14 जून विश्व रक्तदान दिवस आपके रक्तदान से 3 लोगों का जीवन बचाया जा सकता है

Posted by rishi0404
June 14, 2017

Self-Published

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस मनाया जाता है। रक्तदान दिवस के दिन लोगों को रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया जाता है। ताकि रक्तदान कर सके। कई बार लोगों की आपात परिस्थितियों में खून के अभाव में मौत हो जाती है। रक्तदान से कई जरूरतमंद लोगो की जान बचाई जा सकती है। वैसे भी रक्तदान करना इंसान के शरीर के लिए फायदेमंद है। रक्तदान करने से हमारे शरीर में किसी प्रकार का कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि हमारे द्वारा दान किये गये रक्त की रिकवरी हमारा शरीर कुछ ही घंटों में कर लेता है। कुछ लोग अपने मन में यह भ्राति पाल लेते है कि रक्तदान करने से हमारे शरीर में कमजोरी आएगी।

ब्‍लड डोनेट

रायबरेली जिला अस्पताल में रक्तदान करते मानव मित्र संगठन के मानव मित्र

करने से किसी को नवजीवन देकर जो आत्मिक आनन्‍द मिलता है उसका न तो कोई मूल्‍य ऑंका जा सकता है न ही उसे शब्‍दों में व्‍यक्‍त किया जा सकता है। चिकित्‍सकों का यह मानना है कि रक्‍तदान खून में कोलेस्‍ट्रॉल की अधिकता रक्‍त प्रवाह में बाधा डालती है। रक्‍त दान शरीर द्वारा रक्‍त बनाने की क्रिया को भी तीव्र कर देता है। रक्‍त के कणों का जीवन सिर्फ 90 से 120 दिन तक का होता है। प्रतिदिन हमारे शरीर में पुराने रक्‍त का क्षय होता रहता है और नया रक्‍त बनता जाता है इका हमें कोई अनुभव नहीं होता। बहुत से स्‍त्री-पुरूषों ने नियमित रूप से रक्‍त दान करने का क्रम बना रखा है। अतः आप भी नियमित रूप से स्‍वैच्छिक रक्‍तदान करें, जिससे रक्‍त की हमेशा उपलब्‍धता बनी रहे कोई सुहागिन विधवा न बने, वृद्व मॉ-बाप बेसहारा न हो, खिलता यौवन असमय ही काल कलवित न हो आज किसी को आपके रक्‍त की आवश्‍यकता है, हो सकता है कल आपको किसी के रक्‍त की आवश्‍यकता हो अतः निडर होकर स्‍वैच्छिक रक्‍त दान करना चाहिए

दुर्घटना में अचानक अत्यधिक रक्तस्राव या अन्य बीमारियों जैसे- खून का निर्माण कम या ना के बराबर होना, जैसी स्थितियों में रोगी को खून बाहर से दिया जाता है। यह खून एक व्यक्ति से लेकर दूसरे व्यक्ति को एबीओ एवं आर एच ब्लड ग्रुप मैचिंग करने के बाद चढ़ाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि रक्तदान-महादानहै, क्योंकि दान किया गया खून बहुत परिस्थितियों में किसी की जान बचाता है। इसकी महत्ता को देखते हुए हर बड़े अस्पताल में एक ब्लड बैंक की स्थापना कीजाती है, जहां पर जरूरत पड़ने पर रक्त लिया और दान किया जा सकता है

 

रक्तदाता के प्रकार

 

स्वेच्छा से रक्त देने वाले जिन्हें वालियंटरी डोनर कहा जाता है। इन्हें रक्तदान करने पर एक कार्ड दिया जाता है,जिसे वालियंटरी डोनर कार्ड कहते हैं। आवश्यकता पड़ने पर इसके द्वारा रक्त वापस भी लिया जा सकता है।

अपने मित्रों या संबंधियों के लिए रक्त देने वाले जो किसी मरीज के नाम पर दिया जाता है। यदि यह खून उस मरीज के काम नहीं आता तो वह ब्लड बैंक में जमा करलिया जाता है।

 

 

प्रोफेशनल डोनर ये वो लोग होते हैं जो पैसे लेकर रक्त देते हैं। ऐसा रक्त सर्वाधिक नुकसानदायक हो सकता है,क्योंकि ऐसे लोग अधिकांशत: हेपेटाइटिस, सिफिलिस या एच.आई.वी से संक्रमित होते हैं।

 

कौन कर सकता है रक्तदान

 

सामान्यतया उसी व्यक्ति का रक्त लिया जाता है जिसका स्वास्थ्य ठीक हो।

 

कोई भी स्वस्थ्य व्यक्ति जिसकी उम्र 18 से 60 साल के बीच हो, और 45 किलोग्राम से अधिक वजन का हो।

 

जिसे एचआईवी, हेपाटिटिस बी या सी जैसी बीमारी न हो, वह रक्तदान कर सकता है।

 

कम से कम 12 सप्ताह पहले तक रक्त ना दिया हो एवं पिछले 12 महीने में रक्त ना लिया हो।

 

रक्त देने के स्थान पर किसी तरह का निशान या घाव ना हो।

 

हीमोग्लोबिन 12.5 से अधिक हो।

 

शरीर के अन्य अंग भी नियमित काम कर रहे हो।

 

रक्त देने से पहले भर पेट नाश्ता/ भोजन किया हुआ हो।

 

रक्तदान स्वास्‍थ्‍य के लिए फायदेमंद-

रक्तदान स्वास्‍थ्‍य के लिए फायदेमंद-

 

मनुष्य के शरीर में रक्त बनने की प्रक्रिया हमेशा चलती रहती है, और रक्तदान से कोई भी नुकसान नहीं होता है।

 

एक बार में 350 मिलीग्राम रक्त दिया जाता है, उसकी पूर्ति शरीर में चौबीस घण्टे के अन्दर हो जाती है, और गुणवत्ता की पूर्ति 21 दिनों के भीतर हो जाती है।

 

जो व्यक्ति नियमित रक्तदान करते हैं उन्हें हृदयसम्बन्धी बीमारियां होने का खतरा कम रहता हैं।

 

हमारे रक्त की संरचना ऐसी है कि उसमें समाहित रेड ब्लड सेल तीन माह में स्वयं ही मर जाते हैं,लिहाज़ा प्रत्येक स्वस्थ्य व्यक्ति तीन माह में एक बार रक्तदान कर सकता है।

 

आधा लीटर ख़ून तीन लोगों की जान बचा सकता है।

कौन नही कर सकता है रक्‍तदान

 

जिन्हें आगे आने वाले 12 घंटों में लंबी यात्रा, वायु यात्रा करनी हो या किसी तरह का भारी काम करना हो।

 

श्वास की बीमारी जैसे लगातार खांसी, जुखाम, गला खराब, या लंबे समय से एंटीबायोटिक ले रहे हों या अस्थमा के मरीज जो स्टीरइड ले रहे हों।

 

किसी तरह का कोई मेजर/ माइनर ऑपरेशन हुआ हो।

 

हृदय रोगी जो एंजाइना, ब्लॉकेज के मरीज हो।

 

अंत:स्रावी ग्रंथियों के रोगियों से रक्त नहीं लिया जाता।

 

डायबिटीज के रोगी जो इंसुलिन लेते हो।

 

किडनी, पाचनतंत्र के रोगी रक्तनदान नहीं कर सकते।

 

हेपेटाइटिस, एचआईवी एड्स, सिफिलिस, टीबीआदि के रोगी रक्त दान नहीं कर सकते।

 

बेहोशी या मिर्गी आती हो, या जो पिछले 3 वर्षो में पीलिया हुआ हो।

 

जो एस्प्रीन, एन्टीथायरॉइड, एन्टीबायोटिक, स्टीरइड आदि दवाइयां ले रहे हों।

 

वह महिलाएं जो पिछले 6 महीनों में गर्भवती हुई हो या स्तनपान कराती हो

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