आप असहमत हो सकते हैं पर मॉब लिंचिंग के मुद्दे को खारिज नहीं कर सकते

Posted by Shashank Chandra in Hindi, News
June 30, 2017

मॉब लिंचिंग यानी भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दिया जाना। माफ़ करना, हिंदी अर्थ इसलिए बता रहा हूं क्यूंकि देश भर में हुए #NotInMyName प्रदर्शन के भाषा पर कुछ लोगों को आपत्ती है। आपत्ती दर्ज कराने वाले लोगों(बता दें, ये लोग इस प्रदर्शन में शामिल नहीं थें) के मुताबिक इस प्रदर्शन में सिर्फ अंग्रेजी बकने वाले ‘एलीट’ लोग गए थें।

केवल एलीट लोगों का शामिल होने और अंग्रेज़ी में भाषण दिये जाने पर ही आपत्ति नहीं है। पहले तो लोग इस बात पर राज़ी ही नहीं हो रहे थे कि मॉब लिंचिंग का शिकार देश के मुसलमान हो रहे हैं। ये इन घटनाओं को महज़ खराब “लॉ एंड ऑडर” का मामला बताते रहें। बहुत लोग शायद अब भी यह मानने को तैयार नहीं कि जुनैद और पत्रकार बासित को उनके नाम और धर्म के आधार पर मारा गया। जुनैद की नमाज़ी टोपी फेक दी गई। जुनैद पिटाई के वजह से मर गया। पत्रकार बासित के आधार कार्ड पर नाम देखकर उनको पीटा गया।

फिर इनलोगों ने डाटा यानी आकंड़े मांगे। आप कैसे कह रहे हैं कि मुसलमानों पर टार्गेटेड लिंचिंग बढ़ा है, आंकड़े दिखाइए तब मानेंगे। तुरंत India spend ने अपने एक लेख में डाटा प्रकाशित कर दिया। लेख के अनुसार पिछले साल कुल 25 मामले सामने आए और इस साल अभी तक 20 आ गए हैं। आप लेख पढ़कर और भी जानकारी ले सकते हैं। आंकड़े देखकर भी लोग ये सवाल करने लगे कि बस इतने मामले पर हो हल्ला कर रहे हो। जनाब, आप क्या चाहते हैं, कि जब 25 के बजाय 250 या 2500 मारे जाए तब प्रदर्शन हो।

अब यही लोग अंग्रेज़ी में हुए भाषणों पर अपना बंदूक ताने हुए हैं। सोशल मीडिया पर हुए आह्वान पर एक साथ देश के 12 राज्यों में और विदेश में 2 जगहों पर लोगों ने अपना विरोध दर्ज कराया। भाषा और बोली से कोई फर्क नहीं पड़ता है।
दरअसल, इनलोगों को सबकुछ एक फिक्स्ड फ्रेम में देखना पसंद है। ये वही लोग हैं जो तमिल किसानों को बिसलेरी की पानी पीने पर उनको किसान मानने से इनकार कर रहे थे। मंदसौर के किसानों को जींस पहने हुए देखकर ये लोग किसान नहीं मानते उन्हे। भला बताइये कौन इतना स्टिरियोटाइप बनाता है किसान के लिए। अब ये लोग प्रदर्शन करने आए लोग को भी स्टिरियोटाइप में देख रहे।

खैर, इनको जो स्टिरीयोटाइप बनाना है बनाने दीजिए, हम लोग अपना प्रदर्शन करते रहेंगे। इन लोगों से बस इतना कहना है कि आप disagree भले हों पर आप इस मुद्दे को deny मत करिए।

हमारा दिल रोता है, गुस्सा आता है जब भी कोई कहीं भी भीड़ का शिकार बनता है। आपको ये सब नहीं महसूस होता इसलिए आप मूक समर्थक हो गए हैं। आप लोग,जो इस मुहिम के विरोध कर रहें, आप निश्चिंत रहे। हम आप पर हुए भीड़ के हमले के खिलाफ भी प्रदर्शन करेंगे, तब हम आंकड़े की डिमांड नहीं करेंगे।

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