बद्रीनाथ के द्वार पर ये क्या माँगा

Posted by Afiya Bano
June 7, 2017

Self-Published

मेम की कुछ निजी तस्वीरें
प्रोफेसर मोहिनी मांगलिक अपने जन्म स्थल कराची में
प्रोफेसर मोहिनी मांगलिक अपने शादी के दिन
प्रोफेसर मोहिनी मांगलिक के माता पिता

गुलमोहर के लाल फूल अपनी लालिमा, दोपहर की कड़कती धूप में बिखेरते हुए काँच की खिड़कियों के बाहर अद्बुध दृश्य पेश कर रहे थे. ये खिड़कियाँ उस घर का हिस्सा हे जिसका पूर्व का छोर १८५७ की क्रांति का ऐतिहासिक सर जमीन ( रेजीडेंसी ) के पास बनी हे.

एक महान शिक्षक जिसे रोज़ इस ऐतिहासिक सर जमीन को देखना मय्यसर होता हे,, आप और में इतने खुशकिस्मत नहीं हे.
ये १९९९ का साल था,, कारगिल युद्ध बस ख़त्म हुआ था, एक ऐसा युद्ध जो ऐसे दो मुल्को के बीच लड़ा गया जो एक ही सरजमीं के थे. हम जीत गये थे पर शायाद जीत कर भी हर गये थे क्यूंकि हज़ारों के मरने क बाद कौन सी जीत होती हे.

युद्ध ख़त्म होने क बाद बद्रीनाथ जाने का मौका मिला, सुबह का वक्त था सूर्य उदय हो रहा था और रात का अँधेरा छट रहा था,, मेने बर्फ से ढंकी ऊँची पहाड़िया देखि और हवाओं से बोला ” पड़ोस में एक मुल्क और हे दोनों मुल्को में अमन और चैन रखना” . शायाद वो सर्द हवाएँ हम इंसानो सा ज़ादा समझदार थी. बद्रीनाथ के द्वार पर पाउच कर परिक्रमेये की. पंडित ने पूछा कोई मन्नत मांगनी हे, या पूजा करनी हे. मेने कहाँ हाँ दो मुल्को की पूजा, उनकी सुख शांति की पूजा . पंडित जी ने बताया जगत पूजा होती हे, पर दो मुल्कों की पूजा नहीं होतीं हे. मेने कहाँ ठीख हे आप जगत पूजा करो, में दिल में अपने उन दो मुल्को का नाम लेकर उनकी खुशहाली की कामना करुँगी. पंडित जी ने बोलै १५० रुपये लगेंगे, मेने २०० दिये और कहाँ पैसे वापस मत करना पर पूजा पूरी कराएये.

ये बताते हुए एक महान शिक्षक की आँखें भर आयी , अपनी सूती साड़ी का पल्लू उन्होंने उठाया और आँखों में भरा आंसू पोछ लिया.. ” शायद अपना दर्द हमसे नहीं साझा करना चाहती थी, पर आंसूओं ने बयां कर दिया “.विभाजन किसी भी मुल्क का हो, तकलीफ आंखरी सांस तक होती हे, उनसब को होती हे जो अपने आँखों क सामने अपने मुल्क के दो टुकडे होते हुए दखे हे.

अपने मादरे वतन के सीने में पे जब एक लकीर खींच दी जाती हे तो वो दिलों पर भी खींच जाती हे—–
हम उन लोगो का दर्द कभी नहीं समझ पायेंगे जो उस दौर के लोगो ने झेला हे,, शायाद अब हमारे पास वक्त ही नहीं की हम उनको सुने और उनके दर्द को साझा करे.

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