता है या अटैचमेंट डाउनलोड किया जाता है, एक डाउनलोडर उस कंप्यूटर में इंस्टॉल हो जाता है।
  • वो डाउनलोडर उस कंप्यूटर में रैनसमवेयर प्रोग्राम डाउनलोग कर देता है।
  • इसके बाद हार्ड डिस्क में मौजूद सारे डेटा को एनक्रिप्ट कर लिया जाता है या आसान शब्दों में कहें तो उन डेटा का लैंग्वेज और कोड बदल दिया जाता है।
  • और अंत में स्क्रीन पर डेटा के डीक्रिप्शन यानी की वापस आपका डेटा आपको देने के एवज़ में फिरौती कितनी कैसे और कबतक देनी है इसका एक मैसेज आता है।
  • ये सब इतनी जल्दी सेकंड भर के अंदर में हो जाता है कि कई बार लोग यकीन ही नहीं करते और उन्हें लगता है कि ये कोई मज़ाक है।
हैक होने के बाद आने वाला एक सैंपल मैसेज

रैनसमवेयर से नुकसान:

  • 97% प्रतिशत फ्रॉड ईमेल या फिशिंग ईमेल रैनसमवैयर के साथ होते हैं।
  • इससे प्रभावित 70 प्रतिशत व्यवसायिक घरानो या व्यवसायियों ने फिरौती दी है।
  • इससे प्रभावित लोगों में से महज़ 42% लोगों को अपना डेटा वापस मिला।
  • फिरौती देने वाले 4 में से 1 व्यक्ति को अपना डेटा वापस नहीं मिला।
  • फिरौती की रकम $200 से $10,000 के बीच तय की जाती है।

कैसे बचें रैनसमवेयर अटैक से:

  • अपने महत्वपूर्ण डेटा को सिर्फ अपने कंप्यूटर पर स्टोर ना करें।
  • अपने डेटा का बैकअप रखें। संभव हो तो एक्सटर्नल स्टोरेज के अलावा गूगल ड्राईव में भी डेटा स्टोर करें।
  • ऑपरेटिंग सिस्टम और सॉफ्टवेयर को अपडेटेड रखें।
  • अपने ब्राउज़र का सेक्योरिटी और प्राइवेसी सेटिंग चेक करते रहें।
  • एडब्लॉकर का इस्तेमाल करें ताकि कोई इंफेक्टेड एड का लिंक आपको नुकसान ना पहुंचाए।
  • अंजान यूज़र्स से आए स्पैम मेल कभी ना देखें।
  • स्पैम या संदिग्ध मेल से किसी भी अटैचमेंट को डाउनलोड ना करें।
  • हमेशा एक अपडेटेड एंटी वायरस का इस्तेमाल करें।

रैनसमवेयर से प्रभावित होने पर क्या करें:

फिरौती बिल्कुल ना दें। इसकी कोई गारंटी नहीं है कि फिरौती के बाद भी आपको आपका डेटा वापस लौटाया जाएगा।
ऐसे सॉफ्टवेयर्स लगातार अपडेट होते रहते हैं। इसका मतलब है कि अगली बार ये रैनसमवेयर दूसरे तरीके से आपके सिस्टम को प्रभावित करे और आपसे फिर से फिरौती मांगी जाए। यानी हमें हमेशा बचाव के लिए कदम उठाने चाहिए ना कि फिरौती देकर पीछा छुड़ाने के।
इस प्रकार के वायरस और सॉफ्टवेयर्स ने गैरकानूनी तरीके से फिरौती और वसूली को एक वैश्विक व्यापार बना दिया है। लेकिन थोड़ी सी सावधानी बरत के इसका बखूबी मुकाबला किया जा सकता है।

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