सत्ता और ताकत, नशे का व्यपार जिस से एक पीड़ित आज नपुंसक होने की कदार पर है.

Self-Published

इस साल के शुरुआत में पंजाब राज्य विधानसभा चुनाव में राज्य में पैर पसार चुकी नशे की समस्या एक गंभीर मुद्दा बन कर सामने आया था, जँहा उस समय की सत्ता रूढ़ शिरोमणि अकाली दल बादल और भारतीय जनता पार्टी के गठजोड़ की सरकार इस को एक उग्र हो रही समस्या के रूप में नकार रही थी वही विपक्षी दल कांग्रेस और आप इसी मुद्दे पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करके चुनावी रणनीति बना रहे थे, यँहा कांग्रेस के पूर्व घोषित पंजाब राज्य के मुख्य मंत्री के उम्मीदवार कैप्टेन अमरिंदर सिंह, लगभग हर चुनावी सभा में नशे की समस्या पर विस्तार से जानकारी दे रहे थे की वह किस तरह इस मुद्दे को सुल्झायेगे और इसी संधर्भ में इनकी रणनीति क्या होगी, शायद ये सबसे एक महत्वपूर्ण कारण रहा जहाँ राज्य की जनता ने दिल खोलकर अपना मत कांग्रेस के पक्ष में दिया और कैप्टेन अमरिंदर सिंह पंजाब राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की सत्ता पर विराजमान हो गये, और अब राज्य की जनता टकटकी नजरो से अपने मुख्यमंत्री की तरफ उम्मीद से देख रही थी की ये किस तरह नशे की समस्या को हल करते है लेकिन यँहा जनता के मन में शंका भी थी की कही नशा एक चुनावी वादा बनकर चुनावी घोषणा पत्र तक ही ना सीमित रह जाये.

लेकिन कैप्टेन साहिब ने राज्य की जनता से किये हुये अपने वादे को निभाया और सत्ता पर विराजमान होते ही नशे की समस्या को हल करने के लिये एक स्पेशल टास्क फाॅर्स टीम का गठन कर दिया जिसके परिणाम अब जमीनी हकीकत बनकर सामने आ रहे है. तारीख 12-जून-2017, को इसी टीम ने पंजाब राज्य की पुलिस में बतोर इंस्पेक्टर के रूप में फर्ज निभा रहे इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह के कई ठिकानों पर छापामारी की वही सिंह को हिरासत में लेकर अदालत के सामने पेश कर इन्हे जुडिशल हिरासत में लिया गया, स्पेशल टास्क फाॅर्स ने इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह पर आरोप लगाये है कि ये अपने तरनतारन जिलै में बतोर थाना प्रभारी की तैनाती के रूप में नशे के तशकरो को सरक्षण दिया, नशे की तश्करी में भी इनकी समहुलित थी वही कई तरह से ये नशे की तस्करी में मददगार भी रहे, वही छापामारी के दौरान इनके यँहा से 7 किलो नशा जिसमे 4 किलो हीरोइन और 3 किलो स्मैक जपत की वही 16 लाख की नकदी के साथ कुछ विदेशी मुद्रा भी बरामत हुई है और हथियार में एक पिस्तौल भी मिला है. (http://www.punjabtribune.com/news/33203-stf-arrests-inspector-inderjit-singh-for-facilitating-smuggling-and-trafficking-of-narcotics.aspx) वही अब खबर आ रही है की इंदरजीत सिंह ने अपने गुन्हा को कबूल कर लिया है की उनके नशा तस्करों के साथ काफी नजदीकी और दोस्ताना संभंध रहे है. (http://m.hindustantimes.com/punjab/arrested-punjab-police-inspector-inderjit-singh-admits-to-having-links-with-drug-smugglers/story-wEs81uif1Ui2g49smzjaqL.html) व्यक्तिगत रूप से मेरा मानना है कि इंदरजीत सिंह एक बड़े तलाब की एक छोटी मछली है अब बड़ी मछली को पकड़ने के लिये ये स्पेशल टास्क फाॅर्स कितना पांनी को खंगालती है ये तो आने वाला समय ही बतायेगा.

लेकिन इस घटना से इस कथन को सच्चाई का जामा पहनाया जा सकता है कि नशे के इस दौर में राज्य पुलिस कर्मचारी नशे की तस्करी के साथ-साथ इसका सेवन भी करते हो सकते है, क्योंकि नशा एक आम आदमी को आसानी से नही मिलता लेकिन एक पुलिस कर्मचारी के लिये सब कुछ आसान है, गैर कानूनी नशा भी. तो इस तथ्य से भी कयास लगाये जा सकते है की पुलिस स्टेशन भी अब महफूज नही है यँहा भी गुन्हा होना कोई अचभिंत्त कर देने वाला सच नही होना चाहिए क्योंकि जँहा नशा है वहां गुन्हा तो होगा ही फिर चाहे इसका सेवन हो या ना भी हो लेकिन नशे के रूप में हो रही मोटी कमाई भी इतना हौसला तो बुलंद कर देती है की गुन्हा होने की संभावना बढ़ जाती है.

नशा, एक गैर पंजाबी के लिये इसे शायद समझना मुश्किल है, आज एक गैर पंजाबी खासकर जो दिल्ली, हरयाणा, राजस्थान, इत्यादि प्रदेश में रहता है उसे अनुमान है की पंजाब में नशा इतनी बड़ी समस्या क्यों है लेकिन जो भारतीय मिलो दूर पंजाब से बस्ते है उन्हे इस बात से अचंभा लगता है कि नशा एक समस्या के रूप में कैसे इतना विशाल बन सकता है कि राज्य चुनाव भी इसी मुद्दे के इर्द गिर्द घूमते है वही जिस पर सुरक्षा की जवाब देही है वह राज्य पुलिस भी इसमें लीन पाई जा रही है, आलम ये है कि एक पंजाबी इसके विरोध में आज सड़को पर उतर रहा है, इस तथ्य को जानने के लिये पंजाब के हालात को समझना होगा, इसका अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि हजारो रुपये में कुछ ग्राम नशा मिलता है जहाँ सबकी मोटी कमाई है वही समाज खोखला हो गया है,  नशा जहाँ दिमाग की मास पेशियां अपना काम करना छोड़ देती है, शरीर पर किसी भी तरह का काबू नही रहता और लत ऐसी की घर के बर्तन तक बिक जाते है, कुछ हजार में मिलने वाला एक ग्राम नशा आज पंजाब को बर्बाद कर रहा है. मैं चश्मदीद हु एक घर की बर्बादी का जिसे करीब से देखा है की किस तरह नशे के कारण एक खुशहाल परिवार आर्थिक मदहाली की कगार तक पहुच गया, ऐसे अनुभव आज हर पंजाबी को है, यहां नाम लिखने की जरूरत नहीं है लेकिन कई परिवार अपने नशे से पीड़ित जवान पर नजर रखते है ताकी इसे इस से दूर रखा जा सके परंतु नशे की तलब के कारण कब ये नजर एक कैद में बदल जाती है इसका अंदाजा घरवालों को भी नहीं होता कि कब घर के कमरे को जेल की काल कोठरी बना दिया जाता है.

नशा आज सामाजिक बुराई और आर्थिक मदहाली का भी प्रतिक तो है ही लेकिन इसके चलते व्यक्तिगत पारिवारिक प्रतिष्ठा भी हाशिये पर चली जाती है, नशे के कारण मानसिक संतुलन बिगड़ने की संभावना तो है ही लेकिन ये कई तरह से शारीरिक बीमारियों को भी ये न्योता दे रहा है, जिसकी संभावना बहुत बढ़ जाती है जब नशे के अंदर हीरोइन, चरस, केमिकल एवं मेडिकल नशे का सुमार हो जाये, ये भी एक तथ्य है जिसके कारण आज शादियां टूट रही है, अगर समाज में ये बात फ़ैल जाये की ये युवक नशे की चपेट में है तो शादी के लिये रिश्ते भी नहीं आते, इसका कारण नशे की लत के कारण नपुंसकता का खतरा है जहाँ कई ऐसे उदाहरण है कि नशे से पीड़ित आज शारीरिक कमजोर हो गया है, अगर इस रिपोर्ट को देखेगे तो इस का अंदाजा होना लाजमी है कि आज नशा किस तरह एक इतनी गंभीर समस्या बन गया है जिसकी चपेट में पूरा का पूरा गांव, कस्बा, मंडी, शहर और राज्य है. (http://www.sunday-guardian.com/news/impotence-adds-to-drug-addicts-trauma-in-punjab), व्यक्तिगत रूप से मैं आहात हु, हमारी एक पीढ़ी को तो ब्लूस्टार का काला दोर निगल गया और जो आज हमारी नोजवान पीढ़ी को नशा निगल रहा है, आज नशे के कारण शारीरिक कमजोरी के कारण ऐसे कयास लगाये जा रहे है कि क्या आने वाली पीढ़ी भी स्वस्थ शारीरिक होगी ? आज नशे भी एक कारण है कि राज्य का नागरिक विदेश की और पलायन कर रहा है.

साल 2007 और 2017 के 10 साल के सत्ता काल में जँहा पंजाब राज्य में शिरोमणि अकाली दल बादल और भारतीय जनता पार्टी पर नशे के कारोबार पर ढिलाई बरतने के आरोप लगते रहे वही इसी दौर में सत्ता और सुरक्षा की मिली भगत भी राज्य की जनता ने देखी थी, जँहा गुन्हा बैखोफ किये जाते थे और प्रशाशन की तरफ से सुनवाई भी कम थी. यही वजह है की आज पूरी तरह से चरमरा गयी राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को ठीक करने की जरूरत है क्योंकि इस से बेहद खफा राज्य का नागरिक कानून को अपने हाथ में लेने लगा है यँहा पिछले दिनों भीड़ ने एक नशे के तशकर की बेरहमी से पिटाई कर दी जिससे उसकी मौत हो गयी.      (https://www.google.co.in/amp/m.timesofindia.com/city/chandigarh/villagers-thrash-drug-peddler-to-death/amp_articleshow/59060014.cms) अब वक्त रहते राज्य सरकार को कानून व्यवस्था को तन्दरुस्त करना और नशे की गंभीर हो चुकी समस्या से राज्य की जनता का निवारण करना बहुत जरूरी है अन्यथा राज्य का नागरिक निराशा की चरमसीमा तक जाकर राज्य की व्यवस्था का विरोध।कर सकता है जहाँ हलात बहुत ज्यादा गंभीर हो सकते है.

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