मजहब नही. सिखाता आपस मे बैर रखना

Posted by Anupma Singh
June 26, 2017

Self-Published

सप्ताह के अंत के साथ पाक माह रमजान भी समाप्ति की ओर है… मैं शहर के बीचो बिच बाजार वाले क्षेत्र में रहती हूँ , यहाँ ईद की तयारी को लेकर बाजार में खूब चहलकदमी है ओर साँझ ढलने के साथ जैसे – जैसे रात चढ़ती है , रोजादार इफ्तारी के बाद बाजारों में खरीदारी करते लोगो का झुण्ड नजर आने लगता है |
कई जगहों से इफ्तार दावत में सामिल होने के लिए न्योता मुझे मिला ओर ईद के दिन ये तो पूछिए ही मत सुबह से साम तक की बुकिंग पहले से ही हो जाती है एक के बाद दुसरे ओर तीसरे, चोथे घरो तक ईद मिलन के लिए जाना होता है |
मीठी संवैया , मसालेदार बिरयानी ओर दहिबरा जैसी लाजवाब पकवान परोसने के साथ उनके घरो से बिदाई के वक़्त बुजुर्गो के हांथो इत्र, चोकलेट, पैसे ईदी के रूप में दिया जाना अनोखा अनुभव देता है|
ईद के तयारी की इसी उम्माह – उमंग के बिच मैंने एक विडियो देखा ओर उससे जुडी खबर को पढ़ी जिसके बाद में कुछ वक़्त के लिए पुराणी बातो ओर वर्तमान स्तिथि को लेकर कुछ उधेरबुन करने लगी ……मैंने जिस माहोल में पली पड़ी वहां मेरे कोई मुस्लिम दोस्त नहीं थे लेकिन जब कॉलेज पहुंची तो मेरे कई मुस्लिम दोस्त हुये, उनका हमारे धर्म के प्रति सन्मान ओर रीती-रिवाजो से लगाव को देख कर मेरा मन भी रोजा रखने का हुआ ओर हम कुछ तीन गैर-मुस्लिम दोस्तों ने मुसलमानों के तौर तरीको से रोजा रखा …
हमें आज भी याद है हमारा रोजा रखना जितना सुकून दे रहा था उतना ही मेरे मुस्लिम दोस्तों को भी खुसी मिल रही थी लेकिन , इसके बिपरीत समाज के कुछ कट्टर मानसिकता वाले लोगो को ये बात हजम नहीं हो रही थी ओर मुझे वो हर तरह ले यह समझाने में लगे थे की ये हमारे धर्मं से जुदा नहीं है , इसे छोर दो …जब मैं लाख समझाने बुझाने पर भी रोजा रखना बंद नहीं की तो मुझे भगोड़ा कह कर ये कहने लगे की , “ अब ये मिया की टोली में सामिल हो गई है घर वापस हो जा , फिर से हिन्दू बन जा ” जैसी बातो से मेरा दिल दुखाने की भरपूर कोसिस की जा रही थी| फिर भी हम सब दोस्तों ने पूर्ण रीती – रिवाजो एवं आस्था के साथ पांच वर्षो तक लगातार लम्जन में रोजा रखा …मैं एक हिन्दू परिवार में जन्म ली आज भी हिन्दू हूँ … संप्रदायेक संद्भभावना को बढ़ावा मिले इस मकसद से मैं रोजा रखी तो कुछ धर्मं के ठेकेदारों को तकलीफ होने लगी थी|
वही दूसरी ओर अभी राजस्थान के भीलवाडा जिले में देशभक्ति की मिसाल पेस करते हुये मस्जिद को राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे से सजवाने का विडियो वायरल हुआ, जिसे लोग खूब apriciate कर रहे है …रिपोर्ट्स के मुताबिक मस्जिद के इमाम मो. जफ़र मुख्तार आसमी ने कहा की “ आज मुसलमानों को देश भक्त नहीं मन जा रहा है, जिससे हमें दुःख होता है , अब हमें दिखाना पड़ रहा है की, हम भी देशभक्त है |
मस्जित के सजाने के साथ देशभक्त होने का परिचय देना भले ही सबको आकर्षित कर रहा हो परन्तु मुझे बार बार ये सोचना पड़ रहा है की, आखिर अपने ही मुल्क में ये भेद भाव क्यों है? देश के निवाशी होने के वावजुद सिर्फ अल्पसंख्यक होने के कारन मुसलमानों को समय – समय पर अपनी देश भक्ति साबित करनी पड़ती है |
एक तरफ जमीनी स्थिति ऐसी है वही दूसरी ओर सभी राजनितिक दल उनके इफ्तार दावत में सामिल होकर जबरदस्ती उनका हितैसी बताकर वोट बैंक हथियाने के चक्कर में रहते है |
गहरे सोच में खो कर सवाल-जवाब खुद से करने के दौरान बगल घर के छत से छोटे छोटे बच्चो की आवाज सुनाई दी…..अरे देखो भाइयो ! मासल्लाह ! चाँद दिख गई | ईद मुबारक, चाँद मुबारक |
मैं भी झट से मुस्कुराते हुए उन्हें आवाज लगा दी….. इमरान ,सजिया सबको चाँद मुबारक……
लीजिये जनाब एक ही चाँद करवा चौथ पर हिंदुवो का हो जाता है और आज वही मुसलमानों का हो गया है …अमानवीय एवं तुष्टिकरण से जन्मे भेद भाव की बातो को भूल कर फिर दुबारा उन्हें साथ उछल कूद मचाते हुये ईद के तयारी में जुट गई, क्योंकी मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना ….

 

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