पिता काट रहा आजीवन कारावास, बच्चे भुगत रहे सजा

Posted by Naresh Paras
June 17, 2017

Self-Published

अपराध करने वाले हाथ आवेश में आकर अपराध तो कर देते हैं लेकिन उस वक्त ये भूल जाते हैं कि उनके परिवार का क्या होगा ? कैसे उनके बच्चों की परवरिश होगी, कैसे समाज उस परिवार को जीने देगा. जेल जाने के बाद अपराधी को अपराध बोध होअता है लेकिन तब तक अभूत देर हो चुकी होती है.कुछ ऐसी ही कहानी है आगरा के एक गाँव की जिसमे एक व्यक्ति ने एक व्यक्ति की हत्या आकर दी और जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है.परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है.बच्चों की पढाई छूट गई.पत्नी पर लोग गलत नज़र रखने लगे.किसी तरह बूढ़ी माँ आगे आई और परिवार का पालन पोषण कर रही है.

आगरा की सेन्ट्रल जेल में एक बंदी हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था.उसकी बूढ़ी माँ और पत्नी पर उसके तीन बच्चों की परवरिश का जिम्मा था.परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था. उनकी ऐसी स्थिति न थी कि बच्चों को पढ़ा सके.जेल निरीक्षण के दौरान जब मेरी मुलाकात उस बंदी से हुई तो वह अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित दिखा.वह जोर-जोर से रोने लगा और अपने बच्चों के भविष्य को संवारने की गुहार लगाने लगा.उसे अपराधबोध हो चुका है.उसने माना की मुझसे गलती हो गई है लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता.

जब इस बंदी के परिवार से मिलने उसके गहर पहुंचा तो स्थिति बहुत दयनीय थी.एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील बनाकर उससे मिलने वाले पैसे से उनका घर खर्च चल रहा था.जो नाकाफी था.बच्चों की परवरिश भी ठीक तरह से नहीं हो पा रही थी.जब परिवार से जानकारी ली गई तो उनका दर्द आँखों से छलक आया.बूढ़ी माँ का कहना था कि बेटे ने जो किया उसकी सजा वह भुगत रहा है लेकिन इन मासूमों का क्या दोष है. ऐसे में पढने योग्य दो बच्चों का मैंने आगरा के सरकारी हॉस्टल आश्रम पद्धति विद्यालय में बच्चों का दाखिला करा दिया है.यहाँ ये बच्चे मुफ्त में पढाई कर सकेंगे.रहना, खाना, किताब-कांपिया आदि सब मुफ्त में मिलेगा.अब इन बच्चों का भी भविष्य संवर सकेगा.काश अपराध करने वाले वाले हाथ अपने परिवार के बारे में भी सोच पाते तो ये नौबत न आती.बच्चों की दादी की आँख के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे.उसका इकलौता बेटा जेल में जो है.

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