चंचल के ज़िंदा रहते हम उसे न्याय नहीं दिला पाए

Posted by Iti Sharan in Gender-Based Violence, Hindi, Specials
June 24, 2017

चंचल से मेरी पहली मुलाकात 2 साल पहले उसके घर पर हुई थी। बहुत ही प्यारी और हिम्मती लड़की। एसिड अटैक की घटना के बाद भी उसमें बहुत सकरात्मकता थी। कल सुबह पता चला कि चंचल हम सबको छोड़कर जा चुकी है। चंचल की मौत की ख़बर पर विश्वास करना मुश्किल था, क्योंकि वो हारने वालों में से नहीं थी। वो अपनी लड़ाई लड़ रही थी, बीमारी से भी और अपने साथ हुए अन्याय के लिए भी।

चंचल एकतरफा प्यार की शिकार हुई थी। एक मजदूर परिवार में जन्मी चंचल गरीबी के बीच भी अपने जीवन के हर रंग को खुल कर जी रही थी। वो पढ़ लिख कर एक अच्छी नौकरी करना चाहती थी। इन्हीं सपनों के साथ वो 10वीं की परीक्षा के बाद 11वीं में नामांकन की तैयारी में थी। मगर तभी उसके जीवन में एक ऐसे मनचले आशिक ने दस्तक दी, जिसके एकतरफा प्यार के जुनून ने उसके जीवन को एक संघर्ष में बदल दिया। एकतरफा प्यार के दावे के साथ ही वो आशिक चंचल का पीछा करना शुरू कर दिया और तमाम धमकी के विफल होने के बाद उसने एक रात चंचल पर एसिड फेंक दिया। चंचल उस समय अपनी छोटी बहन सोनम के साथ छत पर सो रही थी। चंचल पर एसिड फेंकने के क्रम में उसकी बहन का हाथ और पेट भी बूरी तरह जल गया था।

चंचल का जीवन के प्रति सकरात्मक रवैया ही था कि उसने इस हमले के बाद भी अपनी पढ़ाई चालू रखी। हालांकि इस हमले से पहले उसके जितने भी दोस्त थे सभी ने उससे नाता तोड़ दिया था। लेकिन, चंचल और उसकी बहन को अपने परिवार से पूरा प्यार और सहयोग मिला।

इस हमले के बाद चंचल का चेहरा बुरी तरह जल गया था। उसके चेहरे की दयनीय स्थिति के लिए ना सिर्फ एसिड फेंकने वाले आरोपी बल्कि डॉक्टर्स भी जिम्मेदार हैं। हमले के बाद चंचल और उसकी बहन को पीएमसीएच अस्पताल ले जाया गया था। उस वक़्त वहां के डॉक्टर और नर्स उन्हें देखना भी नहीं चाह रहे थे। दोनों बहनों को रात के करीब एक बजे भर्ती कराया गया था, मगर जिस डॉक्टर को उनका इलाज करना था वो सुबह साढ़े दस बजे के करीब पहुंचे थे। उतनी देर तक दोनों को ठीक से प्राथमिक उपचार भी नहीं मिला था।

बिहार में आए दिन एसिड अटैक की घटनाएं सामने आती हैं। अकसर मामलों में पीड़िता को सही इलाज उपलब्ध नहीं हो पाता है। कई पीड़िताओं की आत्महत्या की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। पिछले साल वैशाली जिले के एक गांव में भी एक तेजाब पीड़िता ने बिजली का तार पकड़ कर जान दे दी थी।

यह सब तब हो रहा जब नीतिश कुमार ने खुद यह वादा किया था कि एसिड अटैक विक्टिम्स को इलाज की पूरी सुविधाएं मिलेंगी। अस्पतालों को इसकी सूचना और दिशा-निर्देश भी दे दिए गए हैं। सिविल सर्जन की अध्यक्षता में निजी अस्पताल संचालकों और सरकारी अस्पतालों के प्रभारियों के साथ बैठक करके उन्हें यह जानकारी दी गई थी। बावजूद इसके सभी नियमों और आदेशों को धड़ल्ले से नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।

चंचल की मौत की वजह भी उसे सही मेडिकल सुविधा ना मिलना ही माना जा रहा है। चंचल पिछले एक साल से काफी बीमार चल रही थी। उसे टीबी भी हो गया था। लेकिन, बिहार में उसे सही मेडिकल सुविधाएं नहीं मिल पा रही थी।

चंचल और उसकी बहन सोनम का दोषी आज खुलेआम बाहर घूम रहा है। इस घटना को अंजाम देने में 4 लोग शामिल थे जिनमें से सिर्फ एक पुलिस की हिरासत में है बाकि 3 आराम से बाहर घूम रहे हैं। सबसे बड़ी बात तो उनमें से मुख्य आरोपी को ही झूठे कागज़ात के आधार पर नाबालिक घोषित करके छोड़ दिया गया था। चंचल का कहना था कि मैं अपनी आँखों के सामने उस लड़के को घूमते देखती हूँ पर चाह कर भी कुछ नहीं कर सकती।

चंचल और सोनम एक बार जनता दरबार में जब इंसाफ की गुहार के लिए गई भी तो उस वक़्त उन्हें बिना नीतीश कुमार से मिलवाए ही लौटा दिया गया। उन्हें ये कहकर वापस भेज दिया गया कि आज सिर्फ ज़मीन जायदात के मुद्दे पर ही बातें सुनी जाएंगी आप दूसरे दिन आना।

चंचल ने मुझसे कहा था कि उसे अभी भी प्यार पर पूरा भरोसा है। उसका कहना था कि उस आदमी ने मुझसे प्यार नहीं किया था, अगर वो प्यार करता तो मेरे साथ कभी भी ऐसा नहीं करता। वो तो उसका एक जूनून और पागलपन था। मैं उसकी नहीं तो किसी और की भी नहीं हो सकती ये सोचकर उसने मेरे साथ ऐसा किया।

 

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