उत्तर प्रदेश में बदहाल मिनी सचिवालय

Posted by rishi0404
June 5, 2017

Self-Published

ग्राम पंचायत के विकास की रूपरेखा तय करने के लिए उत्तर प्रदेश शासन की ओर से बनाये गए मिनी सचिवालय बदहाली का शिकार हो गए है गांव के लोगों को जरूरी कागजातों के लिए ब्लाक का चक्कर न लगाना पड़े, इसके लिए सभी ग्राम पंचायतों में लाखों खर्च करके पंचायत भवन का निर्माण कराया गया। बावजूद इसके जनप्रतिनिधियों की स्वार्थपरता एवं सरकारी मुलाजिमों की मनमानीने शासन की मंशा पर ही पानी फेर दिया। मिनी सचिवालय के नाम से पहचाने जाने वाले पंचायत भवन रखरखाव के अभाव में अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं। शासन की मंशा थी कि प्रत्येक गांव में एक सचिवालय भवन हो, जहां ग्राम पंचायत से संबंधित सभी दस्तावेज उपलब्ध रहें। गांववालों को निवास, जाति व कुटुंब रजिस्टर की नकल, खसरा, खतौनी, जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र, राशन कार्ड जैसेदस्तावेज आसानी से मिल सकें। इसके लिए ग्राम सेक्रेटरी, लेखपाल,स्वास्थ्यकर्मी, पंचायत मित्र सहित संबंधित कर्मचारी की उपस्थिति भीअनिवार्य कर दी गई।

शासन की सोच थी कि ग्राम पंचायत की बैठकें भी संसद भवन की तरह ग्रामीणों के बीच खुले कमरे में होगी। लोग गांव के चहुमुखी विकास पर अपना नजरिया सबके समक्ष रखेंगे और जो सबसे उचित निर्णय होगा, उस पर कार्य होगा। बावजूद इसके जनप्रतिनिधि अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए ऐसा नहीं होने दिए।आठ वर्ष पूर्व लाखों रुपये की लागत से बना मिनी सचिवालय रख रखाव के अभाव में महज चंद दिनों में ही खंडहर में तब्दील हो गया है। अब यह भवन क्षतिग्रस्त होने के साथ-साथ झाड़ियों से घिर गया है। भवन के खिड़की दरवाजे भी गायब हो चुके हैं। अब यह मिनी सचिवालय आवारा पशुओं के साथ ही चोरों के छिपने का स्थान बन गया है। सरकार की योजना थी कि गांव के लोगों को सारा काम मिनी सचिवालय से ही पूरा हो जाएगा तथा लोगों को ब्लाक व तहसील का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।

 

 

बदहाल मिनी सचिवालय

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