मैंने आत्महत्या नहीं की

Posted by Ravinder Kumar Attri
June 7, 2017

Self-Published

आज मैंने आत्महत्या करने की सोची।
आंखें बंद की तो लगी हरकत ओछी।।

कुछ ख्याल किया मैंने मौत के मंजर का।
मौत गले लगाने से रूह कांपा अंदर का।।
देखा पिता की लाठी जमीन पर टूटी पड़ी थी।
पकड़ के कलेजा माँ बगल में बेहोश पड़ी थी।।

दीदी लेकर टूटी राखी सिसकती खड़ी थी।
भाई की बाजू जैसे टूटी व लटकी पड़ी थी।।

हर ओर लोगों की भीड़ जमीं पड़ी थी।
कोने में मेरे दोस्तों की लाइन खड़ी थी।।

गाँव में मेरी मौत का मंजार था।
आवेश में जो मैंने छोड़ा संसार था।।

लोगों की आंखों में मेरे जाने का अफसोस था।
क्यों किया मैंने ऐसा कैसे कहता खामोश था।।

फिर सोचा कि
मेरे जाने से दुखी थे लोग, बात राज की।
देख मंजर मौत का मैंने सोच बदल ली।।

फिर मैंने अपनी बंद आंखें खोल दी।
“रविन्द्र” ने आज आत्महत्या नहीं की ।।

रविन्द्र कुमार अत्री 
चम्बा, हिमाचल प्रदेश

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