अदालत का फैसला की ब्लू स्टार के समय कोई चेतवानी नही दी गयी.

Self-Published

1984 और 2017 के बीच यु तो सिर्फ 33 साल का फर्क है लेकिन सही शब्दो में कहा जाये तो वास्तव में इस समय काल में इतना बदलाव आ गया है कि समाज और दुनिया का चेहरा ही बदल गया है, व्यक्तिगत रूप से भी 33 साल का समय काल एक पूरी जिंदगी को परिभाषित करने के लिये काफी है, लेकिन एक अदालती फैसला जो की ब्लू स्टार घटना कर्म के 33 साल बाद आया है उसने कई तथ्यों का एक बार फिर से सोचने को मजबूर कर दिया है कि क्या ब्लू स्टार के दरम्यान सब कुछ ठीक था ? क्या यहाँ सुरक्षा बलों ने सारे माप दंडों का सही से पालन किया था ?

हाल ही के दिनों में अमृतसर की एक लोकल अदालत ने अपने फैसले में ये माना है कि ब्लू स्टार के शुरू होने से पहले कोई चेतावनी जारी नहीं की थी जिसे गुरुद्वारा हरमिंदर साहिब में मौजूद श्रद्धालु और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधनक कमीटी के कर्मचारियों को बाहर निकलने का मौका मिल सकता. ब्लू स्टार यु तो 3 जून से अपनी तैयारियों में जुट गया था लेकिन सुरक्षा बलों ने 1 जून  से ही मोरचों पर अपनी उपस्थति दर्ज करवा दी थी और 2 जून शाम तक पूरे अमृतसर शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया था और 3 जून से लगभग अगले चार पांच दिनों तक पंजाब में एक तरह से सन्नाटा छा गया था, ट्रांसपोर्ट सिस्टम पूरी तरह से चरमरा गयी थी या रोक दी गयी थी, फोन लाइन बंद कर दी गयी थी वही किसी भी अखबार के रिपोर्टर

की यहाँ मौजूदगी सरकार को कबूल नहीं थी और ऑपरेशन के बाद उसी खबर को छापा गया और फोटो प्रकाशित किये गये जिसे सुरक्षा बलों द्वारा दिया गया था, मसलन पूरे ब्लू स्टार ऑपरेशन के दरम्यान किसी भी मीडिया का कवरेज नही था, ऐसे मैंने इस तथ्य पर मोहर लगा दी गयी की इस कार्यवाही के पहले सुरक्षा बलों द्वारा चेतावनी दी गयी थी.

लेकिन अदालत के इस फैसले में जज गुलबीर सिंह ने इस तथ्य पर कई सवाल उठाये है की सिविल ऑथोरिटी के पास कोई ऐसी लिखित दस्तावेज नहीं है जँहा से जानकारी मिल पाये की यहाँ श्रद्धालुयों को किसी भी तरह की चेतावनी दी गयी थी, वही अदालत ने ये भी कहाँ है कि ऐसी किसी वाहन के लोग की जानकारी नहीं मिलती जिसे इस तरह की चेतावनी देने हेतु इस्तेमाल किया गया था, यँहा अदालत ने इन्ही सभी तथ्यों के आधार पर ये फैसला दिया है कि ब्लू स्टार के पहले किसी भी तरह की चेतावनी नही गी थी, लिहाजा इस ऑपरेशन में बंदी बनाये गये 40 सिख की गिरफ्तारी को भी गेर क़ानूनी ऐलान कर दिया है वही इन्हे मुआवजे के तौर पर एक निर्धारित राशी देने का आदेश केंद्र और राज्य सरकार को दिया है, यँहा इस आदेश से एक तथ्य तो सामने आ ही रहा है कि ब्लू स्टार के दरम्यान सब कुछ ठीक नही था.

ब्लू स्टार के दरम्यान, सिर्फ एक रिपोर्टर ब्रह्मा चेलानी चोरी छुपकर अमृतसर से रिपोर्टिंग करने में कामयाब रहा था जो उस समय वायर सर्विस एसोसिएटेड प्रेस के कोरेस्पोंडेंट थे, इनकी रिपोर्ट को कई विदेशी अखबारों ने मुख्य पृष्ठ पर छापा था जँहा ब्लू स्टार ऑपरेशन के वक़्त मारे गये सुरक्षा बल सेनानी, भिंडरावाले से जुड़े चरमपंथी और सामान्य सिख श्रद्धालुयों, कुल 1200 के करीबन मोत का आंकड़ा पेश किया गया है वही इनकी रिपोर्ट में पोस्ट मार्टम या मेडिकल सोर्स के हवाले से ये भी कहा गया कि इनमे कई ऐसे सिख नोजवान की लाशे बरामद हुई है जिनकी मोत गोली लगने से हुई थी वही इनके हाथों को पीठ के पीछे बाँध कर रखा गया था. कुछ इसी तरह का बयान भूतपूर्व सासंद बलवंत सिंह रामूवालिया ने भी दिया है कि किस तरह उनके सामने निहत्थे सिख समुदाय के नोजवानो को एक सुरक्षा बल के अफसर द्वारा गोली मारकर मार दिया गया.

इसी सिलसिले में पत्रकार कंवर संधू के एक लड़ी बंध प्रोग्राम में ब्लूस्टार की सभी परतों को बड़ी ईमानदारी से खोला गया है, यँहा बहुत से लोगो के इंटरव्यू के अंश भी मौजूद है जो किसी ना किसी वजह से ऑपरेशन ब्लू स्टार के साथ जुड़े थे और यँहा उन तथ्यों को भी उजागर किया गया है जो पंजाब की राजनीति में मौजूद थे और कही ना कही ये भी एक कारण बन कर उभरे ऑपरेशन ब्लू स्टार के वजूद में आने के एवं ये भी बताया गया है कि किस तरह लाशो को उठाया गया और इनके पोस्ट मार्टम करवाये गये.

आनंदपुर मता, जिसे पहले शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब राज्य के हितों के लिये अपनी मांगों को रखा था और बाद में इसे जरनैल सिंह भिंडरावाले ने अकाली दल के साथ सयुंक्त रूप से अपनाया था, इसे मनवाने के लिये जेल भरो आंदोलन के तहत रोजाना कुछ 40-50 सिख कार्यकर्ताओ का सगठन अपनी गिरफ्तारी देता था, ये सिलसिला काफी महीनों तक चला था और जून 1984 के शुरुवाती दिनों में भी ये बदस्तूर जारी था, लेकिन कब इसे आंदोलन को ख़ालिस्तान का नाम दे दिया शायद ये सिख समुदाय और राजनीति को पता भी नहीं चला और जब बात देश की सुरक्षा की आ जाये तो सरकार द्वारा कोई भी उठाया गया क़दम कैसे निदनीय हो सकता है, ब्लू स्टार को आज इसी सुरक्षा कवच के कफ़न में लपेट कर शांत कर दिया गया है जँहा आप कोई सवाल नही पूछ सकते, आज जरूरत है कि इसकी कब्र को एक बार फिर से खोला जाये और उन तथ्यों की जांच परख पूरी ईमानदारी से की जाये जो राज ब्लू स्टार के सीने में दफन हाउ शायद तभी ही ब्लू स्टार के दरम्यान मारे गये बेकसूर लोगों को सही मायनों में न्याय मिल सके.

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