जुनून-वन्स अपॉन अ टाइम इन कलकत्ता साम्यवाद पर आधारित एक सत्य घटना से प्रेरित हैं।

Posted by Sanchar Samvad
June 19, 2017

Self-Published

Junoon once upon a time in Calcutta

Film Review By Kumar Yudy

Rating 3/5

मुम्बई।जुनून वन्स अपॉन अ टाइम इन कलकत्ता पश्चिम बंगाल में 1988 से 2011 तक की साम्यवाद पर आधारित सत्य घटनाओं से प्रेरित हिन्दी फ़िल्म हैं।इस फ़िल्म के लेखक निर्देशक और निर्माता कुमार आदर्श हैं।जिन्होंने इससे पहले भी कई फिल्में बनाई हैं।उन्होंने बंगाल में रहते हुए इस चीज को अनुभव किया हैं।जब उन्हें महसूस हुआ कि लोगों तक साम्यवादी चेहरें के पीछे छुपी काली करतूत को पहुँचाना चाहिए।तो फिर उन्होंने यह फ़िल्म बनाई।इस फ़िल्म में हंसी परमार,रितेश रघुवंशी,आलिया खान,दीपक सोनी,नैना मंडल,अनु चावला,विनोद मोदगिल ने काम किया हैं।

फ़िल्म की कहानी कुछ ऐसी हैं कि नंदिनी घोष जो एक चीफ न्यूज़ चैनल रिपोर्टर हैं।इसी न्यूज़ चैनल के एमडी इंद्रनील मजूमदकर हैं।जो एक बहुत ही चर्चित व लोकप्रिय साम्यवादी नेता हैं।जिनका लक्ष्य हैं,पूरे भारत में साम्यवाद को बढ़ावा देना।इसके लिए मजूमदार नक्सलियों को हथियार देते हैं।विदेशों से खर्च के लिए धन इकट्ठा करते हैं।लोगों में दंगे करवाना।हत्याएं करवाना।इस तरह से सभी गैरकानूनी काम सत्ता और मीडिया की आड़ में मजूमदार करता हैं।नंदिनी के साथ बिभा भी चैनल में काम करती हैं।जो नंदिनी की अच्छी दोस्त भी हैं।पर उसका अपना एक मिशन भी हैं।जिसे पूरा करने के लिए वह मजूमदार के काफी करीब चली जाती हैं।इस फ़िल्म में सोम देब का कैरक्टर भी बहुत ही उम्दा हैं।वह एक छात्र नेता हैं।पर मजूमदार उसे फँसा कर जेल भिजवा देता हैं।इसका कारण हैं कि देब साम्यवादी हैं।पर राष्ट्र में हिंसा के खिलाफ होता हैं।वह भी चाहता हैं कि हिंसा न हो।पर,नंदिनी और बिभा मिलकर देब को जेल से बाहर ले आते हैं।फिर लोगों को देब की राष्ट्रभक्ति के बारे में बताती हैं।नंदिनी का इस तरह से साम्यवाद को राष्ट्र से मिटाना और काले चेहरों को पर्दाफाश करना।इसकी वजह हैं उसका बदला।नंदिनी के परिवार वाले भी नक्सलियों के शिकार होते हैं।एक घटना में नंदिनी का पूरा परिवार खत्म हो जाता हैं।उसके परिवार का ड्राइवर नंदिनी को लेकर दार्जिलिंग चला आता हैं।कई सालों बाद नंदिनी को सच का पता चलता हैं।तो वह कलकत्ता वापस आती हैं।कलकत्ता आकर वह सोनागाछी में ठहरती हैं।यहाँ उसे जुबैदा का साथ मिलता हैं।जुबैदा नंदिनी से काफी प्रभावित होती हैं।इस वजह से जुबैदा नंदिनी की लड़ाई में बहुत सहयोग करती हैं।

इस फ़िल्म में सभी कलाकारों ने अपना अपना करैक्टर बखूबी निभाया हैं।बस कुछ एक का अभिनय थोड़ा सा कमजोर दिखा।बाकी सब ठीक ही रहा।निर्देशन लेखन इत्यादि ठीक ठाक ही रहा।

-युधिष्ठिर महतो(कुमार युडी) Freelance Journalist Call or Whatsapp For News Advertisement & Interview 08507209276.

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