आज उस लेफ्टिनेंट का जन्म दिन है जिसे सिर्फ और सिर्फ परमवीर चक्र ही चाहिए था.

Posted by Shamikh Faraz
June 25, 2017

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आज ही के दिन पैदा हुए थे कारगिल शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डेय जिन्हें सिर्फ परमवीर चक्र ही चाहिए था और कुछ भी नहीं . NDA (राष्ट्रीय रक्षा अकादमी) में सिलेक्शन के लिए हर अफसर को एक निबंध लिखना  होता है. जहा पर दूसरे ऑफिसर्स ने लिखा कि उनको  जनरल बनना है या विदेश में पोस्टिंग चाहिए. वही पर मनोज पांडेय ने लिखा कि  उन्हें सिर्फ और सिर्फ परमवीर चक्र ही चाहिए है ।
शहीद मनोज कुमार पाण्डेय का जन्म लखनऊ से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर सीतापुर जिले में कमलापुर के पास एक छोटे से गाँव में 25 जून 1975 को हुआ था. राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में  उन्हें 6 जून 1997 को कमीशन मिला। 11 गोरखा राइफल में कमीशन मिलने के बाद पहली पोस्टिंग ही श्रीनगर में मिली जोकि आतंकवादियों की गतिविधियों के हिसाब से भारत का सबसे अधिक संवेदनशील इलाका था

कारगिल जंग के दौरान मनोज पांडेय की यूनिट सियाचिन से  लौटी थी और उन्हें जंग पर भेजा भी नहीं जा रहा था. उन्होंने खुद ही जंग पर जाने के लिए अपना नाम  अपने सीनियर ऑफिसर्स को भेजा.  उनकी इस ज़िंदादिली को देखते हुए उन्हें लेफ्टिनेंट से प्रमोट करके कैप्टेन बना दिया गया.

2 जुलाई 1999 की रात है. कैप्टन मनोज कुमार पाण्डेय और उनकी यूनिट एक-एक कर दुश्मनों का सफाया करते हुए कारगिल की एक चोटी खालूबार पर पहुँच रहे हैं और दुश्मनों के साथ लड़ते हुए  खालूबार के पास तीन बंकरों को दुश्मन से खाली करवाते है. लेकिन इसी दरम्यान उन्हें घुटने और कंधे में गोलियां लगती है. तब भी उनकी गन नहीं रूकती है और न वह इलाज के लिए वापस जाने जैसा कुछ सोचते है. वह  खालूबर के आखिरी बंकर को खाली करवाने के लिए आगे बढ़ते है, तभी एक गोली आकर उनके सीने में लगती है. और 3 जुलाई 1999 को 24  साल की उम्र में अपनी वीर गाथाएं छोड़ कर इस देश को अलविदा कह देते है.
मनोज पांडेय का आखिरी खत
मनोज पांडेय का आखिरी खत
इन्हे (मरणोपरान्त ) 15 अगस्त 1999 को परमवीर चक्र से नवाज़ा गया.  कारगिल के शहीदो को मेरा सलाम.

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