21वीं सदी में भी अंधविश्वास का दौर, कैसे खूले में शौच से मुक्त होगा भारत

Posted by Suman Shekhar
June 28, 2017

Self-Published

इक्कीसवीं सदी मतलब आधुनिकता का दौर। इस सदी में लोग अपनी सुख – सुविधाओं के लिए विभिन्न प्रकार के उपकरणों के मदद से सुखों का उपभोग कर रहे हैं। लेकिन इस युग में भी अंधविश्वास घिरा हो तो यह काफी आश्चर्य और पीछड़ेपन का परिचायक है। केंद्र सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत वर्ष 2019 तक पूरे भारत को खूले में शौच मुक्त बनाने की बात कर रही है, इसके लिए सरकार करोड़ों खर्च करके जागरूकता अभियान भी चला रही है। वहीं बिहार के नवादा जिले के अकबरपुर प्रखंड का एक ऐसा गांव है जहाँ के लोग अंधविश्वास के फेर में अभी भी अटके हैं। यह जानकर आपको हैरत होगी कि बिहार के गाजिपुर नामक इस गांव के अधिकांश लोग सुखी – संपन्न हैं लेकिन गांव के किसी भी घर में शौचालय नहीं है। यहां के लोग एसी, कुलर, गीजर जैसे तमाम भौतिक सुख – सुविधाओं का आनंद ले रहे हैं लेकिन पूर्व में घटित एक – दो घटनाओं ने इस कदर खौफ पैदा कर दिया कि यहाँ के लोग शौचालय बनवाने का सोचते तक नहीं हैंं।

 ये है वजह

गाजीपुर का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुरानी है। वर्ष 1984 में गांव के सीद्धेश्वर सिंह ने अपने घर में शौचालय बनवाना शुरू किया। इस दौरान उनके पुत्र बुखार से पीड़ित हो गये फिर अकस्मात निधन हो गया। कुछ और ऐसी ही अप्रिय घटना हुई जिससें ग्रामीणों के जेहन में यह बैठ गया कि शौचालय निर्माण इस गाँव के लिए अपशकुन लेकर आता है। अब हाल ये है कि लोग घरों में शौचालय बनवाना तो दूर इसका इस्तेमाल से भी खौफ खाते हैं। गांव के प्राथमिक विद्यालय में शौचालय बना हुआ है लेकिन लोग इस्तेमाल से डरते हैं।

 

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