सत्य बहुत परेशान होती है साहब

Posted by Sonu Mishra
June 5, 2017

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इंसान सत्य को परेशान कर सकता है पराजित नही! ये नारा आम आदमी पार्टी का जब गठन हुआ था तब का था।

लेकिन अब आदमी पार्टी का नारा है सत्य को पराजित करो और झूठ को जिताओ! आये दिन नए – नए आरोपो की भरमार लग रही है केजरीवाल पे।

ये राजनीती मुहावरा और प्रेरक शब्द शब्द सत्य सिर्फ इंसानी मूल्य को समझाने के लिए था।

बात अब शुरू करता हूँ कहानी के रूप में।

एक लड़का था वो काफी मेहनत करता था हर बात सत्य बोलता था सीधा साधा था। उसके दोस्त भी काफी अच्छे – अच्छे थे।

लेकिन जब मेहनत की सफ़ेद चादर में कोयले की कालिख लगता है तो वो सफ़ेद चादर भी काला दिखने लगता है। और साफ़ फिर काफी मशक्कत के बाद साफ़ करना होता है।

ऐसे ही उस लड़के के साथ भी हुआ। वो एक लड़की से प्यार करता था लेकिन दिक्कत ये थी की वो सार्वजनिक प्यार करता था

मेरी समझ में तो प्यार सार्वजानिक ही करना चाहिए क्योंकि सार्वजानिक में हर कोई जानता है तो अच्छा लगता है, प्यार सच्चा हो तो और भी सम्मान मिलता है।

एक दिन पार्क में वो दोनों प्रेमी जोड़े बैठे हुए थे। गांव का एक लड़का जिसका नाम रवि था वो लड़की को पसंद करता था। लड़की भी अच्छी थी साफ़ चरित्र की थी। वो प्रेमी जोड़े बाहों में बाहे डाल कर प्रेम भरी बाते कर रहे थे।

और वो रवि नाम का लड़का चुपके चुपके पीछे से उसका वीडियो बना रहा था। वो प्रेमी जोड़े रवि से अनजान बेख़ौफ़ बातो में मशगूल थे।

बहुत दिन ऐसा ही चलता रहा प्रेमी जोड़े पार्क में जाते और खूब बाते करते बात हर तरह की होती थी।

आखिर अंत में उस प्रेमी जोड़ो ने सोचा की हम दोनों को शादी कर लेना चाहिए। जब वो अपने प्रेम की बात माँ बाप को बताये तो लड़की के माँ बाप ने कहा की ये लड़का ठीक नही है इसकी चत्रित ठीक नही!

अब क्या ! वहां लड़के के दिल को चोट ऐसे पहुँचा जैसे बूढ़े व्यक्ति को कार्डिएक अर्र्रेस्ट ! वो लड़का हैरान -परेशान हो गया वो सोचने लगा आखिर ये कैसे हो गया वो मैंने क्या गलत किया? मुझपे ये आरोप कैसे? वो विचलित हो गया वो सोचा अब मैं क्या कहूँगा लोग मुझे क्या कहेंग तरह तरह की बाते चलने लगी दिमाग में।

क्या ये सार्वजानिक का प्रमाण है ये फिर माँ बाप को बताने का प्रमाण है। प्यार तो सभी करते है।
सार्वजनिक करते है पार्क में सभी बैठते है लेकिन मेरे साथ ऐसा क्यों?

तभी उस ने बताया की रवि ने कुछ वीडियो बनायीं है और वो उसमे कुछ एनीमेशन के कमाल से उसे उल्टा-पलटा कर दिया है!

लड़का को तो कुछ समझ ही नही आ रहा की वो क्या करे वो बेचारा ठहरा गांव का लड़का वो रवि दिल्ली के बड़े इंस्टिट्यूट आईआईएमसी का छात्र!

लड़का लड़की के घर वालो को विश्वास दिलाने की कोशिश करता रहा। लेकिन लड़के को ये लग रहा था की वो तो बेकार में में फंस गया।

लड़की के माँ बाप तो ऊपर के मन से ये कह रहे थे हां बेटा ठीक है!

लेकिन अंदर कौन जाने क्या चल रहा है। लड़के को अब भी यही महसूस हो रहा है की सत्य परेशान हो रहा है!

ये कहानी सत्य है! और आगे की कहानी आगे की बात जब उस लड़के से जानूंगा तब बताऊंगा।

तब तक आप सभी दिल थाम के बैठिये! और शाम वाली चाय का मज़ा लीजिये।

  • चलता हूँ अब! उस लड़के से आगे की जानकारी लेने अलविदा! फिर जल्द मिलूँगा , अधूरी कहानी को पूरी करने।

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