मासूम को अगवा कर मंगवाई भीख, डेढ़ साल बाद परिवार से मिला

Posted by Naresh Paras
June 11, 2017

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बड़ी बिडम्बना है की एक ओर सुप्रीम कोर्ट का आदेश है की लापता बच्चों की 24 घंटे के अन्दर रिपोर्ट दर्ज कार्यवाही की जाए, वहीँ दूसरी ओर अपने लापता बच्चे की गुमशुदगी दर्ज कराने के लिए एक अभागे पिता ने पुलिस के हर दर पर दस्तक दी लेकिन पुलिस ने उसकी एक न सुनी.बच्चे से गैंग द्वारा भीख मंगवाई गई.किसी तरह बच्चा गैंग के चंगुल से छूटा तो उसे बाल गृह में निरुद्ध कर दिया और बच्चा गुमनामी की जिंदगी जीने लगा.बमुश्किल उसके परिवार को ढूँढा और परिवार के सुपुर्द किया.

आगरा के राजकीय बाल गृह में 18 फरवरी 2016 से संतोष नामक सात वर्षीय एक बालक निरुद्ध था.किसी ने उसके परिवार को खोजने की पहल नहीं की.जब मैं (नरेश पारस) बाल गृह गया तो  संतोष से बात की तो संतोष ने बताया कि डेढ़ साल पहले एक व्यक्ति उसे इटावा के रेलवे स्टेशन से अगवा कर ले गया.जो बच्चों से भीख मंगवाता था.उसके पास एक दस साल की बच्ची भी थी, वह उससे भी भीख मंगवाता था.पैसे न मांगने पर बच्चे को मारा-पीटा जाता था.भरपेट खाना भी नहीं दिया जाता था.उससे ट्रेन में भीख मंगवाई जाती थी.सौ रुपये भीख मांगने पर उसे मात्र पांच रुपये दिए जाते थे.बच्चे ने इसकी शिकायत ट्रेन में यात्री से कर दी.यात्री ने तो नज़रंदाज़ कर दिया लेकिन बच्चे की बुरी तरह पिटाई लगाई गई.किसी तरह बच्चा छूटकर आगरा आया.जीआरपी ने उसे पकड़ लिया और आगरा के बाल गृह में निरुद्ध करा दिया.

बच्चे ने बताया की उसके पिता जड़ी-बूटी बेचते हैं.कालपी रेलवे स्टेशन के पास वह रहता है.सोशल मीडिया की मदद से मैंने बच्चे के परिवार को खोज लिया.बच्चे के पिता ने बताया कि संतोष के अगवा होने के बाद उसने कालपी (जालौन), उरई, इटावा और बाँदा पुलिस को तहरीर दी लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं.उसके पास पुलिस के रिसीविंग प्रार्थना पत्र थे.उसने हर जगह गुहार लगाई लेकिन कहीं राहत नहीं मिली.जब इस परिवार को आगरा बुलाकर मैंने बच्चे से मिलाया तो पिता राजेन्द्र और माँ कश्मीरी से बच्चा लिपट गया.माँ-बाप भी रोने लगे.संतोष की बहन भी रो रही थीं.माँ-बाप कह रहे थे कि हम तो इसके बापस मिलने की उम्मीद ही खो चुके थे.अगवा बेटे को पाकर बह बहुत खुश थे.

देश के अनाथालयों/बाल गृहों में न जाने कितने बच्चे होंगे जो अपने परिवार का इंतजार कर रहे होंगे जो सिस्टम के नाकारापन से गुमनामी की जिन्दगी जी रहे होंगे और कहीं सड़कों पर भीख मांग रहे होंगे.गरीब की कहीं नहीं सुनी जाती है.उसके लिए न्याय मिलना भी एक सपना है.ये तो केवल एक बानगी न जाने कितने परिवारों के चिराग गायब है.देशभर से हर साल 60-70 हजार बच्चे लापता होते हैं.ऐसे बच्चों को घर पहुँचाने में हम सभी को आगे आना चाहिए.आपकी एक पहल से बिछुड़े परिवार को उसका बच्चा मिल सकता है.

आगरा के बाल गृह से अगवा बच्चे को पाकर ख़ुशी इज़हार करता परिवार.साथ हैं नरेश पारस.

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