देश का यूथ जो अभी तक उपेक्षित होता आया था

Posted by Anurag Singh Shekhar
June 16, 2017

Self-Published

किसी भी राष्ट्र में संसाधनों का जितना वैविध्य व आधिक्य होगा, वह राष्ट्र उतना ही समृद्ध होगा। बात जब संसाधनों की हो तो प्रायः भौगोलिक संसाधनों की ओर तेज़ी से रूख किआ जाता है परन्तु यह सर्वविदित है कि मानव संसाधन का अलग औचित्य व महत्ता है। मानव संसाधन किसी भी राष्ट्र के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मानव को जब एक संसाधन माना जा रहा है तो इस रूप में इसकी अवधारणा को समझना ज़रूरी है। मानव संसाधन वह अवधारणा है जो जनसंख्या को अर्थव्यवस्था पर दायित्व से अधिक परिसंपत्ति के रूप में देखती है। शिक्षा, प्रशिक्षण एवं चिकित्सा सेवाओं में निवेश के परिणामस्वरूप जनसंख्या मानव संसाधन में बदल जाती है। मानव संसाधन उत्पादन में प्रयुक्त हो सकने वाली पूँजी है। यह प्रतिभाशाली और काम पर लगे हुए लोगों और संगठनात्मक सफलता के बीच की कड़ी को पहचानने का सूत्र है।

मानव संसाधन एक अर्थ में जब उत्पादन में प्रयुक्त हो सकने वाली पूंजी है तो इसका तात्पर्य यह है कि हमें अधिक उत्पादन के लिए अधिक पूंजी निवेश की आवश्यकता होगी। लेकिन एक राष्ट्र के स्तर पर अधिकाधिक लाभ तब कमाया जा सकता है जब अधिक उत्पादन कम पूंजी को खर्च कर कमाया जाए | यह कम पूंजी का कार्य मानव संसाधनों में युवा वर्ग करेगा | बड़ी सरल भाषा में इसे समझना चाहें तो एक युवा एक बच्चे व एक बुजुर्ग से सदैव अधिक कार्य करेगा, यह कार्य अगर सकारात्मक दिशा में कराया जाए तो राष्ट्रहित में यह अच्छा योगदान देगा |
भारत के सन्दर्भ में एक बात लगातार कही जाती है कि भारत युवाओं का देश है | इसकी 50 प्रतिशत से अधिक आबादी 25 वर्ष एवं 65% से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है | इस हिसाब से अगर गणना की जाए तो एक औसत भारतीय उम्र लगभग 29 वर्ष की ठहरेगी, जो चीन व जापान की औसत उम्र क्रमशः 37 व 48 वर्ष से बहुत कम ठहरती है | भारत अगर वर्तमान में युवाओं का देश है तो हमें अपने आने वाले भविष्य के बारे में भी सोचना चाहिए क्योंकि यही युवा अगले वर्षों में देश की वृद्धों की संख्या में भी भारी इजाफा करेंगे | एक कल्याणकारी राज्य होने के कारण फिर वृद्धों के ऊपर होने वाला व्यय बी बढेगा | यह एक साधारण प्रक्रिया है | भविष्य में यह आबादी बोझ न बने इसलिए वर्तमान में इसका उचित प्रबंधन आवश्यक है, इस से हम अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर सकते हैं | इन सभी बातों को हम ध्यान में रखकर जो आधी से अधिक युवा आबादी है उसे एक बेहतर संसाधन के रूप में तैयार कर उनसे अधिकाधिक उत्पादन लेने की आवश्यकता है |
भारत में जितनी भी सरकारें अभी तक रही हैं उन्होंने अपने अनुसार मानव संसाधन को सुदृढ़ करने का प्रयास किया है | वर्तमान सरकार ने भी इस दिशा में कदम उठाए हैं | केंद्र सरकार द्वारा भारत को विश्व में मानव संसाधन की राजधानी बनाने के लिए 15 जुलाई 2015 को ‘स्किल इंडिया’ योजना की शुरुआत की गई | इस योजना का उद्देश्य कम समय में बड़ी मात्रा में लोगों को कौसल प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है | इसके साथ ही राष्ट्रिय कौशल विकास अभियान, राष्ट्रिय कौशल विकास और उद्द्मिता नीति 2015 तथा प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना एवं कौशल ऋण योजना की अखिल भारतीय स्थल पर शुरुआत की गई |
वर्तमान सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, कौशल विकास एवं उद्द्मिता मंत्रालय का प्रमुख कार्यक्रम है, जिसे राष्ट्रिय कौशल विकास निगम द्वारा संचालित किया जाता है | इसके अंतर्गत बड़ी संख्या में भारतीय युवाओं एवं युवतियों की उद्योग अनुरूप कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा, जो उन्हें बेहतर जीविका सुनिश्चित करने में सहायता प्रदान करेगा | वर्तमान समय में भारत के सिर्फ 5 प्रतिशत श्रमबल को किसी भी प्रकार का औपचारिक कौशल प्रशिक्षण प्राप्त है और श्रमबल की इसी खराब गुणवत्ता के कारण अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में उत्पदान स्तर में गिरावट से जूझ रहे हैं | अगर अभी से अपने युवाओं को उचित कौशल प्रदान किया जाए तो जो श्रमबल में यह केवल 5 प्रतिशत है इसे बढ़ाया जा सकता है |इसे जितना अधिक बढ़ाया जाएगा अर्थव्यवस्था में उत्पादन के स्तर पर इनके महत्वपूर्ण योगदान का लाभ हमें मिलेगा | ऐसा प्रायः देखा जाता है कि भारत में श्रम बाजार में पहली बार प्रवेश करने वालों और मुख्यतः दसवीं और बारहवीं कक्षा के बीच में पढाई छोड़ने वाले युवकों और युवतियों कि बड़ी संख्या है परन्तु उनके पास कोई औपचारिक कौशल नहीं है | यह योजना उनको एक उचित मानव संसाधन के रूप में विकसित करने में मदद करेगी|सरकार के हालिया आंकड़ों के अनुसार प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत 17.95 लाख लोगों को प्रशिक्षित किया गया |मंत्रीपरिषद ने हाल ही में अगले चार वर्षों अप्रैल 2016 से मार्च 2020 तक 60 लाख व्यक्तियों को नया प्रशिक्षण देने के लिए और औपचारिक कौशल प्राप्त 40 लाख लोगों को प्रमाण पत्र देने के लिए 12,000 करोड़ रूपये खर्च को मंज़ूरी दी है | इसके अंतर्गत अधिकृत संस्थानों में कौशल प्रशिक्षण ले रहे अभ्यर्थियों को 8000 प्रति अभ्यर्थी का औसत पारितोषिक प्रदान किया जाएगा|इस सन्दर्भ में एक बात सबसे महत्वपूर्ण है कि कौशल विकास मूलभूत पात्रता प्राप्त करने के बाद ही हो सकता है जो सिर्फ विद्यालयी शिक्षा से मिलता है | इसलिए सरकार को सबसे प्राथमिक स्तर पर प्रारंभिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा के स्तर में भी सुधार करने कि आवश्यकता है |
कौशल विकास एवं उद्यमिता राष्ट्रीय नीति 2015 को वर्तमान सरकार ने भारत कि प्रथम एकीकृत राष्ट्रीय नीति के तौर पर मंजूरी दी|इस नीति का उद्देश्य उच्च मानकों सहित तेज़ी के साथ बड़े पैमाने पर कौशल प्रदान करते हुए सशक्तिकरण कि व्यवस्था कि व्यवस्था
तैयार करना और उद्यमिता पर आधारित नवाचार संस्कृति को बढ़ावा देना होगा जो देश में सभी नागरिकों कि स्थाई आजीविका सुनिश्चित करने के लिए धन एवं रोज़गार का सृजन कर सके |इस योजना का उद्देश्य वर्ष 2022 तक 42 करोड़ भारतीय युवाओं को उद्योगों कि मांग के अनुसार प्रशिक्षित कर उन्हें रोज़गार के लिए तैयार करना है|देश में उद्मियों को बढ़ावा देने के लिए मुंबई और चेन्नई आई.आई.टी,अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय एवं बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की मदद ली जाएगी |
इस सन्दर्भ में महिलाओं का भी ध्यान रखा गया है | 450 महिलाओं औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और सामन्य आई.टी.आई 1004 महिला विंग के माध्यम से महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है |
राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद में सामान्य आई टी आई संस्थानो में 30 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की सिफ़ारिश की गई है। नक्सलवाद से प्रभावित 34 जिलों में कौशल विकास सुविधाएँ विकसित करने के लिए हर जिले में आई टी आई संस्थान और दो कौशल विकास केंद्र स्थापित की गए हैं।यह इसलिए भी ज़रूरी था ताकि उस क्षेत्र में युवाओं को प्रशिक्षित कर रोज़गार ले क्षेत्र में आगे बढ़ाया जाए ताकि नक्सल के प्रभाव पर कुछ अंकुश लग सके। पूर्वोत्तर राज्यों में कौशल विकास के अंतर्गत 20 आई टी आई संस्थानो को अपग्रेड करके प्रत्येक संस्थान में तीन नए व्यवसाय शुरू किये गए हैं।28 आई टी आई संस्थानो में मूलभूत ढाँचागत सुविधाओं जैसे नए छात्रावास ,संस्थान की मरम्मत,पुराने और खराब उपकरणों को बदलना आदी शामिल है। सरकार ने 1396 सरकारी आई टी आई के उन्नयन को व्यवस्थित करने के लिए कुल 3350 करोड़ रुपए का आवंटन किया है जिससे आई टी आई के युवा विद्यार्थियों को नौकरी के लिए तैयार करने हेतु व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा सके। बजट 2016-17 में 4000 करोड़ की लागत से आजीविका समवर्धन हेतु कौशल अर्जन और ज्ञान जागरूकता कार्यक्रम “संकल्प” शुरू करने का उल्लेख किया गया है जिसके द्वारा लगभग 3.5 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जा सके। बारहवीं तक की पढ़ाई के बाद उच्च शिक्षा के माध्यम से देश को बेहतरीन मानव संसाधन देने के लिए सरकार के स्तर पर प्रयास की जा रहे हैं।बारहवीं तक की पढ़ाई के बाद चिकित्सक,अभियंता,क़ानूनी क्षेत्र ,परम्परागत विज्ञान,मानविकी एवं वाणिज्य के क्षेत्र में जाने के लिए बहुत विकल्प मौजूद हैं परंतु ये पर्याप्त नहीं हैं।दूसरी सबसे बड़ी बात यह भी है कि हमारे देश में मौजूद युवाओं में कितने प्रतिशत युवा इस उच्च शिक्षा तक पहुँच पाते हैं।निश्चित रूप से यह संख्या काफ़ी कम है। स्पष्ट है कि अधिकाधिक युवा इससे नीचे की श्रेणी में ही आते हैं।अतः इनको लक्ष्य कर निचले स्तर पर ही इन्हें एक बेहतर मानव संसाधन के रूप में विकसित करने की ज़िम्मेदारी सरकार की है ताकि युवा शक्ति अधिकाधिक उपयोग कर सकें।एक बात यह है कि जिन्हें कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा उन्हें बुनियादी रूप से कुछ शिक्षित होने की भी आवश्यकता है क्योंकि आशिक्षितों को कौशल प्रशिक्षण नहीं दिया जा सकता।वर्ष 2016-17 के बजट के अनुसार जी.डी.पी. का 7 प्रतिशत सामाजिक सेवाओं पर व्यय होता है,यह आँकड़ा रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया के अनुसार है।इसमें भी शिक्षा पर यह आँकड़ा केवल 2.9 प्रतिशत है।किसी भी राष्ट्र का भविष्य वहाँ की शिक्षा नीति पर टिका होता है।इसे बढ़ाए जाने की आवश्यकता है ताकि शिक्षा के हर स्तर पर सुधार कर बेहतर मानव संसाधन तैयार कर युवाओं की उदीयमान शक्ति से राष्ट्र को लाभान्वित किया का सके व स्वयं युवाओं को भी बेहतर रोज़गार उपलब्ध हो सके।

अनुराग सिंह

शोधार्थी

दिल्ली विश्वविद्यालय

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