नक्सलवाद से जुड़ी एक छोटी सी कहानी ।

Posted by Abhishek Raj
June 6, 2017

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झारखंड में देखा जाए तो अब पहले से कम नक्सली रह गए है । लेकिन किस प्रकार एक व्यक्ति नक्सलवाद में शामिल होता है ये जानकर हैरानी होगी । ये किस्सा एक युवक की है जो हज़ारीबाग़ के एक गांव में रहता है । इस युवक की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी । लेकिन जैसे तैसे इस युवक ने अपनी बारवीं की पढ़ाई पूरी की और उसके बाद आगे की पढ़ाई करने की सोची । फिर इसने ने बी.ये.ड करने में अपनी रुचि दिखायी और इग्नू में अपना दाखिला करवाया । तीन साल के कोर्स में अछे अंक भी हासिल किए | अंतिम वर्ष में प्रैक्टिकल कॉपी जमा करना होता है और उसके बाद ही डिग्री मिलती है ।लेकिन अफसोस जब वह प्रैक्टिकल फाइल जमा करने जाता इग्नू वाले उसके फाइल को अस्वीकार कर देते । उसने 2 वर्ष तक लगातार रांची इग्नू के चक्कर काटे पर उसकी फाइल हर बार की तरह अस्वीकृति मिलती थी । उसको समझ में नही आया था की मामला आखिर है क्या । मामला यह था की उन कर्मचारियों को अपने दफ्तर के नीचे से रकम चाहिए थे और रकम उस छात्र के लिए काफी ज्यादा थे ।उस छात्र ने आखिरकार हार मान लिया और रांची जाना ही छोड़ दिया । न तो उसकी बीएड की डिग्री मिल पायी न कोई काम मिल पाया । तब उसकी दोस्ती एक ऐसे इंसान से हुई जो एक नक्सली था ।उस दोस्त ने इस लड़के को नक्सली बनने का प्रस्ताव दिया और कहा नक्सली बनोगे तो अछी कमाई होगी और जो सरकार में बैठे भ्रष्टाचारी उससे भी बदला ले पाओगे। इस नक्सली लड़के को सुन कर उसने अवसर को स्वीकार कर लिया । फिर इसे 4-5 महीने के लिए नक्सली बंनने की तैयारी में भेज दिया गया । जैसे पुलिस वालों को प्रशिक्षण दिया जाता उसी तरफ इन्हें भी दिया जा रहा था , जिस जंगल में इनको प्रशिक्षण दिया जाता था उस जगह इनके आँखों में पट्टी बांध कर ले जाया जाता था । इसी तरह इनकी तैयारी चलती रही । वहां पे इस छात्र के जैसे और भी अन्य नए लोग थे। सबको नक्सली बनने का प्रशिक्षण दिया जा रहा था । 4-5 महीने बीत गए तब इसे पता चला की इस संघठन में रहना खतरों से खाली नहीं है ।अगर आगे 2-3 महीने और रह लिए तब य तो फिर पुलिस मार देगी और अगर संघठन छोड़ के गए तो ये लोग मार देंगे । उसकी दिमाग खुली और वो लड़का और उसका एक दोस्त जो प्रशिक्षण करने के समय दोस्त बना , वहाँ से फरार हो कर अपने घर आ गए और जो भी छोटा मोटा काम मिला करने लगे । फिर दुबारा उस संघठन में जाने की हिम्मत नहीं हुई ।
चला था कलम उठाने , उठा लिए बंदूक । इस इंसान ने वहाँ जाके गलती की लेकिन जब एहसास हुआ तब वहाँ से भाग निकला । मैं ये नहीँ कहता इसने जो कदम उठाये वो सही है लेकिन अगर समय पे इसको डिग्री मिल जाती तो वो ऐसा कदम उठाता ही नहीँ । कुछ ऐसे लोग भी होते जिन्हें समय रहते समझ आ जाता है और कुकर्म करने से बच जाते है ।

जय भारत माता । जोहार झारखंड ।

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