भीड़ पर अदालत का फैसला.

Posted by हरबंश सिंह
June 27, 2017

Self-Published

आज भीड़ एक उग्र रूप में अपना नंगा नाच दिखा रही है, जहां ये वारदात करती है, खबरों की सुर्खियां बन जाती है और न्यूज़ चेंनल के कैमरा, इसी और मूड जाते है, यँहा पीड़ित तो अपनी जान खो चुका होता है लेकिन अमूमन हर पीड़ित के परिजन एक ही तथ्य को कहते है की हमैं न्याय मिलना चाहिये, लेकिन भीड़ द्वारा हुये एक कत्ल पर एक अदालत ने ऐसा फैसला सुनाया है जो हैरान कर देने वाला है.

हम भीड़ द्वारा हो रहे कत्ल की शुरुआत को अख़लाक़ की मौत से जोड़कर देखते है लेकिन वास्तव में इसकी शुरुआत 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान ही हो गयी थी और इसका पहला शिकार बना था मोहसिन शेख, तब शायद किसी को इस बात का अंदाजा भी नही होगा की आगे चलकर ये भीड़ कई और मोहसिन शेख को कभी भी सड़क पर तो कभी रेल में कत्ल कर देगी. आज जुनेद के साथ साथ मोहसिन शेख को भी याद करना जरूरी है.

तारीख, ०२-जून-२०१४ को पूना में, मोहसिन शैख़ जो की यही पर उज्वला इंटरप्राइजेज में बतौर आईटी मैनेजर काम करते थे, उन पर कुछ हमलावरों ने हॉकी और सटीक से हमला कर दिया जिससे इनकी मोत हो गयी. यहाँ, क़ातिल और पीड़ित,एक-दूसरे से परिचित नहीं थे, लेकिन कत्ल धर्म की पहचान पर हुआ. उसी दिन, मोहसिन शेख अपने मित्र रियाज़ अहमद के साथ मोटर साइकिल पर सवार हो कर जा रहे थी यहाँ, मोहसिन ने हरा रंग का पठानी लिबास पहन रखा था और चेहरे पर दाढ़ी होने, से इनकी पहचान एक मुस्लिम के रूप में होना स्वभाविक थी. और इसी, कारण कुछ २० लड़के जो की हिंदू धर्म से तालुक रखते थे और ७-८ मोटर साइकिल पर हॉकी, स्टिक और पत्थरों से लेस, मोहसिन के मोटर साइकिल का पीछा करना शुरू कर दिया. थोड़ी ही, देर में इन्होने मोहसिन और रियाज़ को घेर कर, इन पर ताबड़ तोड़ हॉकी और सटीक से हमला कर दिया, रियाज वहां से भागने में कामयाब रहा लेकिन मोहसिन के सर पर चोट आयी थी और वह बुरी तरह से घायल हो चूका था, उसी, दौरान किसी राहगीर ने १०० नंबर पर फ़ोन करके, पुलिस को बुलाया और मौका ऐ वारदात की जगह पर पुलिस को आते देख, क़ातिल अपनी मोटर साइकिल वही छोड़ भाग खड़े हुये. और मोहसिन को अस्पताल ले जाया गया जहाँ, डॉक्टर ने इन्हें मृत घोषित कर दिया.

यहाँ, पुलिस छान-बीन से और कुछ गवाहों के दिये हुये बयान से पता चला की इस वारदात के पहले, गोंधालेमाला में कुछ युवा जिनकी उम्र कुछ १५ से २० वर्ष की रही होगी, वहां जमा होने शुरू हो गये जिन्होंने हाथों में लाठी और हॉकी की सटीक पकड़ रखी थी, यहाँ भडकाऊ तरीके से, इस बात को बताया जा रहा था शिवाजी महाराज की तस्वीर के साथ छेड़ छाड़ करके, फेसबुक पर लगाया गया था, यहाँ, हिंदू राष्ट्र सेना का अध्यक्ष, इस घटना के पीछे मुस्लिम समुदाय के हाथ होने का शक, यकीन के साथ जाहिर कर रहा था और अपने अनुयायी से मुस्लिम समुदाय के लोगो पर हमला करने का अनुग्रह,एक तरह से आदेश की तरह कर रहा था ताकि हडपसर इलाके में दहशतका माहौल बनाया जा सके. साथ, में ये भी निर्देश दिये, मुस्लिम समुदाय की दुकान और घरों को भी निशाना बनाया जाये ताकि यहाँ पर मुस्लिम समुदाय किसी भी तरह से कोई व्यापार ना कर सके. इसी बात का इजहार, मौक़ा ऐ वारदात पर पकड़ी गयी मोटर साइकिल से भी हुआ जहाँ जगह-जगह हिंदू राष्ट्र सेना और श्रीमंत योगी लिखा हुआ था और शिवाजी महाराज का स्टिकर लगा था. यहाँ, मोहसिन के कत्ल के साथ, हिंदू राष्ट सेना के तार जुड़ रहे थे.

इसी बीच, पुलिस तफतीश से सामने आया की पहले भी हिंदू राष्ट्र सेना, पुलिस द्वारा किसी भी सभा की इजाजत दिये बिना भी, जनवरी २०१४ में सार्वजनिक सभा कर चुकी हैं जहाँ धार्मिक भडकाऊ भाषण दिये गये थे. याद रहे, २०१४ अप्रैल-मई में लोकसभा के चुनाव हुये थे और साल २०१३ में ही भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री के रूप श्री नरेन्द्र मोदी जी को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया था, और ये हम सब जानते हैं की मोदी जी की छवि एक कट्टर हिंदू नेता की रही हैं और ये आरएसएस से भी जुड़े हुये थे. यहाँ, मोहसिन के कत्ल की जाँच में एक और सच सामने आया की तारीख ०३-जून-२०१४ को भी कुछ लोगो ने अमिन शैख़ का पीछा किया और धनंजय जिंदाबाद, हिंदू राष्ट्र सेना जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे, यहाँ,अमिन ने एक दुकान में खुद को छिपाने की कोशिश की लेकिन हमलावरों ने वहां भी, अमिन पर हमला कर दिया, ग़नीमत यह रही की,अमिन ने अपने सर का बचाव कर लिया लेकिन कंधो पर बुरी तरह से चोट आयी थी.

धनंजय उर्फ मनोज जैराम देसाई, जो की उस समय कथा कथित हिंदू राष्ट्र सेना का अध्यक्ष था और इसी के नाम के नारे,हमलावर अमिन का पीछा करते हुये लगा रहे थे. पुलिस, ने मोहसिन के कत्ल केस में धनंजय को भडकाऊ भाषण देने और मोहसिन पर हमला करने के लिये, हमलावरों को उत्तेजित करने के ज़ुल्म में अपराधी ठहराया था.यहाँ, केस कोर्ट में चला और धनंजय, के बचाव पक्ष के वकीलों ने धनंजय की जमानत की पेशकेस कोर्ट में की, इनकी दलील थी की धनंजय,मोहसिन के कत्ल के समय वारदात स्थान पर मौजूद नहीं था. लेकिन, ०५-मार्च-२०१५ में, अपने एक हुकुम में अदालत ने तर्क दिया की एक मुस्लिम गवाह ने ये बताया हैं की उसके घिर जाने पर उसने खुद की पहचान हिंदू के रूप में बताने से ही वह खुद की जान को बचा सका. अदालत, का मानना था की ये स्टेटमैंट काफी हैं की ये पूरी घटना धनंजय द्वारा दी गयी भडकाऊ भाषण से प्रेरित हैं जहाँ एक धर्म के अनुयायी को दूसरे धर्म के बासिंदों को मारने के लिये उकसाया जा रहा हैं,जिससे दोषियों की धार्मिक भावना भड़काई गयी और अपनी साजिश को अंजाम दिया गया जिससे समाज में कानून व्यवस्था का बिगडना तय था. ये, सारी वजह, काफी हैं, धनंजय की जमानत की अर्जी को खारिज करने के लिये.

लेकिन, सार २०१७ के शरुआत में, मोहसिन के कत्ल के कथा कथित दोषी विजय राजेन्द्र गंभीरे, श्री गणेश उर्फ रणजीत शंकर यादव और श्री अजय दिलीप लाल्गे, की जमानत अर्जी की सुनवाई कोर्ट में हुई जहाँ बचाव पक्ष इनकी जमानत की अपील कर रहा था और इनका तर्क था की ये तीनों उस दिन घटना स्थल पर मौजूद ही नहीं थे और इसी केस में और ११ दोषियों की जमानत अर्जी भी कोर्ट ने अप्रैल-२०१६ और जून-२०१६ में मंजूर की हैं जो की बाहर एक व्यवहारिक जीवन बसर कर रहे हैं, इसी दलील पर इन तीनों की जमानत अर्जी मंजूर की जाये, यहाँ दूसरे पक्ष के वकील का कहना था की ये तीनों घटना स्थल पर जाते हुये देखे गये हैं, जहाँ इनके हाथों में हॉकी और सटीक मौजूद थी और ये तीनों मोहसिन के कत्ल में कथाकथित अपराधी हैं.

यहाँ, कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया की “तमाम, गवाह, पुलिस तफतीश, ऍफ़आईआर, दोनों पक्षों के वकीलों की दलील और मौजूद सबूत, ये बता रहे हैं की ये तीनों उस दिन घटना स्थल पर मौजूद थे. यहाँ दोषियों और पुलिस का स्टेटमैंट हैं,की वारदात के कुछ समय पहले इन दोषियों ने हिंदू राष्ट्र सेना के अध्यक्ष धनंजय की सभा में शामिल हुये थे. इन्ही, धनंजय की जमानत अर्जी को कोर्ट ने तारीख ०५-मार्च-२०१५ को नामंजूर कर दी थी. लेकिन, वारदात के कुछ समय पहले धनंजय द्वारा दिये गये धार्मिक भडकाऊ भाषण से इन सभी दोषियों की धार्मिक भावना को उत्तेजित किया गया, और इसी वजह से दोषियों ने मोहसिन का कत्ल कर दिया, क्युकी मोहसिन का दूसरे धर्म से तालुक रखता था, यहाँ मोहसिन के कत्ल के पीछे उसका धर्म ही एक कारण है और कोई मंशा नजर नहीं आ रही. इसके सिवा, दोषियों का कोई अपराधिक रिकॉर्ड भी मौजूद नहीं हैं, यहाँ, ये प्रकट होता हैं की दोषियों की धार्मिक भावना को भडकाया गया जिसके तहत, इन्होने इस कत्ल को अंजाम दिया. इस तरह की अवस्था में, ये अदालत इन दोषियों की जमानत अर्जी मंजूर करती हैं.”

यहाँ, एक नागरिक होने के नाते में अदालत केनिर्णय पर किसी भी तरह का सवालिया निशान नहीं कर सकता लेकिन,मोहसिन का बस इतना क़सूर था की वह दूसरे धर्म से हैं और इसी वजह से उसका कत्ल हो जायेगा, सजा भी उसी को होगी जिसने धार्मिक भावनाओं को भडकाया था लेकिन कत्ल करने वाले दोषियों की जमानत अर्जी मंजूर कर दी जायेगी. सोचिये, सभा में एक या दो हो प्रवक्ता होते हैं लेकिन दर्शक के रूप में हजारों-लाखों की भीड़ उमड़ सकती हैं, इसी तर्ज पर अगर, अदालत के इस बयान की समीक्षा करे तो भारत देश में जहाँ-जहाँ धर्म के आधार पर लोग अल्पसख्यंक हैं उनकी जान-माल की सुरक्षा सिर्फ और सिर्फ एक भडकाऊ भाषण से खत्म हो सकती हैं और क़सूरवार भी यहाँ सिर्फ और सिर्फ सभा का प्रवक्ता ही होगा ना की कत्ल करने वाला क़ातिल. व्यक्तिगत रूप से, इस अद्लाती फ़रमान ने मुझे झँझोड़ दिया हैं. हो सकता, आने वाला समय कुछ और करवट ले. धन्यवाद.

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