कौर की मौत.

Self-Published

साल 2016 के आखिर के महीनो में पंजाब का एक छोटा सा कस्बा तलवंडी-साबोकी, अचानक से खबरों की सुर्खियों में आ गया था, यँहा एक बारात के स्वागत में हो रहे एक कार्यक्रम में स्टेज पर डांस कर रही डांसर कुलविंदर कौर को एक बाराती ने गोली मार दी थी, ( https://www.youthkiawaaz.com/2016/12/firing-in-indian-weddings/) विवाह की हो रही वीडियो रिकॉर्डिंग और निजी।तौर पर की जा रही मोबाइल रिकॉर्डिंग में इस घटना।को कैद कर लिया था यहाँ शादी में शराब परोसी जा रही थी, बाराती नशे में थे और एक गर्भवती महिला की लाश स्टेज पर खून से लथपथ बेजान पड़ी थी, वही साल 2012 अमृतसर शहर में हुये एक हत्याकांड ने पूरे देश को दहला दिया था, सबइंस्पेक्टर रविंदरपाल सिंह की दिन दिहाड़े बीच शहर में गोली मार दी गयी थी इनका कसूर इतना ही था की ये अपनी बेटी के साथ की जा रही बतमीजी का विरोध दर्ज करवा रहे थे, कातिल की पहचान रणजीत सिंह राणा के रूप में की गयी जो उस समय सत्ता रूढ़ राजनीतिक पार्टी शिरोमणी अकाली दल बादल का सदस्य था. इन दोनों ही घटना कर्म में हथियार, नशा शामिल थे, कही भी कानून का कोई ड़र नही था वही पीड़ित एक सामान्य महिला ही थी, कही वो डांसर थी जिसका कत्ल हुआ और कही वह विद्यार्थी जिसके साथ की जा रही छेड़छाड़ का विरोध की कीमत अपने पिता की जान को खोकर चुकानी पड़ी थी, (http://www.tribuneindia.com/2012/20121206/main2.htm)

लेकिन कुछ चंद रोज पहले अमनप्रीत कौर की लाश भी एक पुलिस स्टेशन में छत से लटकती हुई पाई गयी, पहली नजर में ये ख़ुदकुशी लगती है लेकिन अमनप्रीत कौर एक पुलिस कांस्टेबल थी, अमूमन एक पुलिस अधिकारी का मनोबल एक आम नागरिक से कही ज्यादा होता है ऐसे में रात के वक़्त, एक पुलिस स्टेशन में घटीत ये घटना अपने पीछे कई निशान और सवाल।छोड़ रही है जो सबसे गंभीर सवाल है कि आज एक ओरत बतोर पुलिस कर्मचारी पुलिस स्टेशन में भी महफूज नहीं है ? और अगर ये ख़ुदकुशी है तो ऐसे।क्या हालात थे जिसके चलते कौर को ये कदम उठाना पड़ा, वह भी पुलिस स्टेशन में, कही इसकी निशान देही ये तो नहीं की हमारा समाज ओरत के प्रति इतना खोखला हो गया है की आज एक औरत, समाज में बढ़ रही बदसूलकी की घटना से परेशान अपने अश्तित्व को ही खत्म करने के लिये मजबूर हो रही है.

क़स्बा जोधा, ये रायकोट से लुधियाना जाते हुये रास्ते में आता है, मसलन सड़क के दोनों तरफ 1 किलोमीटर तक फैला हुआ एक कस्बा या मंडी कह सकते है, यँहा से भारत की आजादी में सबसे कम उम्र के शहीद करतार सिंह सराभा (https://www.youthkiawaaz.com/2017/02/kartar-singh-sarabha-of-ghadar-party/) का गावँ सराभा कुछ चंद ही कदमो पर है. व्यक्तिगत रूप से में कई बार लुधियाना जाते हुये इस कस्बे से गुजरा हूँ, इसी कस्बे के मुख्य पुलिस थाने में बतोर पुलिस हेड कांस्टेबल के रूप में अमनप्रीत कौर तैनात थी, ये कंप्यूटर ऑपरेटर के नाते पंजीकृत गुन्हा के मामलो और इनके दोषियों को ट्रैक करने की ड्यूटी संभालती थी, तारीख 09-जून-2016 को इन्हे फोन करके पुलिस स्टेशन की ड्यूटी पर बुलाया गया क्योंकि उस दिन एक और महिला पुलिस कर्मी किसी कारण वस छुट्टी पे थी, लेकिन इस से पहले करीबन 3 दिन पहले इन्होंने अपने परिवार से इस तथ्य को साँझा किया था कि इनके साथ पुलिस स्टेशन में पुरुष पुलिस कर्मचारियों द्वारा बदसलूकी की जा रही है जिसकी लिखती रिपोर्ट अमनप्रीत कौर ने दाख़ा के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस DSP को भी दी जिसमें विस्तार से कौर ने अपने साथ हो रही बदसलूकी की जानकारी दी थी, लेकिन कोई भी लिखित याचिका भारत देश में तब तक गौर नहीं कि जाती जब तक घटना वास्तव में घटित ना हो जाये जिसकी संभावना शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में की होती है, कुछ इसी तरह तारीख 09-जून-2017 दिन शुक्रवार की रात को इसी थाने में बतोर मुख्य कांस्टेबल तैनात अमनप्रीत कौर की पाई गई लाश जो की एक फंदे के माध्यम से छत से झूल रही थी पहली नजर में ये ख़ुदकुशी का मामला लगता है लेकिन चस्मदिदो का कहना है की वही टेबल पर एक पुरुष पुलिस कर्मचारी की पगड़ी पड़ी थी और उसी जगह पुरुष कर्मचारियों के कपड़े रखे हुये थे, ये सारे तथ्य पुलिस थाने में हुये किसी जुर्म को ब्यान करने में सक्षम लग रहे है, इसी बीच पीड़िता के भाई का ब्यान है कि अमनप्रीत कौर को इसी थाने में मौजूद पुरुष पुलिस कर्मचारी मानसिक उत्पीड़न / तंग करते रहते थे  लेकिन समय रहते किसी भी तरह की कार्यवाही नही की गयी. लोगो का गुस्सा देखते हुये जिन्होंने सड़क पर एक तरह से आवा जाही बंद कर दी थी, इस मामले में अमनप्रीत की लिखित शिकायत के आधार पर इसी थाने में बतोर मुंशी तैनात निर्भय सिंह को हिरासत में लेकर मुख्य थाना प्रभारी को निलबिंत कर दिया है और आगे की तफ्तीश की जा रही है. (http://m.hindustantimes.com/india-news/ludhiana-lady-constable-kills-self-in-police-station-after-harassment-colleague-booked/story-JIJV9rppUTM5sgqk3jOWRP.html)

आज इस घटना को अमूमन 10 दिन से ज्यादा हो गये है व्यक्तिगत रूप से सारी खबरों की वेबसाइट को खंगाल रहा हूँ लेकिन कही भी कौर की पोस्ट मोर्टेम रिपोर्ट का जिक्र नहीं किया जा रहा, आज हमारा मीडिया भी खबर को भुनाने में यकीन रखता ना की समय समय पर हो रही तफ्तीश के बारे में जानकारी देने के, लेकिन पोस्ट मोर्टेम रिपोर्ट में हो रही देरी इस तथ्य को यकीन में बदल रही है कि अमनप्रीत की मौत का राज गहरा है और क्या इसकी परते सुलझ पायेगी ? खासकर जब कौर के आरोप भी पुलिस पर है और कौर की मौत तफ़्तीश भी पुलिस ही कर रही है.

लेकिन कौर की मौत को दिनों में ही ये समाज भूल जाएगा, इस समाज से अपेक्षा रखना भी बेईमानी है जहाँ बहुत सी कौर है जिन्हे पंजाब राज्य में जन्म लेने से पहले ही दफन कर दिया जाता है, इनका गला गर्भ में ही घोट दिया जाता है, कौर को बचाने के लिये कानून भी बनाये गये है लेकिन जितना कानून सख्त होता है उतने ही गुन्हा के दाम बढ़ जाते है, जहाँ हर अस्पताल में लिंग परीक्षण क़ानूनी अवैध है कि जानकारी दी गयी है साथ ही साथ इस जुर्म के अंतर्गत होने वाली सजा का भी आहवान किया होता है लेकिन इस सवैधानिक चेतवानी के अक्षर जितने बड़े होते है पर्दे के पीछे उतने ही अपराध के राज होते है आज भी पुरुष के मुकाबले स्त्री की जनसख्या का अनुपात राज्य पंजाब और हरयाणा में कम ही है, इसकी वजह माँ बाप के साथ समाज की वह कुरीतिया भी है जिन्हे समाज में ही औरत को परेशान करने का, गुलाम बनाने का अधिकार मिलता है जहाँ एक औरत की एक शरीर से ज्यादा पहचान समाज में नही होती.

आज कौर को मारा जा रहा है और उसे मरने के लिये मजबूर भी किया जा रहा है, आज कौर लाचार है, बेबस है, कही इसे ससुराल में इस बात पर तंग किया जा रहा है कि ये देहज नहीं लायी, कही बेटे को पैदा करने की इच्छा, कही इसके चरित्र पर शक किया जाता है, रंग गोरा या काला, वजन ज्यादा क्यों है कितना खाती हो, अगर वजन कम है तो कहा जाता है तुम्हारे घर वाले खाना नही देते थे, कद काठी, आज कौर एक वस्तु बन गयी है, पंजाबी लच्चर गीत भी इसकी ही नुमाइश करते है जब गीत गाये जाते है टॉप दा पटोला, लक टुनु-टुनु, जहाँ लड़की अपने शरीर के सिवा और किसी भी तरह का वजूद नही रखती. आज कौर पुरुष प्रधान समाज में एक मोम की गुड़िया से ज्यादा की पहचान नहीं रखती, पुरुष प्रधान समाज आज अपनी नैतिकता को भूल चुका है और आज ये अपनी ताकत, सत्ता के अहंकार में कौर को कमजोर और कमजोर कर रहा है (https://www.youthkiawaaz.com/2016/12/violence-in-punjabi-music/) , लेकिन इसी कौर का इतिहास सिख धर्म में सवर्ण अक्षरों में लिखा गया है जहाँ गुरु गोबिंद सिंह ने सिख महिला को कौर की उपाधि देकर राजकुमारी का दर्जा भी दिया था वही इसे शस्त्र विद्या और अक्षर का ज्ञान भी दिया था, कौर जंग के मैदान में दुश्मन से भी लड़ी थी और समाज की कुरीतियों के खिलाफ भी आगे बढ़ कर इसने जंग की थी, आज कौर के इसी रूप से समाज में इसकी प्रतिष्ठा को वापस लाया जा सकता है जहाँ अक्षर ज्ञान से ये व्यवस्था का हिस्सा बन सकती है ओर अपने अधिकारों के लिये खुद लड़ सकती है, इसे खुद ताकतवर बनना होगा अन्यथा अमनप्रीत कौर, कुलविन्दर कौर, नाम बदल जायेगे लेकिन मोत कौर की होगी.

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