सभ्य समाज के बेखौफ दरिंदे………

Posted by Janmejay Kumar
June 18, 2017

Self-Published

हम किस सभ्य समाज की बात करते है , जहाँ  महिलाएं, सुरक्षित नहीं है ? जिस देश में सभ्य समाज के पीछे हम दौड़ रहे हैं,  आज उसी देश के कोने-कोने से चीख-पुकार की आवाज़ हमारे कानों में सूई की तरह चूभ रही है । ये आवाज़ उन्हीं बेटियों और बेबस बुजुर्ग महिलायों की है जो अपनी जिंदगी खुलकर जीना चाहती है । लेकिन उसी समाज के कुछ दरिदें उन्हें अपनी हवस का शिकार बना रहे है।

गुड़गाव में अपनी 9 महीने की बच्ची के साथ ऑटो में बैठी महिला को चार लोगों ने अपनी हवस का शिकार बनाया। मासूम बच्ची का गला दबा कर ऑटो से बाहर फेक दिया। गैंग रेप पीड़ित महिला अपनी बच्ची का शव लेकर हॉस्पिटल दर हॉस्पिटल भटकती रही। दूसरी ओर दिल्ली के पालम में किताब खरीदने गई 8वीं के स्टूडेंट से 60 साल के दुकानदार ने रेप किया और  फरार हो गया । वहीं यूपी के सुल्तानपूर में तीन साल की मासूम के साथ रेप किया और उसे फेक दिया।  मुजफ्फनगर में भी 60 साल की बुजुर्ग महिला का गैंग रेप हुआ। निर्भया से पहले और उसके बाद भी इंसानियत को तार-तार करने वाली ख़बरें आ रही है।

ये महज चंद घटनाएं है। अगर राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के रिर्पोट को देखे तो शर्मनाक सच सामने आता है । NCRB के रिर्पोट के मुताबिक पूरे भारत में 2015 के  दौरान 34,771 रेप पीड़ित पाए गए । और  लगभग 90 फीसदी मामलों में कोई ना कोई पीड़िता के जान-पहचान का ही शामिल पाया गया। तो कोई भरोसा करे तो किस पर करे जब कोई अपना ही इन जघन्य अपराधों में शामिल हो।

आखिर सामान्य से दिखने वाले ये कैसे दरिदें हैं? जिनके मन में न तो दुधमुंही मासूम के लिए ममता भाव है न 60 साल के बुजुर्ग के लिए रहम ।  इन हैवानों को  ना तो समाज की परवाह है और ना ही कानून का डर, तो ऐसे में कैसे कोई खुलकर जीने की आशा कर सकता है ? और इसके लिए जिम्मेदार है कौन- समाज, सिस्टम , सरकार या फिर कानून ?

 

 

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