इप्टा कोंच द्वारा आयोजित कार्यशाला 2017 का प्रस्तुतिकरण एवं सम्मान समारोह सम्पन्न

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– 21 जून 2017- ‘‘आज का समाज अपनी संस्कृति से दूर हो रहा है, अपने लोक से दूर हो रहा है। लोक से कटकर इंसान मशीन हो जाता है। भोगवादी प्रवृत्ति और धनसंग्रह के कारण आज समाज में अनेकों विकृतियां फैल रही है। सामाजिक कुरीतियों को केन्द्रित कर बाल रंगकर्मियों द्वारा अपने नाटकों का जो प्रस्तुतिकरण किया गया है, वह सराहनीय है। रंगकर्म समाज के कुहासा को दूर करने का काम करता है। जब तक समाज में साहित्य और कलायें जिन्दा है, उनको प्रश्रय दिया जायेगा, तब तक समाज में संवेदनायें जिन्दा रहेगी।’’उपरोक्त विचार ‘‘स्व. टी. डी. वैद स्मृति रंगमंच स्थल’’( अमर चन्द्र महेश्वरी इण्टर काॅलेज कोंच) में भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) कोंच इकाई द्वारा इप्टा कोंच के संस्थापक संरक्षक कामरेड टी. डी. वैद की स्मृति में आयोजित ‘‘17वीं ग्रीष्मकालीन निःशुल्क बाल एवं युवा रंगकर्मी नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला’’ के प्रस्तुतिकरण एवं सम्मान

के अवसर पर कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रुप में सम्बोधित करते हुए उत्तर प्रदेश शासन के राज्य मन्त्री व उत्तर प्रदेश बौद्ध आयोग के उपाध्यक्ष हरगोविन्द कुशवाहा ने व्यक्त किये। लोकसंस्कृति मर्मज्ञ मुख्य अतिथि हरगोविन्द कुशवाहा ने कहा कि बुन्देली लोक संस्कृति में नैतिकता, सदाचार, मानवीयता, स्त्री सम्मान आदि की भरमार है। बुन्देलखण्ड का प्रत्येक त्योहार लोगों को मानवीय मूल्यों की सीख देता है। उन्होंनें बुन्देली संस्कृति के गीतों का उद्धरण देते आम जनमानस का मन मोह लिया। उन्होंनें रंगकर्मियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि आज के छोटे बच्चे, जब भविष्य के नागरिक बनेंगें, तो वे इप्टा द्वारा सीखे गऐ मानवीय मूल्यों के माध्यम से एक बेहतर समाज बनाने की प्रक्रिया में अपनी-अपनी भूमिकाओं का निर्वहन करेंगें। कार्यक्रम को मुख्य वक्ता के रुप में सम्बोधित करते हुए प्रख्यात फिल्म अभिनेता व टी. वी. कलाकार आरिफ शहडोली ने कहा कि इप्टा कोंच के रंगकर्मियों के स्वाभाविक अभिनय ने व्यवसायिक अभिनेताओं को पीछे छोड दिया है। उन्होंनंे कहा कि इप्टा के शिविरों के माध्यम से बच्चों की प्रतिभा प्रदर्शित होती है और उनमें आत्मविश्वास बढने के साथ उनमें मानवीय मूल्यों का विकास होता है। उन्होंनें अभिभावकों का आव्हान किया कि वे अपने बच्चों की प्रतिभाओं का दमन न करें, बच्चे जो बनना चाहते हैं, उन्हें उनकी क्षमताओं के हिसाब से वैसा बनने के लिए पे्ररित करें व उनकी प्रगति में सहायक हों। फिल्म अभिनेता शहडोली ने कहा कि बुन्देलखण्ड में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, मगर उन्हें परिवार व समाज के स्तर पर प्रोत्साहन नहीं मिलता, फलतः वे गुमनामी के अंधेरें में खो जाती है। समारोह को सम्बोधित करते हुए इप्टा की राष्ट्रीय कार्य समिति सदस्य डाॅ0 सतीश चन्द्र शर्मा ने कहा कि हम उस परम्परा के वारिस हैं, जो कबीर, बुद्ध, अम्बेडकर, माक्र्स, मंगल पाण्डे, भगतसिंह की परम्परा है। ये सभी महापुरुष इंसानियत, समानता और लोगों की बराबरी के अधिकार के लिए जिये और मरे। उन्होनंें कहा कि रंगकर्म अपने आप में बडी ही सशक्त विधा है तथा इप्टा एक जन आन्दोलन है, जिसमें समाज के प्रत्येक मेहनतकश और ईमानदार व्यक्ति को जुड़ना चाहिए। एक रंगकर्मी को कभी भी संघर्ष से पीछे नहीं हटना चाहिए। इप्टा की आवाज आम जनता की आवाज है। उन्होंनें कहा कि इप्टा का इतिहास भारत के सांस्कृतिक आन्दोलन का इतिहास है, जिसका जन्म बंगाल के अकाल की कोख से हुआ। इप्टा का नामकरण देश के मशहूर वैज्ञानिक डाॅ0 होमी जहांगीर भाभा द्वारा किया गया था, उस दौर में सरोजनी नायडूू, रविशंकर, पृथ्वीराज कपूर, कैफी आजमी, अली सरदार जाफरी, शंकर शैलेन्द्र जैसे कलाकार इप्टा से जुडे थे। उन्होंनें कहा कि इप्टा ने लोगों के स्वरों को जिन्दगी के सुरों से बांधा है। जिस प्रकार बंगाल के अकाल के समय मुनाफाखोर वस्तुओं को संग्रहित कर कृत्रिम अकाल की स्थितियों को पैदा कर  रहे थे, उसी प्रकार के हालात आज देश में बन रहे हैं। कार्यक्रम को विशिष्ट अतिथि के रुप में सम्बोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार व यू. पी. इलेक्शन वाॅच के संयोजक अनिल शर्मा ने कहा कि आज का समाज दोहरे चरित्र का समाज है, जो मौका बदलते ही अपना चेहरा, चाल और चरित्र बदल लेता है। आज भी लोग अच्छे व्यक्ति का सम्मान करते हैं। हमें अच्छा बनना है तो बच्चों से सीखना चाहिए। रंगकर्मियों द्वारा दिखाये गये नाटकों ने समाज की स्थिति का चित्रण किया है, जो वास्तव में हमारे समाज में घटित हो रहा है, वहीं नाटकों में दिखाया जा रहा है। हमें चाहिये कि हम सब मिलकर मानवीय समाज की स्थापना हेतु प्रयास करें। इप्टा नाट्य कार्यशाला प्रस्तुति समारोह के कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए इप्टा कोंच के संरक्षक अनिल वैद ऐडवोकेट ने कहा कि इप्टा द्वारा आयोजित कार्यशालाओं के माध्यम से बच्चे मानवीय गुणों को सीखते हैं और आपसी भाईचारा व सौहार्द से मिलकर रहना सीखते हैं। संस्कृति कर्म के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन करने का नाम ही इप्टा है। इप्टा हमें जीवन जीने की कला सिखाती है। उन्होंनें अभिभावकों का आव्हान किया कि वे वर्ष पर्यन्त अपने बच्चों को इप्टा के नाटकों से जोडें, ताकि उनमें सामाजिकता के गुणों का विकास हो सके।कार्यक्रम को जिला पंचायत अध्यक्ष जालौन प्रतिनिधि देवेन्द्र सिंह निरंजन, उरई इप्टा के महासचिव राज पप्पन, जल जन जोडो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह, पुलिस क्षेत्राधिकारी, कोंच नवीन नायक, श्री अमरचन्द्र महेश्वरी इ. का. कोंच के प्रबन्धक सरनाम सिंह यादव आदि ने भी सम्बोधित किया।  नाट्य कार्यशाला 2017 के समापन अवसर पर इप्टा कोंच द्वारा नाट्य लेखन, नाट्य निर्देशन, रंगकर्म और समाजसेवा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से घोषित सम्मान अलंकरण समारोह भी आयोजित किया गया, जिसमें इप्टा कोंच के संरक्षक काम. टी0 डी0 वैद स्मृति जनसंस्कृति सम्मान डा. सतीशचन्द्र शर्मा को, इप्टा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव प्रो0 जीतेन्द्र रघुवंशी स्मृति नाट्य लेखन सम्मान रंगकर्मी राज पप्पन को, अभिनेता जुगलकिशोर स्मृति नाट्य निर्देशक सम्मान नीरज सेन व सत्यपाल सिंह को, सुर सामाग्री डाॅ0 वीणा श्रीवास्तव स्मृति संगीत सम्मान शम्भू पटेल को, श्रीमती शान्ति देवी जैन स्मृति समाजसेवी सम्मान जल जन जोडो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह को, कु0 मिताली दुबे स्मृति रंगकर्मी सम्मान मिर्जा शफकत बेग (ईसा) को तथा जीतआनन्द ‘‘जीत’’ कुशवाहा स्मृति रंगकर्मी सम्मान राजेश राठौर (अंकुर) को अतिथियों द्वारा प्रदान किया गया। रंगकर्मियों के प्रोत्साहन हेतु इप्टा कोंच के संरक्षक अनिल वैद ऐडवोकेट ने अपने पिता कामरेड टी. डी. वैद की स्मृति में कामरेड टी. डी. वैद स्मृति श्रेष्ठ रंगकर्मी सम्मान व एक-एक हजार रुपये का पुरस्कार रंगकर्मी कोमल अहिरवार, शाहना खान, राज शर्मा, कन्हैया लाक्ष्कार, समीक्षा झां व रानी कुशवाहा को प्रदान किये गये। इस अवसर पर समस्त रंगकर्मियों व कार्यशाला प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र व स्मृति चिन्ह समस्त अतिथियों द्वारा प्रदान किये गये। अतिथियों को स्मृतिचिन्ह इप्टा कोंच इकाई संरक्षक अनिल वैद, डाॅ0 मुहम्मद नईम, सौरभ मिश्रा, भास्कर गुप्ता, राशिद अली, रामकिशोर कुशवाहा, पारसमणि अग्रवाल, संस्कृति गिरवासिया, .ऋचा गर्ग आदि द्वारा भेंट किये गये। जबकि प्रशिक्षकों नीरज सेन को वंशिका, सत्यपाल सिंह को पलक सोनी द्वारा, संजय सतोइया को पूर्वी द्वारा, संस्कृति गिरवासिया को शैलजा द्वारा, सागर व्यास को प्रगति द्वारा, पुष्पेन्द्र सिंह को राजू यादव द्वारा, श्लोक दुबे को राज शर्मा द्वारा, शम्भू पटेल को कन्हैया लाक्ष्कार द्वारा, गोविन्दप्रसाद जी को अमन अग्रवाल द्वारा, मंगलदास को शिवानी सोनी द्वारा, ऋचा गर्ग को मुस्कान द्वारा , नन्द कुमार (नन्दू) को इशरत द्वारा स्मृति चिन्ह व सम्मान पत्र भेंट किये गये। नाट्य कार्यशाला 2017 के प्रस्तुतिकरण समारोह का आगाज रंगकर्मियों द्वारा प्रस्तुत इप्टा गीत ‘‘बजा नगाडा शान्ति का, शान्ति का, शान्ति का’’ से हुआ, तत्पश्चात् समस्त अतिथियों द्वारा इप्टा कोंच के संस्थापक संरक्षक स्व. श्री टी. डी. वैद जी के चित्र पर माल्यार्पण किया गया व द्वीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। तत्पश्चात अनिल वैद, सौरभ मिश्रा, राशिद अली, भास्कर गुप्ता, रामकिशोर कुशवाहा, संस्कृति गिरवासिया, पारसमणि अग्रवाल, ऋचा गर्ग, सत्यपाल सिंह, संजय सतोइया, सागर व्यास, नीरज सेन, ट्रिंकल राठौर, पुष्पेन्द्र सिंह, श्लोक दुबे, अमन सोनी, इकरा, शम्भू पटेल, राजेश राठौर, ईसा, कोमल अहिरवार, रानी, शाहना, समीक्षा झां, तययबा, मानसी, वरदान गुप्ता, आदर्श अहिरवार आदि द्वारा अतिथियों का बैच अलंकरण किया गया। तत्पश्चात इप्टा के प्रान्तीय सचिव व इप्टा कोंच के संस्थापक अध्यक्ष डाॅ0 मुहम्मद नईम द्वारा कोंच में इप्टा की स्थापना व प्रगति में संस्थापक संरक्षक कामरेड टी. डी. वैद के योगदान पर प्रकाश डालते हुए समस्त अतिथियों का परिचय कराया। कार्यक्रम का समापन गीत ‘‘आजादी ही आजादी’’ के गायन द्वारा किया गया। कार्यक्रम में इलाहाबाद हाईकोर्ट के शासकीय अधिवक्ता वीरेन्द्र प्रताप सिंह, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र नेता राम तिवारी, पूर्व बार संघ अध्यक्ष सन्तलाल अग्रवाल, विनोद अग्निहोत्री, पे्रसक्लब अध्यक्ष प्रियाशरण नगाइच, डाॅ. हरिमोहन गुप्ता, नरेन्द्र मोहन मित्र, कढोरे लाल यादव,  शाहिद अजनबी, राधेकृष्ण श्रीवास्तव, आशुतोष हूंका, मुईनउद्दीन अजमेरी, श्रीकान्त गुप्ता, वीरेन्द्र त्रिपाठी, अतुल शर्मा, क्षेत्रीय संासद प्रतिनिधि अनिरुद्ध मिश्रा, रामशरण कुशवाहा, आदित्य वैद, धर्मेन्द्र गोस्वामी, उरई इप्टा के डाॅ. धर्मेन्द्र वर्मा, संजीव गुप्ता, अमजद आलम, राम गुप्ता, दीपेन्द्र कुमार, धनीराम सहित सैंकडों की संख्या में दर्शक, अभिभावक व नाट्य पे्रमी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन इप्टा कोंच के संस्थापक अध्यक्ष व प्रान्तीय सचिव डाॅ0 मुहम्मद नईम ने किया। सहयोग सौरभ मिश्रा व पारसमणि अग्रवाल ने किया। कार्यशाला प्रस्तुति समारोह में इप्टा गीत के बाद स्वागत गीत, ‘‘सुनी जो उनके आने की आहट गरीबखाना सजाया हमने’’ रंगकर्मियों शाहना खान, रानी, कोमल, ईसा, तययबा ने,  स्व. श्री टी. डी. वैद जी को श्रद्धांजलि गीत ‘‘चिट्ठी न कोई संदेश, न जाने कौन से देश, कहां तुम चले गये’’ अमन सोनी द्वारा, गीत ‘‘हर तरफ, हर जगह, हर कहीं पे है, हां उसी का नूर’’, शाहना खान, रानी, कोमल, ईसा, तययबा द्वारा, नाटक राम राम हरि बोल में रंगकर्मियों प्रमथ बाजपेई, अमन खान, दानिश, वैष्णवी, सौम्या, अश्विनी, अमन कुशवाहा, पीयूष राठौर,, हनी, स्नेहा उदैनिया, शिवानी, कैफ, रणवीर सिंह, प्रखर, ऋतिक, आर्यन, नैतिक, कंदर्प, हर्षित, यशी, खुशी, मुईन, माही आदि द्वारा साम्प्रदायिक की समस्या को उठाते हुए कौमी एकता का संदेश दिया। जनगीत, ‘‘हम मेहनत करने वाले सब एक हैं’’ रंगकर्मियों  शिवानी, इशरत, ऋतिका, मानसी, आदर्श, राज, इकरा, समीक्षा, वंशिका, प्रगति, मुस्कान, काजल द्वारा प्रस्तुत किया गया, जबकि नाटक ‘‘चोरो का राज’’ में रंगकर्मियों ईसा, तययबा, राजेश राठौर, अमन कुशवाहा, कन्हैया लाक्ष्कार, अमनसोनी, निश्चय अग्रवाल, कुमकुम, शिप्रा द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंनें समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार की समस्या पर करारा व्यंग्य किया। जन गीत ‘‘बोल मेरे रामा, बता मोरे अल्ला, कहां गया नमक तेल, कहां गया गल्ला’’ रंगकर्मियों इशरत, ऋतिका, मानसी, इकरा, समीक्षा, वंशिका, पलक, शाजमीन, शैलजा, प्रगति, मुस्कान, काजल द्वारा प्रस्तुत किया गया। नाटक ‘‘कहां सुरक्षित हैं हम’’ रंगकर्मी आदर्श, ईसा, शैलजा, वंशिका, पलक सोनी, शाजमीन, स्नेहा, पूर्वी द्वारा बलात्कार जैसे मुद्दे पर आम जनमानस को सोचने पर विवश कर दिया। गीत ‘‘या मौला तेरी क्या बात है’’ रंगकर्मी रानी, कोमल, ईसा, शाहना, तययबा द्वारा प्रस्तुत किया गया। नाटक ‘‘जुलूस’’ रंगकर्मी राज शर्मा, अमन अग्रवाल, शिवम, वरदान गुप्ता, कन्हैया लाक्ष्कार, रुपाली, कार्तिकेय, विमल वर्मा, दिव्या, सुमित, इशरत, ऋतिका, मानसी, इकरा, प्रगति, मुस्कान, काजल, राघव कुशवाहा द्वारा मंचन कर दर्शकों को तालियां बजाने पर विवश कर दिया। नाटक ‘‘किस्सा अजनबी लाश का’’ रंगकर्मी विष्णु राय, शाहना खान, समीक्षा झां, रानी, कोमल, राजू यादव, ट्रिंकल राठौर, राजेश राठौर, प्रमथ बाजपेई, कन्हैया लाक्ष्कार, अमन अग्रवाल, वरदान गुप्ता, शिवम् द्वारा किया गया। आभार अनिल वैद द्वारा व्यक्त किया गया।

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